28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी बिल: मंत्री अर्जुन सिंह बोले- 'सोमवार को लाएंगे विधेयक', चौथा राज्य बनेगा बंगाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी बिल: मंत्री अर्जुन सिंह बोले- 'सोमवार को लाएंगे विधेयक', चौथा राज्य बनेगा बंगाल

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को यूसीसी विधेयक पेश होने जा रहा है — और इसके साथ बंगाल उत्तराखंड, गुजरात व असम के बाद यह कदम उठाने वाला चौथा राज्य बन जाएगा। मंत्रियों ने जनता के स्वागत का भरोसा जताया, जबकि भाजपा ने इसे अपने चुनावी वादे की पूर्ति बताया।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार, 30 जून 2026 को यूसीसी विधेयक पेश किया जाएगा।
मंत्री अर्जुन सिंह ने पटना में पुष्टि की कि 'सोमवार को विधानसभा में बिल लाएंगे।' मंत्री मौमिता बिस्वास मिश्रा ने कहा कि राज्य का हर नागरिक पूरे दिल से इसका स्वागत करेगा।
विधेयक पारित होने पर बंगाल उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी अपनाने वाला चौथा राज्य बनेगा।
भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जनजातियाँ यूसीसी के दायरे से बाहर रहेंगी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार, 30 जून 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने से पहले राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने इस पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। मंत्री मौमिता बिस्वास मिश्रा ने भरोसा जताया कि पश्चिम बंगाल का हर आम नागरिक इस विधेयक का पूरे दिल से स्वागत करेगा। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो पश्चिम बंगाल उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी अपनाने वाला चौथा भारतीय राज्य बन जाएगा।

मंत्रियों ने क्या कहा

राज्य सरकार में मंत्री अर्जुन सिंह ने पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा, 'पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू होने जा रहा है। हम सोमवार को विधानसभा में बिल लाएंगे।' उनके इस बयान ने विधेयक की तैयारियों की पुष्टि की।

मंत्री दिलीप घोष ने कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'यूसीसी बिल के लिए नोटिस है। यूसीसी बहुत से राज्यों में लागू हुआ और यहाँ भी प्रक्रिया शुरू हुई है।' मंत्री मौमिता बिस्वास मिश्रा ने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि पश्चिम बंगाल का हर आम नागरिक पूरे दिल से इसका स्वागत करेगा।'

भाजपा का रुख और चुनावी वादा

पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने शनिवार को अपने बयान में स्पष्ट किया कि यूसीसी पर पार्टी का रुख लंबे समय से सार्वजनिक रहा है। उन्होंने कहा कि यह हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के चुनावी घोषणापत्र और राजनीतिक वादे का हिस्सा था।

भट्टाचार्य ने कहा, 'भाजपा का मानना है कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता ज़रूरी है क्योंकि कानून के तहत सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कर्तव्य सुनिश्चित किए जाने चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में धर्म-आधारित अलग-अलग पर्सनल लॉ के बजाय एक समान नागरिक ढाँचा देश की एकता, न्याय और संवैधानिक समानता के आदर्शों को मज़बूत कर सकता है।

अनुसूचित जनजातियाँ यूसीसी के दायरे से बाहर

भट्टाचार्य ने आम लोगों के मन में इस विधेयक को लेकर मौजूद शंकाओं को भी दूर करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में अनुसूचित जनजातियाँ इस यूसीसी विधेयक के दायरे में नहीं आएंगी — एक प्रावधान जो उत्तराखंड के यूसीसी कानून में भी शामिल था।

ऐतिहासिक संदर्भ: तीन राज्य पहले ही आगे

गौरतलब है कि उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना था, उसके बाद गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम उठाए। पश्चिम बंगाल में यूसीसी की यह पहल ऐसे समय में आई है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार अपनी विधायी प्राथमिकताएँ तय कर रही है।

आगे क्या होगा

विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने के बाद इस पर बहस और मतदान की प्रक्रिया होगी। विधेयक के पारित होने की स्थिति में राज्यपाल की मंज़ूरी आवश्यक होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस विधेयक पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और अल्पसंख्यक समुदायों का रुख भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा की नई सरकार की वैचारिक प्राथमिकताओं का पहला बड़ा संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता हमेशा से अधिक रही है। अनुसूचित जनजातियों को छूट देने का प्रावधान उत्तराखंड मॉडल की नकल है, लेकिन असली सवाल यह है कि अल्पसंख्यक समुदायों की आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार क्या ठोस संवाद तंत्र अपनाती है। मंत्रियों का 'जनता दिल से स्वागत करेगी' वाला भरोसा अभी तक केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है — विधेयक पर विधानसभा में होने वाली बहस ही असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में यूसीसी विधेयक क्या है और यह कब पेश होगा?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सोमवार, 30 जून 2026 को पेश किया जाएगा। यह विधेयक शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में धर्म-आधारित अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान कानूनी ढाँचा लागू करने का प्रस्ताव करता है।
यूसीसी लागू करने वाला पश्चिम बंगाल कौन-सा राज्य होगा?
विधेयक पारित होने की स्थिति में पश्चिम बंगाल यूसीसी अपनाने वाला चौथा भारतीय राज्य बन जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम यह कदम उठा चुके हैं।
क्या अनुसूचित जनजातियाँ पश्चिम बंगाल के यूसीसी के दायरे में आएंगी?
नहीं। भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में अनुसूचित जनजातियाँ इस यूसीसी विधेयक के दायरे में नहीं आएंगी। यह प्रावधान उत्तराखंड के यूसीसी कानून के समान है।
भाजपा ने यूसीसी को पश्चिम बंगाल चुनाव से कैसे जोड़ा था?
भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य के अनुसार, यूसीसी हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के चुनावी घोषणापत्र और राजनीतिक वादे का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इसे कभी छिपाया या दबाया नहीं गया था।
पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू होने से आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानून लागू होगा, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। अनुसूचित जनजातियाँ इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 15 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले