पश्चिम बंगाल में यूसीसी विधेयक: भाजपा बोली — तुष्टिकरण की राजनीति का अंत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 28 जून 2026 को कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के आगामी सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने की संभावना राज्य में दशकों से चली आ रही तुष्टिकरण की राजनीति के अंत का संकेत है। नवनिर्वाचित भाजपा सरकार द्वारा अगले सप्ताह यह विधेयक सदन में रखे जाने की उम्मीद है, जो पार्टी के उस चुनावी वादे की पूर्ति होगी जिसमें सत्ता में आने के छह महीने के भीतर यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया गया था।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि पश्चिम बंगाल अब उन भाजपा शासित राज्यों की सूची में शामिल होने जा रहा है जहाँ सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में यूसीसी लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम पहले ही असम और उत्तराखंड में यूसीसी लागू कर चुके हैं। गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी इस दिशा में पहल की गई है, क्योंकि बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।"
यूसीसी का राष्ट्रीय संदर्भ
यदि विधेयक पारित होता है, तो पश्चिम बंगाल यूसीसी अपनाने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यह कानून पारित कर स्वतंत्र भारत का पहला ऐसा राज्य बनने का गौरव हासिल किया था। इसके बाद गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम उठाए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा यूसीसी को अपनी राष्ट्रीय वैचारिक पहचान के केंद्रीय मुद्दे के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
क्रियान्वयन की तैयारी
राज्य सरकार यूसीसी के क्रियान्वयन के लिए एक समिति गठित करने की तैयारी में है। इसे चुनावी वादे को ज़मीन पर उतारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यूसीसी लागू होने पर विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में धर्म-आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढाँचा लागू होगा, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।
विपक्ष पर निशाना
पूनावाला ने यूसीसी का विरोध करने वाले दलों पर भी तीखा प्रहार किया। उनका कहना था कि कुछ समूह महिलाओं के अधिकारों से अधिक वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने शाहबानो और शायरा बानो मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष ऐतिहासिक रूप से ऐसे सुधारात्मक कदमों का विरोध करता आया है। आलोचकों का कहना है कि यूसीसी का विरोध संवैधानिक और सामाजिक बहुलता की रक्षा के आधार पर किया जाता है, न कि केवल राजनीतिक कारणों से।
आगे क्या होगा
पश्चिम बंगाल विधानसभा के आगामी सत्र में विधेयक पेश होने के बाद बहस और संभावित संशोधन की प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और नागरिक समाज की भागीदारी इस विधेयक के भविष्य को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।