पश्चिम बंगाल में यूसीसी-2026 पर 9 सदस्यीय कमेटी गठित, रिटायर्ड जज रंजना देसाई होंगी अध्यक्ष
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 11 जुलाई 2025 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी), पश्चिम बंगाल-2026 के मसौदा विधेयक की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देने के लिए 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इस समिति की अध्यक्षता करेंगी। राज्य के न्यायिक विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
समिति का गठन और पृष्ठभूमि
राज्य मंत्रिमंडल ने 2 जुलाई 2025 को हुई बैठक में इस समिति के गठन को मंजूरी दी थी। अधिसूचना के अनुसार, सरकार का मानना है कि विषय की व्यापकता और जटिलता को देखते हुए मसौदा विधेयक का विस्तृत परीक्षण आवश्यक है। विधानसभा में पेश किए जाने से पहले यह समिति विधेयक की गहन समीक्षा करेगी।
समिति में कौन-कौन शामिल हैं
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली इस समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:
मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, गृह विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष, बंगबासी कॉलेज की सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर रत्ना भट्टाचार्य, गौर बंगा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्रा, कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता उस्मान गनी मलिक और संभाग के पूर्व कार्यकारी निदेशक निर्मल्य भट्टाचार्य।
संवैधानिक आधार और मसौदे का दायरा
राज्य सरकार ने यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 — भाग-4 के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत — के अनुरूप उठाया है, जो राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। अधिसूचना के अनुसार, मसौदा विधेयक का उद्देश्य सभी धर्म, आस्था और समुदाय के निवासियों के लिए विवाह, तलाक, निर्वसीयत उत्तराधिकार और वसीयती उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों को एक समान कानूनी ढाँचे में लाना है।
राजनीतिक संदर्भ और महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी राष्ट्रीय राजनीति में एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है, जबकि केंद्र सरकार के स्तर पर भी इस पर विचार-विमर्श जारी है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विविध धार्मिक और सांस्कृतिक जनसांख्यिकी को देखते हुए यह कदम विशेष महत्त्व रखता है। आलोचकों का कहना है कि इस कदम की व्यापकता और समयबद्धता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
आगे की राह
समिति के विधेयक की समीक्षा पूरी करने के बाद इसे पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है। समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें यह तय करेंगी कि राज्य का यूसीसी मॉडल किस दिशा में जाएगा।