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पीएलआई योजना से एपीआई आयात निर्भरता घटी, 5 ग्रीनफील्ड परियोजनाओं ने बदली भारत की दवा आपूर्ति तस्वीर

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पीएलआई योजना से एपीआई आयात निर्भरता घटी, 5 ग्रीनफील्ड परियोजनाओं ने बदली भारत की दवा आपूर्ति तस्वीर

सारांश

तीन दशक बाद पेनिसिलिन-जी का घरेलू उत्पादन, सल्फेडियाजिन आयात में 73% गिरावट — पीएलआई योजना की पाँच ग्रीनफील्ड परियोजनाएँ भारत की दवा आपूर्ति श्रृंखला में एक रणनीतिक बदलाव की दस्तक हैं।

मुख्य बातें

पीएलआई योजना के तहत 5 ग्रीनफील्ड परियोजनाओं ने एंटीबायोटिक्स, हृदय रोग व पैरासिटामोल श्रेणी में एपीआई आयात निर्भरता घटाई।
लाइफियस फार्मा ने काकीनाडा में ₹2,270.05 करोड़ निवेश से 15,000 मीट्रिक टन पेनिसिलिन-जी क्षमता; 3 दशक बाद घरेलू उत्पादन पुनः शुरू।
किनवान प्राइवेट लिमिटेड ने नालागढ़ में पोटेशियम क्लैवुलनेट की भारत की पहली किण्वन-आधारित विनिर्माण सुविधा स्थापित की।
आंध्र ऑर्गेनिक्स के सल्फेडियाजिन उत्पादन से वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में आयात में 73% की गिरावट।
मेघमानी एलएलपी (दहेज) और सेंट्रिएंट फार्मास्युटिकल्स (नवांशहर) ने पैरासिटामोल-पीएपी व एटोरवास्टेटिन में 80%+ घरेलू मूल्यवर्धन हासिल किया।
पाँचों परियोजनाओं ने मिलकर 3,956 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं।

थोक दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारत में सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई), प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम) और दवा मध्यवर्ती (डीआई) के घरेलू उत्पादन को सुदृढ़ कर रही है। 25 सितंबर 2026 को सामने आए आँकड़ों के अनुसार, योजना के तहत चालू हुई पाँच ग्रीनफील्ड परियोजनाओं ने एंटीबायोटिक्स, हृदय रोग की दवाओं और पैरासिटामोल जैसी आवश्यक दवाओं के निर्माण में आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।

पेनिसिलिन-जी: तीन दशक बाद घरेलू उत्पादन की वापसी

ऑरोबिंदो फार्मा लिमिटेड की सहायक कंपनी लाइफियस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा एसईजेड में पेनिसिलिन-जी के बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा स्थापित की है। ₹2,270.05 करोड़ के निवेश से निर्मित इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 15,000 मीट्रिक टन है। इस परियोजना ने 2,353 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं और ₹1,191 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है।

गौरतलब है कि 90 प्रतिशत से अधिक घरेलू मूल्यवर्धन के साथ, यह परियोजना लगभग तीन दशकों के अंतराल के बाद पेनिसिलिन-जी का घरेलू विनिर्माण पुनः शुरू करती है। पेनिसिलिन-जी एक किण्वन-आधारित केएसएम है जिसका उपयोग एमोक्सिसिलिन और एम्पीसिलिन सहित व्यापक रूप से निर्धारित एंटीबायोटिक दवाओं के निर्माण में होता है।

क्लैवुलैनिक एसिड: भारत की पहली किण्वन-आधारित सुविधा

डीपीबी समूह की कंपनी किनवान प्राइवेट लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में 400 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की किण्वन-आधारित क्लैवुलैनिक एसिड (पोटेशियम क्लैवुलनेट) विनिर्माण सुविधा स्थापित की है। ₹504.68 करोड़ के निवेश वाली इस परियोजना ने 465 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं और ₹413 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है।

यह पोटेशियम क्लैवुलनेट के लिए भारत की पहली किण्वन-आधारित विनिर्माण सुविधा है। क्लैवुलैनिक एसिड एक बीटा-लैक्टामेज अवरोधक है जो एमोक्सिसिलिन जैसे पेनिसिलिन-समूह एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मिलकर प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ उनकी प्रभावशीलता बढ़ाता है।

हृदय रोग दवाएँ और सल्फेडियाजिन: आयात में 73% गिरावट

विरचो लेबोरेटरीज लिमिटेड की सहायक कंपनी आंध्र ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एओएल) ने आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पायदिभीमावरम में सल्फेडियाजिन, टेल्मिसार्टन और ओल्मेसार्टन के उत्पादन संयंत्र स्थापित किए हैं। इन परियोजनाओं में कुल ₹151.47 करोड़ का निवेश किया गया है और 221 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।

आँकड़ों के अनुसार, सल्फेडियाजिन के घरेलू उत्पादन से वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में आयात में लगभग 73 प्रतिशत की गिरावट आई है। टेल्मिसार्टन और ओल्मेसार्टन उच्च रक्तचाप की दवाओं में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण एपीआई हैं।

पैरासिटामोल और एटोरवास्टेटिन: बैकवर्ड इंटीग्रेशन को बल

मेघमानी एलएलपी ने गुजरात के दहेज में ₹60.46 करोड़ के निवेश से 13,500 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की पैरा अमीनो फिनोल (पीएपी) विनिर्माण क्षमता स्थापित की है। पीएपी पैरासिटामोल के उत्पादन की एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री है जिसे पहले बड़े पैमाने पर आयात किया जाता था। इस परियोजना ने ₹687 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है।

सेंट्रिएंट फार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने पंजाब के नवांशहर में ₹161.13 करोड़ के निवेश से 206 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की एटोरवास्टेटिन एपीआई विनिर्माण सुविधा स्थापित की है, जिसने ₹432 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है। एटोरवास्टेटिन कोलेस्ट्रॉल कम करने और हृदय रोग के जोखिम को घटाने के लिए व्यापक रूप से निर्धारित दवा है। इस परियोजना ने 80 प्रतिशत से अधिक घरेलू मूल्यवर्धन वाली आपूर्ति श्रृंखला विकसित की है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखलाएँ भू-राजनीतिक तनावों और महामारी के बाद की पुनर्संरचना के दौर से गुजर रही हैं। पाँचों परियोजनाएँ घरेलू मूल्यवर्धन, आयात प्रतिस्थापन, रोजगार सृजन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में एक साथ योगदान दे रही हैं। आँकड़ों के अनुसार, लक्षित नीतिगत समर्थन ने रणनीतिक दवा निर्माण क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण को संभव बनाया है — और आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का विस्तार भारत की वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थिति को और सुदृढ़ कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देना ज़रूरी है कि पाँच परियोजनाएँ भारत की विशाल दवा आयात टोकरी का एक छोटा हिस्सा कवर करती हैं — देश अभी भी चीन से बड़ी मात्रा में केएसएम आयात करता है। सल्फेडियाजिन में 73% आयात गिरावट प्रभावशाली है, लेकिन एपीआई की संख्या सैकड़ों में है जहाँ यही कहानी दोहराई जानी बाकी है। असली परीक्षा यह है कि क्या ये घरेलू उत्पादन क्षमताएँ वैश्विक मूल्य प्रतिस्पर्धा में टिक सकती हैं, और क्या सरकार दूसरी और तीसरी पीढ़ी की एपीआई के लिए इसी रफ्तार से नई परियोजनाएँ लाएगी। जब तक दस नहीं बल्कि सौ ऐसी परियोजनाएँ चालू नहीं होतीं, 'आत्मनिर्भर फार्मा' का लक्ष्य महत्वाकांक्षा ही रहेगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना क्या है?
थोक दवाओं के लिए पीएलआई (उत्पादन आधारित प्रोत्साहन) योजना एक केंद्र सरकार की नीति है जो भारत में सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई), प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम) और दवा मध्यवर्ती (डीआई) के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य आयात निर्भरता घटाना और दवा आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करना है।
पीएलआई योजना के तहत किन-किन दवाओं का घरेलू उत्पादन शुरू हुआ?
योजना के तहत पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड (पोटेशियम क्लैवुलनेट), सल्फेडियाजिन, टेल्मिसार्टन, ओल्मेसार्टन, पैरा अमीनो फिनोल (पीएपी — पैरासिटामोल का अग्रदूत) और एटोरवास्टेटिन एपीआई का घरेलू उत्पादन शुरू हुआ है। ये एंटीबायोटिक्स, हृदय रोग और बुखार-दर्द निवारक दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सल्फेडियाजिन के आयात में कितनी कमी आई है?
आँकड़ों के अनुसार, आंध्र ऑर्गेनिक्स लिमिटेड द्वारा 2022 में घरेलू आपूर्ति शुरू करने के बाद से वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में सल्फेडियाजिन के आयात में लगभग 73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह आयात प्रतिस्थापन का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
पेनिसिलिन-जी परियोजना का भारत की एंटीबायोटिक आपूर्ति पर क्या असर होगा?
लाइफियस फार्मा की काकीनाडा परियोजना ने लगभग तीन दशकों के अंतराल के बाद पेनिसिलिन-जी का घरेलू उत्पादन पुनः शुरू किया है। इससे भारत की एंटीबायोटिक आपूर्ति श्रृंखला में एक रणनीतिक कमज़ोरी दूर हुई है, बाहरी आपूर्ति व्यवधान और कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम घटा है, और एमोक्सिसिलिन व एम्पीसिलिन जैसी व्यापक उपयोग की एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
इन परियोजनाओं से कितने रोजगार सृजित हुए हैं?
पाँचों ग्रीनफील्ड परियोजनाओं ने मिलकर 3,956 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं — जिनमें लाइफियस फार्मा से 2,353, किनवान से 465, आंध्र ऑर्गेनिक्स से 221 और सेंट्रिएंट फार्मास्युटिकल्स से 432 शामिल हैं। ये रोजगार आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में वितरित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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