पश्चिम बंगाल में मस्जिद लाउडस्पीकर विवाद: इमाम बोले- पुलिस बना रही दबाव, BJP विधायक ने कहा- कानून सर्वोपरि
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा तेज़ी से राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। कोलकाता की ऐतिहासिक नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीकुल वजमी ने 6 अगस्त को आरोप लगाया कि राज्य पुलिस मस्जिद प्रबंधन समितियों पर लाउडस्पीकर हटाने का अनुचित दबाव बना रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सौरव सिकदर ने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी समुदाय को नियमों से छूट नहीं मिल सकती।
इमाम का आरोप: मौखिक धमकी, लिखित नोटिस नहीं
मौलाना शफीकुल वजमी ने कहा कि राज्य के विभिन्न इलाकों में पुलिस इमामों और मस्जिद कमेटी के ज़िम्मेदारों को थाने बुलाकर लाउडस्पीकर हटाने के लिए दबाव बना रही है। उनके अनुसार, यदि कोई सरकारी आदेश जारी हुआ है, तो संबंधित अधिकारियों को लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'केवल मौखिक रूप से बुलाकर धमकाना न तो कानूनी है और न ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप।'
ध्वनि सीमा और कानूनी ढाँचा
मौलाना ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के मौजूदा कानूनी ढाँचे का हवाला देते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षेत्रवार ध्वनि सीमाएँ निर्धारित की हैं — औद्योगिक क्षेत्रों में 75 से 80 डेसीबल, व्यावसायिक क्षेत्रों में 70 से 75 डेसीबल, आवासीय क्षेत्रों में 65 से 70 डेसीबल और साइलेंस ज़ोन में 45 से 50 डेसीबल। उन्होंने दावा किया कि राज्य की मस्जिदों में अजान सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के दायरे में ही दी जा रही है। यदि कोई मस्जिद तय सीमा से अधिक ध्वनि का उपयोग कर रही है, तो उसे नोटिस देकर सुधार का अवसर मिलना चाहिए, न कि सीधे लाउडस्पीकर हटाने या तोड़ने की धमकी।
मुख्यमंत्री और डीजीपी से हस्तक्षेप की अपील
मौलाना वजमी ने मुख्यमंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की माँग करते हुए कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी समुदाय को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से भी मामले की जाँच कर उचित कार्रवाई करने की माँग की। यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब देश के कई राज्यों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर न्यायिक और प्रशासनिक विमर्श जारी है।
BJP का पक्ष: कानून से ऊपर कोई नहीं
BJP विधायक सौरव सिकदर ने इस विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में किसी धर्म का नहीं, बल्कि कानून का शासन चलता है। उन्होंने कहा कि चाहे किसी भी धर्म या समुदाय का व्यक्ति हो, सभी को नियमों का पालन करना होगा। सिकदर ने यह भी कहा कि यदि किसी को प्रशासनिक कार्रवाई पर आपत्ति है, तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकता है। उनके अनुसार, किसी धर्मगुरु के विरोध से कानून नहीं बदलता।
आगे क्या होगा
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामला अदालत तक पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर यदि मस्जिद कमेटियाँ पुलिस की कार्रवाई को लिखित में चुनौती देती हैं। यह विवाद पश्चिम बंगाल की बहुसांस्कृतिक राजनीति में एक नई परत जोड़ता है, जहाँ धर्म, कानून और सत्ता के बीच की रेखा अक्सर बहस का केंद्र बनती है।