11 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल में यूसीसी-2026 पर 9 सदस्यीय कमेटी गठित, रिटायर्ड जज रंजना देसाई होंगी अध्यक्ष

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पश्चिम बंगाल में यूसीसी-2026 पर 9 सदस्यीय कमेटी गठित, रिटायर्ड जज रंजना देसाई होंगी अध्यक्ष

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार ने यूसीसी-2026 के मसौदे की समीक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति गठित की है। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत उठाया गया है और विधानसभा में पेश होने से पहले विधेयक की गहन समीक्षा का रास्ता खोलता है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 11 जुलाई 2025 को यूसीसी-2026 मसौदे की समीक्षा के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित की।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश) समिति की अध्यक्ष होंगी।
समिति में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय , वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, शिक्षाविद् और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं।
मसौदे का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों को सभी समुदायों के लिए एकसमान कानूनी ढाँचे में लाना है।
राज्य मंत्रिमंडल ने 2 जुलाई 2025 की बैठक में समिति गठन को मंजूरी दी थी।
यह कदम संविधान के अनुच्छेद 44 (नीति-निर्देशक सिद्धांत) के अनुरूप उठाया गया है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 11 जुलाई 2025 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी), पश्चिम बंगाल-2026 के मसौदा विधेयक की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देने के लिए 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इस समिति की अध्यक्षता करेंगी। राज्य के न्यायिक विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

समिति का गठन और पृष्ठभूमि

राज्य मंत्रिमंडल ने 2 जुलाई 2025 को हुई बैठक में इस समिति के गठन को मंजूरी दी थी। अधिसूचना के अनुसार, सरकार का मानना है कि विषय की व्यापकता और जटिलता को देखते हुए मसौदा विधेयक का विस्तृत परीक्षण आवश्यक है। विधानसभा में पेश किए जाने से पहले यह समिति विधेयक की गहन समीक्षा करेगी।

समिति में कौन-कौन शामिल हैं

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली इस समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:

मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, गृह विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष, बंगबासी कॉलेज की सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर रत्ना भट्टाचार्य, गौर बंगा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्रा, कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता उस्मान गनी मलिक और संभाग के पूर्व कार्यकारी निदेशक निर्मल्य भट्टाचार्य

संवैधानिक आधार और मसौदे का दायरा

राज्य सरकार ने यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 — भाग-4 के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत — के अनुरूप उठाया है, जो राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। अधिसूचना के अनुसार, मसौदा विधेयक का उद्देश्य सभी धर्म, आस्था और समुदाय के निवासियों के लिए विवाह, तलाक, निर्वसीयत उत्तराधिकार और वसीयती उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों को एक समान कानूनी ढाँचे में लाना है।

राजनीतिक संदर्भ और महत्त्व

यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी राष्ट्रीय राजनीति में एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है, जबकि केंद्र सरकार के स्तर पर भी इस पर विचार-विमर्श जारी है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विविध धार्मिक और सांस्कृतिक जनसांख्यिकी को देखते हुए यह कदम विशेष महत्त्व रखता है। आलोचकों का कहना है कि इस कदम की व्यापकता और समयबद्धता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।

आगे की राह

समिति के विधेयक की समीक्षा पूरी करने के बाद इसे पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है। समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें यह तय करेंगी कि राज्य का यूसीसी मॉडल किस दिशा में जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर पश्चिम बंगाल की जनसांख्यिकीय विविधता इसे कहीं अधिक जटिल राजनीतिक परीक्षा बनाती है। जस्टिस रंजना देसाई जैसी प्रतिष्ठित अध्यक्ष की नियुक्ति समिति को संवैधानिक वैधता देती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह समीक्षा प्रक्रिया ठोस विधायी परिणाम देगी या दीर्घकालिक परामर्श में बदल जाएगी। समिति की रिपोर्ट की समयसीमा और सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति — दोनों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल की यूसीसी-2026 समिति क्या है?
यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति है, जो 'समान नागरिक संहिता, पश्चिम बंगाल-2026' के मसौदा विधेयक की समीक्षा कर उसे विधानसभा में पेश किए जाने से पहले अंतिम रूप देगी। इसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।
यूसीसी-2026 मसौदे में किन विषयों को शामिल किया गया है?
मसौदे का उद्देश्य सभी धर्म, आस्था और समुदाय के निवासियों के लिए विवाह, तलाक, निर्वसीयत उत्तराधिकार और वसीयती उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों को एक समान कानूनी ढाँचे में लाना है।
समिति के गठन का संवैधानिक आधार क्या है?
राज्य सरकार ने यह कदम भारतीय संविधान के भाग-4 के अनुच्छेद 44 के अनुरूप उठाया है, जो राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। यह नीति-निर्देशक सिद्धांत राज्य पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन संवैधानिक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
समिति में कौन-कौन से प्रमुख सदस्य शामिल हैं?
समिति में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, गृह विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष, शिक्षाविद् रत्ना भट्टाचार्य और गोपालचंद्र मिश्रा, तथा कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता उस्मान गनी मलिक शामिल हैं।
यूसीसी विधेयक पश्चिम बंगाल विधानसभा में कब पेश होगा?
अभी तक कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है। समिति पहले मसौदे की समीक्षा पूरी करेगी, उसके बाद ही विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा। राज्य मंत्रिमंडल ने 2 जुलाई 2025 को समिति गठन को मंजूरी दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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