पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को यूसीसी विधेयक पेश होगा, चौथा राज्य बनेगा भारत में
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार, 30 जून 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा विधेयक पेश किया जाएगा। इस कदम के साथ पश्चिम बंगाल धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत नागरिक कानून से प्रतिस्थापित करने वाला भारत का चौथा राज्य बन जाएगा — जो धर्म, जाति या जनजाति के भेद के बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
विधानसभा में निर्णय कैसे हुआ
विधानसभा के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विधेयक पेश करने का निर्णय गुरुवार शाम को विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस द्वारा विधानसभा परिसर में बुलाई गई बैठक में लिया गया। बैठक कुछ समय तक चली और उसमें सोमवार को कुल पाँच विधेयक सदन में पेश करने पर सहमति बनी, जिनमें यूसीसी विधेयक सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी तय किया गया कि विधेयकों पर चर्चा के लिए कुल एक घंटे का समय निर्धारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं इस चर्चा में भाग लेंगे। विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी सदन में उपस्थित रहने और बहस में शामिल होने की संभावना है।
यूसीसी अपनाने वाले राज्यों की सूची में पश्चिम बंगाल
यूसीसी को पहले से लागू करने वाले तीन राज्य उत्तराखंड, गुजरात और असम हैं। पश्चिम बंगाल के इस कदम से यह सूची चार राज्यों तक पहुँच जाएगी। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित चुनावी रैलियों में किए गए उस वादे के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत गैर-BJP शासित राज्यों में भी यूसीसी के प्रसार को गति दी जा रही है।
असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण का विधेयक भी सदन में
सोमवार को पेश होने वाले अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों में 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' भी शामिल है। यह विधेयक राज्य में असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
प्रस्तावित विधेयक भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रावधानों से दो प्रमुख बिंदुओं पर अलग है। पहला — यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए, तो उसे एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखा जा सकेगा। दूसरा — राज्य सरकार को BNS के संबंधित प्रावधानों का उपयोग कर ऐसे अपराधों में संलिप्त व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिलेगा।
आगे क्या होगा
सदन में विधेयक पेश होने के बाद इसे समिति के पास भेजे जाने या सीधे मतदान के लिए रखे जाने की संभावना है। यूसीसी विधेयक का विरोध और समर्थन दोनों पक्षों से आने की उम्मीद है, और यह बहस पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा को आने वाले समय में परिभाषित कर सकती है।