अजान के लिए लाउडस्पीकर हटाना गलत, निर्धारित डेसिबल में इजाजत मिले: इमाम अथुर कासमी
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता की आजाद रोड स्थित मस्जिद-ए-कुबा के इमाम अथुर कासमी ने 13 अगस्त को स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर या माइक के उपयोग को लेकर जो कानूनी प्रावधान हैं, उनका पूरी तरह पालन होना चाहिए — लेकिन कानून में तय डेसिबल सीमा के भीतर अजान देने की अनुमति बनाए रखी जानी चाहिए। यह बयान पश्चिम बंगाल की मस्जिदों से माइक हटाए जाने के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका (PIL) और उससे जुड़ी अदालती कार्यवाही के बीच आया है।
इमाम का रुख: कानून का पालन, अधिकार का संरक्षण
इमाम अथुर कासमी ने कहा कि वे किसी ऐसी माँग के पक्ष में नहीं हैं जो कानून के विरुद्ध हो। उनके अनुसार, भारतीय कानून में यह कहीं नहीं लिखा कि अजान के लिए उपयोग होने वाला माइक पूरी तरह उतार दिया जाए। नियम केवल ध्वनि की डेसिबल सीमा के भीतर रहने की बात करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे हिंदुस्तान का जो कानून है, उसी के मुताबिक काम होना चाहिए। यदि कानून निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर अजान की अनुमति देता है, तो संबंधित मस्जिदों को उसी सीमा में रहकर नियमों का पालन करना चाहिए।
अदालती प्रक्रिया पर भरोसा
अदालत की ओर से अभी तक कोई अंतरिम आदेश जारी न होने के सवाल पर इमाम कासमी ने कहा कि इससे वे निराश नहीं हैं। उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि आगे की सुनवाई में कानून के अनुसार उचित निर्णय आएगा। उन्होंने बताया कि मंगलवार को अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित हुई है।
इमाम ने यह भी कहा कि सभी इमामों को कानून पर पूरा विश्वास है और जो भी फैसला होगा, वह कानून के अनुसार और न्यायसंगत होगा।
पुलिस की बैठक और माइक हटाने का दावा
राज्य सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि पुलिस ने मस्जिदों से माइक हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की। हालाँकि, इमाम अथुर कासमी ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें स्वयं फोन आया था और उनके इलाके रिसड़ा के कई इमाम पुलिस की बैठक में शामिल हुए थे।
उन्होंने बताया कि वे किसी मजबूरी के कारण उस बैठक में नहीं जा सके, लेकिन बाद में अन्य इमामों से जानकारी लेने पर पता चला कि बैठक में मस्जिदों से माइक हटाने के लिए कहा गया था। उनके अनुसार, इलाके की एक मस्जिद से माइक हटाया भी जा चुका है।
पुलिस की कथित चेतावनी
इमाम कासमी ने दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने मस्जिद प्रतिनिधियों से कहा कि माइक हटा लिया जाए, क्योंकि उसके लिए अनुमति नहीं है। कथित तौर पर पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि यदि मस्जिद प्रबंधन स्वयं माइक नहीं हटाता, तो पुलिस आकर उसे हटा देगी। यह बैठक, उनके अनुसार, करीब एक सप्ताह से दस दिन पहले हुई थी और उसमें इलाके के कई लोग व इमाम शामिल थे।
आगे क्या
यह मामला अब अदालत में है और अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित है। इमाम कासमी का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रिया में पूरी तरह शामिल हैं और उन्हें उम्मीद है कि न्यायालय का फैसला कानून के दायरे में सभी पक्षों के लिए न्यायसंगत होगा। पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों पर ध्वनि-प्रदूषण नियमों के क्रियान्वयन को लेकर यह विवाद राज्य में एक संवेदनशील सामाजिक-कानूनी प्रश्न बन चुका है।