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पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को यूसीसी विधेयक पेश होगा, चौथा राज्य बनेगा भारत में

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को यूसीसी विधेयक पेश होगा, चौथा राज्य बनेगा भारत में

सारांश

पश्चिम बंगाल सोमवार को यूसीसी विधेयक पेश कर भारत का चौथा राज्य बनने की राह पर है। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यह कदम BJP के चुनावी वादे की परिणति है — और राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को यूसीसी विधेयक पेश किया जाएगा।
इससे पश्चिम बंगाल यूसीसी अपनाने वाला भारत का चौथा राज्य बन जाएगा — उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद।
विधेयकों पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय निर्धारित; मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं चर्चा में भाग लेंगे।
विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी बहस में शामिल होने की संभावना।
'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' भी सोमवार को पेश होगा, जिसमें एक वर्ष तक निवारक हिरासत और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार, 30 जून 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा विधेयक पेश किया जाएगा। इस कदम के साथ पश्चिम बंगाल धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत नागरिक कानून से प्रतिस्थापित करने वाला भारत का चौथा राज्य बन जाएगा — जो धर्म, जाति या जनजाति के भेद के बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

विधानसभा में निर्णय कैसे हुआ

विधानसभा के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विधेयक पेश करने का निर्णय गुरुवार शाम को विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस द्वारा विधानसभा परिसर में बुलाई गई बैठक में लिया गया। बैठक कुछ समय तक चली और उसमें सोमवार को कुल पाँच विधेयक सदन में पेश करने पर सहमति बनी, जिनमें यूसीसी विधेयक सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी तय किया गया कि विधेयकों पर चर्चा के लिए कुल एक घंटे का समय निर्धारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं इस चर्चा में भाग लेंगे। विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी सदन में उपस्थित रहने और बहस में शामिल होने की संभावना है।

यूसीसी अपनाने वाले राज्यों की सूची में पश्चिम बंगाल

यूसीसी को पहले से लागू करने वाले तीन राज्य उत्तराखंड, गुजरात और असम हैं। पश्चिम बंगाल के इस कदम से यह सूची चार राज्यों तक पहुँच जाएगी। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित चुनावी रैलियों में किए गए उस वादे के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत गैर-BJP शासित राज्यों में भी यूसीसी के प्रसार को गति दी जा रही है।

असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण का विधेयक भी सदन में

सोमवार को पेश होने वाले अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों में 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' भी शामिल है। यह विधेयक राज्य में असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

प्रस्तावित विधेयक भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रावधानों से दो प्रमुख बिंदुओं पर अलग है। पहला — यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए, तो उसे एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखा जा सकेगा। दूसरा — राज्य सरकार को BNS के संबंधित प्रावधानों का उपयोग कर ऐसे अपराधों में संलिप्त व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिलेगा।

आगे क्या होगा

सदन में विधेयक पेश होने के बाद इसे समिति के पास भेजे जाने या सीधे मतदान के लिए रखे जाने की संभावना है। यूसीसी विधेयक का विरोध और समर्थन दोनों पक्षों से आने की उम्मीद है, और यह बहस पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा को आने वाले समय में परिभाषित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए एक साल से अधिक हो चुका है और उसके ज़मीनी क्रियान्वयन का कोई व्यापक मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं हुआ। असामाजिक गतिविधि विधेयक में 'एक वर्ष की निवारक हिरासत' का प्रावधान नागरिक स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से गहन जाँच की माँग करता है। विधेयकों पर केवल एक घंटे की चर्चा का आवंटन इस बात पर सवाल उठाता है कि क्या इतने महत्वपूर्ण कानूनों पर पर्याप्त संसदीय विमर्श हो पाएगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल यूसीसी विधेयक क्या है?
यह समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक है जिसे सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एक एकीकृत नागरिक कानून से बदलना है, जो सभी नागरिकों पर धर्म, जाति या जनजाति की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होगा।
यूसीसी लागू करने वाले अन्य भारतीय राज्य कौन से हैं?
पश्चिम बंगाल से पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम यूसीसी अपना चुके हैं। पश्चिम बंगाल के इस कदम के बाद यह सूची चार राज्यों तक पहुँच जाएगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी विधेयक पर चर्चा कौन करेगा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं चर्चा में भाग लेंगे और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी बहस में शामिल होने की संभावना है। विधेयकों पर चर्चा के लिए कुल एक घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक 2026 में क्या खास है?
'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 से दो मुख्य बिंदुओं पर अलग है — सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माने गए व्यक्ति को एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखा जा सकेगा, और राज्य सरकार को ऐसे अपराधों में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार होगा।
क्या यूसीसी विधेयक पश्चिम बंगाल में BJP के चुनावी वादे का हिस्सा था?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले की गई रैलियों में किए गए उस वादे के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
राष्ट्र प्रेस
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