पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू होकर रहेगा — भाजपा नेता राहुल सिन्हा का ममता पर तीखा प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 28 जून 2026 को अपना आक्रामक रुख और तेज़ कर दिया। भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी अब राजनीतिक रूप से अकेली पड़ चुकी हैं और पश्चिम बंगाल यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बनेगा।
मुख्य घटनाक्रम
राहुल सिन्हा ने कहा, 'ममता बनर्जी अकेली हैं; वह क्या कर सकती हैं? ममता और अभिषेक बनर्जी दोनों विधानसभा में नहीं हैं। अभी विधानसभा में जो लोग हैं, सभी ममता विरोधी हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से उन्हें निकाला गया।' उन्होंने आगे कहा, 'मैं सीधा बोल रहा हूँ कि बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होकर रहेगा। भारत में अभी तीन प्रदेशों में यूसीसी लागू हो चुका है; पश्चिम बंगाल चौथे नंबर पर होगा। देश एक, जनता एक, तो कानून भी एक होना चाहिए।'
ममता बनर्जी पर सीधा हमला
सिन्हा ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि 'जिसके पास संख्या नहीं है, उसके शिकायत दर्ज करने से क्या होगा। उनके पास न विधायक हैं और न सांसद। TMC के सभी लोग भाग गए। वे चुनाव हार गईं, लेकिन फिर भी बोलती हैं कि वह मुख्यमंत्री हैं। राज्यपाल ने उन्हें हटा दिया। अगर ममता बनर्जी को आत्मसम्मान प्यारा है, तो उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल की राजनीतिक स्थिति में बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं।
भाजपा विधायक और प्रवक्ता की दलीलें
भाजपा विधायक सर्बरी मुखर्जी ने यूसीसी की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, 'बंगाल में यूसीसी बहुत ज़रूरी है। सीमावर्ती इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफी चेंज) हो रहा है, जिससे पूरा देश चिंतित है। जैसे तीन तलाक का कानून मुसलमानों के लिए भी अच्छा साबित हुआ, यूसीसी से भी वही फायदा होगा। भाजपा और पश्चिम बंगाल सरकार समानता के लिए लड़ रही हैं।' भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, 'ममता ने यूसीसी लागू न करने की बात कही थी, लेकिन अब वह सरकार में नहीं हैं, इसलिए यह लागू होगा। हमारी सरकार इसे लागू करने वाली है और इस पर चर्चा शुरू होने वाली है।'
आम जनता और राजनीतिक असर
गौरतलब है कि यूसीसी का मुद्दा भाजपा के लिए दीर्घकालिक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहा है। उत्तराखंड सहित तीन राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है। पश्चिम बंगाल जैसे बहुसांस्कृतिक और अल्पसंख्यक-बहुल जनसंख्या वाले राज्य में इसे लागू करना राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से जटिल माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि इस कदम से राज्य में सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
क्या होगा आगे
भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, यूसीसी पर विधानसभा में चर्चा जल्द शुरू होने की उम्मीद है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में सत्ता-संघर्ष के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। ममता बनर्जी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।