कोलकाता एयरपोर्ट पर मस्जिद विवाद: दिलीप घोष बोले — गैरकानूनी निर्माण तो हटाना ही होगा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 29 मई 2026 को उत्तर 24 परगना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कोलकाता हवाई अड्डे पर मस्जिद निर्माण के मुद्दे पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि यह निर्माण गैरकानूनी तरीके से हुआ है, तो इसे हटाना अनिवार्य होगा। घोष ने यह भी पूछा कि आखिर किन लोगों ने इस निर्माण को होने दिया।
मस्जिद विवाद पर दिलीप घोष का रुख
घोष ने कहा कि बंगाल में अनेक स्थानों पर धर्मस्थल बनाए गए हैं, परंतु अपने आराध्य को सम्मान के साथ स्थापित करना चाहिए, न कि भूमि पर अवैध कब्जे के उद्देश्य से। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'जिन लोगों ने गैरकानूनी तरीके से दुकान और घर बनाए हैं, वे स्वयं हटा लें।' उनके अनुसार, एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील सरकारी क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण की जाँच होनी चाहिए।
टीएमसी और ममता बनर्जी पर निशाना
घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी में आंतरिक कलह अब शीर्ष तक पहुँच चुकी है। काकोली घोष दस्तीदार द्वारा कल्याण बनर्जी के विरुद्ध स्पीकर से की गई शिकायत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 'यह बीमारी धीरे-धीरे पूरी TMC को खत्म कर देगी।' उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके निकट के लोगों ने केंद्र सरकार की जनकल्याण योजनाओं का धन लूटा, जो वास्तव में गरीब जनता का था।
सिद्धारमैया के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के सवाल पर घोष ने कहा कि कांग्रेस की यह पुरानी परंपरा रही है — 'कोई मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता।' उन्होंने इसे कांग्रेस का अंदरूनी मामला बताते हुए कहा कि जनता को न्याय और विकास का लाभ मिलना प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस्कॉन और धार्मिक नीति
बकरीद के दिन मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस्कॉन मंदिर जाने के सवाल पर घोष ने कहा कि उनका इस्कॉन से वर्षों पुराना नाता है और वे स्वयं पिछले 10-12 वर्षों से वहाँ जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का इस्कॉन जाना यह स्पष्ट करता है कि सरकार किस दिशा में चलेगी। उन्होंने सीपीएम और TMC दोनों पर साधु-संतों और धार्मिक स्थलों का अपमान करने का आरोप लगाया।
घुसपैठियों पर कड़ा रुख
घोष ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर कहा कि जो भारत के नागरिक नहीं हैं, उन्हें वापस जाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वे स्वयं नहीं गए तो उन्हें 'बुरे दिन' देखने पड़ेंगे। उनके अनुसार, घुसपैठियों की वापसी के बिना देश को राहत नहीं मिलेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।