उत्तर कोरिया का जापान के सुरक्षा दस्तावेज़ बदलावों पर हमला, बताया 'विश्व शांति के लिए खुली चुनौती'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने सोमवार, 4 मई 2026 को जापान की सुरक्षा नीति में प्रस्तावित बड़े बदलावों की कड़ी आलोचना की और इन्हें 'दुनिया की शांति और इंसानियत के लिए खुली चुनौती' करार दिया। प्योंगयांग की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब जापान अपने तीन प्रमुख सुरक्षा दस्तावेज़ों को अपडेट करने की प्रक्रिया में है।
जापान के सुरक्षा दस्तावेज़ों में क्या बदलाव हो रहे हैं
जापान इस वर्ष अपने तीन अहम सुरक्षा दस्तावेज़ों — नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी, नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी और डिफेंस बिल्डअप प्रोग्राम — को अपडेट करने की दिशा में काम कर रहा है। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और क्षेत्र में गहराते सुरक्षा खतरों के जवाब में उठाया जा रहा है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने अक्टूबर 2025 में घोषणा की थी कि वह देश की सैन्य क्षमता को तेज़ी से बढ़ाना चाहती हैं और मार्च 2026 तक रक्षा बजट को जीडीपी के 2 प्रतिशत तक पहुँचाने का वादा किया था।
उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया
उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रोडोंग सिनमुन में प्रकाशित एक लेख में इन बदलावों को जापान की 'चालाक साज़िश' बताया गया। लेख में आरोप लगाया गया कि इसके ज़रिए जापान 'दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच फिर से हमला करने की अपनी पुरानी मंशा' को पूरा करना चाहता है। उत्तर कोरिया का कहना है कि रक्षा बजट में वृद्धि, हथियार निर्यात पर प्रतिबंध हटाना और सेना की ताकत बढ़ाना — ये सभी कदम 'जापान के हथियार उद्योग को फिर से खड़ा करने और उसकी युद्ध क्षमता बढ़ाने' के लिए हैं।
हथियार निर्यात नीति में बड़ा बदलाव
पिछले महीने जापान सरकार ने रक्षा उपकरण और तकनीक के हस्तांतरण से जुड़े नियमों में संशोधन किया। इससे अब जापान घातक हथियारों सहित कई श्रेणियों के हथियार विदेशों में बेच सकेगा। इस फैसले के विरुद्ध जापान में बड़े पैमाने पर जन-विरोध भी देखा गया।
गौरतलब है कि पहले जापान केवल पाँच प्रकार के गैर-लड़ाकू उपकरण — बचाव, परिवहन, चेतावनी, निगरानी और माइन-निष्कासन — ही निर्यात कर सकता था। नए नियमों के तहत उपकरणों को 'हथियार' और 'गैर-हथियार' दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। रडार सिस्टम जैसे गैर-हथियार उपकरणों का निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा, जबकि अब जापान उन देशों को मिसाइल और युद्धपोत जैसे हथियार भी बेच सकेगा जिनके साथ उसका रक्षा सूचना सुरक्षा समझौता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। जापान का यह नीतिगत बदलाव न केवल उत्तर कोरिया, बल्कि चीन के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने 2026 के अंत तक तीनों प्रमुख सुरक्षा दस्तावेज़ों को अपडेट करने का लक्ष्य रखा है, जिससे आने वाले महीनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है।