पीएलआई योजना से एपीआई आयात निर्भरता घटी, 5 ग्रीनफील्ड परियोजनाओं ने बदली भारत की दवा आपूर्ति तस्वीर
सारांश
मुख्य बातें
थोक दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारत में सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई), प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम) और दवा मध्यवर्ती (डीआई) के घरेलू उत्पादन को सुदृढ़ कर रही है। 25 सितंबर 2026 को सामने आए आँकड़ों के अनुसार, योजना के तहत चालू हुई पाँच ग्रीनफील्ड परियोजनाओं ने एंटीबायोटिक्स, हृदय रोग की दवाओं और पैरासिटामोल जैसी आवश्यक दवाओं के निर्माण में आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।
पेनिसिलिन-जी: तीन दशक बाद घरेलू उत्पादन की वापसी
ऑरोबिंदो फार्मा लिमिटेड की सहायक कंपनी लाइफियस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा एसईजेड में पेनिसिलिन-जी के बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा स्थापित की है। ₹2,270.05 करोड़ के निवेश से निर्मित इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 15,000 मीट्रिक टन है। इस परियोजना ने 2,353 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं और ₹1,191 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है।
गौरतलब है कि 90 प्रतिशत से अधिक घरेलू मूल्यवर्धन के साथ, यह परियोजना लगभग तीन दशकों के अंतराल के बाद पेनिसिलिन-जी का घरेलू विनिर्माण पुनः शुरू करती है। पेनिसिलिन-जी एक किण्वन-आधारित केएसएम है जिसका उपयोग एमोक्सिसिलिन और एम्पीसिलिन सहित व्यापक रूप से निर्धारित एंटीबायोटिक दवाओं के निर्माण में होता है।
क्लैवुलैनिक एसिड: भारत की पहली किण्वन-आधारित सुविधा
डीपीबी समूह की कंपनी किनवान प्राइवेट लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में 400 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की किण्वन-आधारित क्लैवुलैनिक एसिड (पोटेशियम क्लैवुलनेट) विनिर्माण सुविधा स्थापित की है। ₹504.68 करोड़ के निवेश वाली इस परियोजना ने 465 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं और ₹413 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है।
यह पोटेशियम क्लैवुलनेट के लिए भारत की पहली किण्वन-आधारित विनिर्माण सुविधा है। क्लैवुलैनिक एसिड एक बीटा-लैक्टामेज अवरोधक है जो एमोक्सिसिलिन जैसे पेनिसिलिन-समूह एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मिलकर प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ उनकी प्रभावशीलता बढ़ाता है।
हृदय रोग दवाएँ और सल्फेडियाजिन: आयात में 73% गिरावट
विरचो लेबोरेटरीज लिमिटेड की सहायक कंपनी आंध्र ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एओएल) ने आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पायदिभीमावरम में सल्फेडियाजिन, टेल्मिसार्टन और ओल्मेसार्टन के उत्पादन संयंत्र स्थापित किए हैं। इन परियोजनाओं में कुल ₹151.47 करोड़ का निवेश किया गया है और 221 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।
आँकड़ों के अनुसार, सल्फेडियाजिन के घरेलू उत्पादन से वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में आयात में लगभग 73 प्रतिशत की गिरावट आई है। टेल्मिसार्टन और ओल्मेसार्टन उच्च रक्तचाप की दवाओं में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण एपीआई हैं।
पैरासिटामोल और एटोरवास्टेटिन: बैकवर्ड इंटीग्रेशन को बल
मेघमानी एलएलपी ने गुजरात के दहेज में ₹60.46 करोड़ के निवेश से 13,500 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की पैरा अमीनो फिनोल (पीएपी) विनिर्माण क्षमता स्थापित की है। पीएपी पैरासिटामोल के उत्पादन की एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री है जिसे पहले बड़े पैमाने पर आयात किया जाता था। इस परियोजना ने ₹687 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है।
सेंट्रिएंट फार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने पंजाब के नवांशहर में ₹161.13 करोड़ के निवेश से 206 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की एटोरवास्टेटिन एपीआई विनिर्माण सुविधा स्थापित की है, जिसने ₹432 करोड़ का संचयी उत्पादन दर्ज किया है। एटोरवास्टेटिन कोलेस्ट्रॉल कम करने और हृदय रोग के जोखिम को घटाने के लिए व्यापक रूप से निर्धारित दवा है। इस परियोजना ने 80 प्रतिशत से अधिक घरेलू मूल्यवर्धन वाली आपूर्ति श्रृंखला विकसित की है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखलाएँ भू-राजनीतिक तनावों और महामारी के बाद की पुनर्संरचना के दौर से गुजर रही हैं। पाँचों परियोजनाएँ घरेलू मूल्यवर्धन, आयात प्रतिस्थापन, रोजगार सृजन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में एक साथ योगदान दे रही हैं। आँकड़ों के अनुसार, लक्षित नीतिगत समर्थन ने रणनीतिक दवा निर्माण क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण को संभव बनाया है — और आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का विस्तार भारत की वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थिति को और सुदृढ़ कर सकता है।