NCTF 2026: सहकारी क्षेत्र की क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय परामर्श बैठक, गुणवत्ता प्रशिक्षण पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के अटल अक्षय ऊर्जा भवन में राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण रूपरेखा (NCTF 2026) पर आयोजित राष्ट्रीय परामर्श बैठक का उद्घाटन किया। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के विजन और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारी तंत्र को सुदृढ़ और पेशेवर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
बैठक का उद्देश्य और आयोजन
'त्रिभुवन' सहकारी विश्वविद्यालय (TSU) ने सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से यह परामर्श बैठक आयोजित की। बैठक में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय स्तर के सहकारी महासंघ, राज्य सहकारी संघ, सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, क्षेत्रीय विकास संगठन और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह NCTF प्रक्रिया के अंतर्गत प्रस्तावित दो राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठकों में से पहली है।
गुणवत्ता और परिणाम पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने स्पष्ट किया कि सहकारी प्रशिक्षण का ध्यान केवल कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और परिणामों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रशिक्षण संबंधी हस्तक्षेपों से संस्थागत क्षमताएं अधिक मजबूत हों, पेशेवर दक्षताओं में सुधार आए और सहकारी संस्थाओं तथा उनके सदस्यों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जाएं।
विश्वविद्यालय की भूमिका और साझा ढाँचे की आवश्यकता
'त्रिभुवन' सहकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) एस.पी. सिंह ने 'सहकार से समृद्धि' के विजन को साकार करने में NCTF की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सहकारी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़ी संस्थाओं को एक साझा और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाँचे के माध्यम से एकजुट करना ज़रूरी है। यह ढाँचा अधिक समन्वय, गुणवत्ता, प्रासंगिकता, पहुँच और निरंतरता सुनिश्चित करे तथा विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों की विविध जरूरतों के प्रति उत्तरदायी भी बना रहे।
आगे की प्रक्रिया
इस राष्ट्रीय परामर्श बैठक के बाद NCTF प्रक्रिया के तहत पाँच क्षेत्रीय स्तर की परामर्श बैठकें आयोजित की जाएंगी, जो उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत को कवर करेंगी। इसके उपरांत दूसरी राष्ट्रीय परामर्श बैठक भी प्रस्तावित है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार देशभर में सहकारी संस्थाओं को आधुनिक प्रबंधन और डिजिटल दक्षता से लैस करने पर जोर दे रही है।