18 अगस्त 2026
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के खिलाफ याचिका खारिज की, 5,299 स्पीकर हटाए गए

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के खिलाफ याचिका खारिज की, 5,299 स्पीकर हटाए गए

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के खिलाफ याचिका खारिज कर दी — कोर्ट ने कहा, मौखिक पुलिस आदेश के आधार पर हस्तक्षेप नहीं होगा। राज्य सरकार के मुताबिक यह अभियान 2020 के न्यायिक आदेश के तहत चला और कुल 5,299 लाउडस्पीकर हटाए गए।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 18 अगस्त को मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज की।
बेंच ने कहा — याचिका केवल मीडिया रिपोर्टों पर आधारित थी और प्रभावित 4,000 मस्जिदें मामले में पक्षकार नहीं थीं।
राज्यव्यापी अभियान में कुल 5,299 लाउडस्पीकर हटाए गए — 4,203 मस्जिदों से और 1,096 मंदिरों से ।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा — यह अभियान कलकत्ता हाई कोर्ट के 2020 के फैसले के अनुपालन में चलाया गया।
याचिका में TMC के चार बार विधायक रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पक्षकार का प्रतिनिधित्व किया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 18 अगस्त को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल पुलिस के उस कथित मौखिक आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत राज्य की मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाए जा रहे थे। बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी मौखिक पुलिस निर्देश के आधार पर कोई न्यायिक आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस अतारूप बनर्जी की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर दायर की गई थी। बेंच ने यह भी रेखांकित किया कि जिन कथित 4,000 मस्जिदों पर यह मौखिक आदेश लागू होना था, वे इस मामले में पक्षकार नहीं थीं और उनका पक्ष नहीं सुना गया था — इसलिए याचिका में कोई कानूनी आधार नहीं बनता।

यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार बार विधायक रहे कल्याण बनर्जी द्वारा प्रतिनिधित्व किए जा रहे एक व्यक्ति ने दायर की थी। आरोप था कि पुलिस बिना किसी कानूनी नोटिस के धार्मिक स्थलों, विशेषकर मस्जिदों से जबरदस्ती ध्वनि उपकरण हटा रही थी।

सरकार का पक्ष: चुनिंदा नहीं, सर्वव्यापी अभियान

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया कि यह अभियान केवल मस्जिदों को निशाना बनाकर चलाया गया। उन्होंने आँकड़े देते हुए बताया कि राज्यव्यापी पुलिस अभियान में विभिन्न धार्मिक स्थलों से कुल 5,299 लाउडस्पीकर हटाए गए — जिनमें 4,203 मस्जिदों से और 1,096 मंदिरों से हटाए गए।

अधिकारी ने स्पष्ट किया, 'अगर किसी धार्मिक स्थल के परिसर में शोर तय सीमा के भीतर रहता है तो कोई समस्या नहीं है। राज्य सरकार ने कोई नया नियम लागू नहीं किया है और वह कानून के अनुसार पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान दिए गए कलकत्ता हाई कोर्ट के 2020 के फैसले को लागू कर रही थी।'

कानूनी पृष्ठभूमि: 2020 का हाई कोर्ट फैसला

गौरतलब है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2020 में शोर-प्रदूषण से जुड़े एक मामले में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनमें सार्वजनिक स्थलों पर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक शोर करने पर रोक लगाई गई थी। राज्य सरकार का कहना है कि वर्तमान अभियान उसी न्यायिक आदेश के अनुपालन में चलाया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हुई है।

आम जनता और धार्मिक समुदायों पर असर

इस अभियान का सीधा असर राज्य के हजारों धार्मिक स्थलों पर पड़ा है। मस्जिदों से 4,203 और मंदिरों से 1,096 लाउडस्पीकर हटाए जाने के बाद दोनों समुदायों में प्रतिक्रियाएँ आई हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कोई भी पक्ष न्यायिक हस्तक्षेप के लिए ठोस कानूनी आधार तैयार किए बिना याचिका दायर नहीं कर सकता।

आगे देखें तो यह मामला राज्य में ध्वनि-प्रदूषण कानूनों के क्रियान्वयन और धार्मिक स्वतंत्रता की सीमाओं पर एक व्यापक विमर्श की नींव रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो प्रभावित धार्मिक संस्थाओं को पहले से लिखित नोटिस क्यों नहीं दिया गया। आँकड़ों में मस्जिद-मंदिर का अनुपात स्वाभाविक रूप से सवाल उठाता है — हालाँकि सरकार इसे जनसंख्या-अनुपात से जोड़ती है। पारदर्शी क्रियान्वयन और लिखित प्रक्रिया के बिना, यह अभियान — चाहे कानूनी रूप से सही हो — सांप्रदायिक संदेह का ईंधन बनता रहेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने लाउडस्पीकर याचिका क्यों खारिज की?
कोर्ट ने याचिका इसलिए खारिज की क्योंकि वह केवल मीडिया रिपोर्टों पर आधारित थी और जिन 4,000 मस्जिदों पर आदेश लागू होना था, वे मामले में पक्षकार नहीं थीं। बेंच ने स्पष्ट किया कि मौखिक पुलिस निर्देश के आधार पर कोई न्यायिक आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
पश्चिम बंगाल में लाउडस्पीकर हटाने का अभियान क्या था?
पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक विशेष अभियान के तहत राज्य के विभिन्न धार्मिक स्थलों से कुल 5,299 लाउडस्पीकर हटाए — जिनमें 4,203 मस्जिदों से और 1,096 मंदिरों से थे। सरकार का कहना है कि यह कलकत्ता हाई कोर्ट के 2020 के शोर-प्रदूषण संबंधी फैसले के अनुपालन में किया गया।
2020 का कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला क्या था जिसका हवाला दिया गया?
2020 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने शोर-प्रदूषण मामले में निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक शोर पर रोक लगाने के दिशानिर्देश जारी किए थे। राज्य सरकार का तर्क है कि वर्तमान लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई उसी आदेश को लागू करने का हिस्सा है।
इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से कौन पेश हुए?
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने किया, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस बिना कानूनी नोटिस के धार्मिक स्थलों से ध्वनि उपकरण हटा रही थी।
क्या यह अभियान केवल मस्जिदों को निशाना बनाकर चलाया गया?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस आरोप को खारिज किया। उन्होंने बताया कि अभियान में मस्जिदों के साथ-साथ मंदिरों से भी लाउडस्पीकर हटाए गए — कुल 5,299 में से 1,096 मंदिरों से थे। सरकार के अनुसार यह सर्वधर्म समभाव के आधार पर चलाया गया अभियान था।
राष्ट्र प्रेस
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