कलकत्ता हाई कोर्ट ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के खिलाफ याचिका खारिज की, 5,299 स्पीकर हटाए गए
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 18 अगस्त को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल पुलिस के उस कथित मौखिक आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत राज्य की मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाए जा रहे थे। बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी मौखिक पुलिस निर्देश के आधार पर कोई न्यायिक आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस अतारूप बनर्जी की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर दायर की गई थी। बेंच ने यह भी रेखांकित किया कि जिन कथित 4,000 मस्जिदों पर यह मौखिक आदेश लागू होना था, वे इस मामले में पक्षकार नहीं थीं और उनका पक्ष नहीं सुना गया था — इसलिए याचिका में कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार बार विधायक रहे कल्याण बनर्जी द्वारा प्रतिनिधित्व किए जा रहे एक व्यक्ति ने दायर की थी। आरोप था कि पुलिस बिना किसी कानूनी नोटिस के धार्मिक स्थलों, विशेषकर मस्जिदों से जबरदस्ती ध्वनि उपकरण हटा रही थी।
सरकार का पक्ष: चुनिंदा नहीं, सर्वव्यापी अभियान
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया कि यह अभियान केवल मस्जिदों को निशाना बनाकर चलाया गया। उन्होंने आँकड़े देते हुए बताया कि राज्यव्यापी पुलिस अभियान में विभिन्न धार्मिक स्थलों से कुल 5,299 लाउडस्पीकर हटाए गए — जिनमें 4,203 मस्जिदों से और 1,096 मंदिरों से हटाए गए।
अधिकारी ने स्पष्ट किया, 'अगर किसी धार्मिक स्थल के परिसर में शोर तय सीमा के भीतर रहता है तो कोई समस्या नहीं है। राज्य सरकार ने कोई नया नियम लागू नहीं किया है और वह कानून के अनुसार पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान दिए गए कलकत्ता हाई कोर्ट के 2020 के फैसले को लागू कर रही थी।'
कानूनी पृष्ठभूमि: 2020 का हाई कोर्ट फैसला
गौरतलब है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2020 में शोर-प्रदूषण से जुड़े एक मामले में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनमें सार्वजनिक स्थलों पर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक शोर करने पर रोक लगाई गई थी। राज्य सरकार का कहना है कि वर्तमान अभियान उसी न्यायिक आदेश के अनुपालन में चलाया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हुई है।
आम जनता और धार्मिक समुदायों पर असर
इस अभियान का सीधा असर राज्य के हजारों धार्मिक स्थलों पर पड़ा है। मस्जिदों से 4,203 और मंदिरों से 1,096 लाउडस्पीकर हटाए जाने के बाद दोनों समुदायों में प्रतिक्रियाएँ आई हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कोई भी पक्ष न्यायिक हस्तक्षेप के लिए ठोस कानूनी आधार तैयार किए बिना याचिका दायर नहीं कर सकता।
आगे देखें तो यह मामला राज्य में ध्वनि-प्रदूषण कानूनों के क्रियान्वयन और धार्मिक स्वतंत्रता की सीमाओं पर एक व्यापक विमर्श की नींव रख सकता है।