पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज चार विधेयक पेश होंगे, यूसीसी बिल को लेकर अनिश्चितता बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार, 29 जून को चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं — जिनमें पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन विधेयक, ओबीसी आरक्षण संशोधन विधेयक और भ्रष्टाचार व गुंडागर्दी रोकने से जुड़े दो अन्य विधेयक शामिल हैं। हालांकि, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर ही इस पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
विधानसभा की कार्यसूची में क्या है
विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, सोमवार के लिए तैयार आधिकारिक कार्यसूची में केवल चार विधेयकों का उल्लेख है। इनमें पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन और ओबीसी आरक्षण संशोधन के साथ-साथ राज्य में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी की गतिविधियों पर लगाम लगाने से संबंधित दो विधेयक शामिल हैं। यूसीसी विधेयक का कार्यसूची में कोई उल्लेख नहीं है, जिससे इस पर अनिश्चितता और गहरी हो गई है।
यूसीसी को लेकर दो संभावनाएँ
घटनाक्रम से अवगत सूत्रों के अनुसार, यूसीसी को लेकर दो विकल्पों पर विचार चल रहा है — या तो विधेयक सीधे सदन में पेश किया जाए, या फिर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी यूसीसी विधेयक की रूपरेखा तैयार करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की घोषणा करें। सूत्रों का कहना है कि दूसरे विकल्प — यानी समिति गठन — की संभावना अधिक है। इस समिति की अध्यक्षता के लिए सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (सेवानिवृत्त) से संपर्क किए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, विधानसभा सचिवालय या BJP ने इनमें से किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी और BJP की तैयारी
25 जून को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के विधानसभा पहुँचने के बाद ही यूसीसी विधेयक को सदन में पेश किए जाने की चर्चा तेज हो गई थी। उसी दिन विधानसभा सत्र के पहले भाग में अपने भाषण में उन्होंने समान नागरिक संहिता का खुलकर समर्थन किया था, और उसी रात एक पार्टी कार्यक्रम में भी यही बात दोहराई थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद BJP विधायक दल ने यूसीसी विधेयक पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय निर्धारित किया और तय किया कि इस विधेयक के पक्ष में बोलने वाले प्रमुख वक्ता स्वयं मुख्यमंत्री अधिकारी होंगे।
BJP के भीतर भ्रम की स्थिति
गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल की संसदीय दल की टीम की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है कि यूसीसी विधेयक सोमवार को पेश होगा या नहीं। एक तरफ BJP विधायक दल ने तैयारियाँ कर ली हैं, तो दूसरी तरफ आधिकारिक कार्यसूची में इसका जिक्र नहीं है। इससे यह सवाल उठता है कि सरकार इस विधेयक के संबंध में वास्तव में किस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
आगे क्या होगा
यदि समिति गठन का विकल्प चुना जाता है, तो यूसीसी विधेयक की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है, क्योंकि समिति को रूपरेखा तैयार करने में समय लगेगा। वहीं, चार अन्य विधेयकों के सदन में पेश होने और पारित होने की प्रक्रिया सोमवार को ही पूरी होने की उम्मीद है। यूसीसी पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सदन में आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।