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कोलकाता एयरपोर्ट बांकरा मस्जिद विवाद: भाजपा ने सुरक्षा का हवाला दिया, TMC-CPM ने धार्मिक अधिकारों की दुहाई दी

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कोलकाता एयरपोर्ट बांकरा मस्जिद विवाद: भाजपा ने सुरक्षा का हवाला दिया, TMC-CPM ने धार्मिक अधिकारों की दुहाई दी

सारांश

कोलकाता एयरपोर्ट के पास 136 साल पुरानी बांकरा मस्जिद में नमाज पर रोक सुरक्षा बनाम धार्मिक अधिकार की बहस बन गई है। भाजपा रनवे विस्तार और राष्ट्रीय सुरक्षा की दलील दे रही है, जबकि TMC और CPM इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़ रहे हैं।

मुख्य बातें

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित बांकरा मस्जिद में सामूहिक नमाज के लिए एंट्री पास बंद किए गए।
मस्जिद मुख्य रनवे से मात्र 165 मीटर की दूरी पर है और लगभग 136 वर्ष पुरानी है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार सहित कई भाजपा नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस कदम का समर्थन किया।
TMC सांसद सौगत रॉय और CPI(M) नेता हन्नान मोल्लाह ने इसे अल्पसंख्यक धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
केंद्र सरकार, राज्य सरकार और AAI ने मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फैसला किया है, हालाँकि समयसीमा अभी तय नहीं।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित बांकरा मस्जिद में सामूहिक नमाज के लिए प्रवेश पास बंद किए जाने का मामला 13 जुलाई 2026 को गहरे राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया, जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस कदम का खुलकर समर्थन किया और विपक्षी तृणमूल कांग्रेस (TMC) तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने इसे अल्पसंख्यक धार्मिक अधिकारों पर हमला करार दिया। अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद मुख्य रनवे से मात्र 165 मीटर की दूरी पर है और एयरपोर्ट विस्तार में बाधा बन रही है।

विवाद की पृष्ठभूमि

लगभग 136 वर्ष पुरानी यह मस्जिद दशकों से हवाई अड्डे के परिसर के समीप स्थित है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने हाल ही में सामूहिक नमाज के लिए जारी किए जाने वाले एंट्री पास बंद कर दिए, जिसका कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बताई गईं। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय अचानक नहीं, बल्कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उठाया गया कदम है।

भाजपा नेताओं का रुख

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस कदम को उचित ठहराते हुए कहा, 'हमने किसी को भी अपने धर्म का पालन करने से नहीं रोका है। बकरीद पशु वध कानूनों का पालन करते हुए मनाई गई, मुहर्रम बिना हथियार लहराए मनाया गया और कोई समस्या नहीं हुई। कानून का पालन करें और अच्छे नागरिक की तरह व्यवहार करें।'

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'यह मामला काफी समय से लंबित है। जब मैं कॉलेज में पढ़ता था और लेफ्ट फ्रंट की सरकार थी, तब मैंने अखबार में पढ़ा था कि एक मस्जिद की वजह से एयरपोर्ट पर लैंडिंग एरिया को नए रनवे के लिए बढ़ाया नहीं जा सकता।'

भाजपा नेता रिजु दत्ता ने तर्क दिया, 'कोलकाता एयरपोर्ट बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के पास स्थित है। देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य वीआईपी इसी एयरपोर्ट से यात्रा करते हैं। इसीलिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का फैसला किया है।'

विपक्ष की प्रतिक्रिया

TMC सांसद सौगत रॉय ने इस फैसले को राजनीति-प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, 'पाँच दशकों तक कोई समस्या नहीं थी। स्थानीय लोग नहीं चाहते कि मस्जिद को हटाया जाए। अगर स्थानीय मुस्लिम समुदाय सहमत हो, तो मस्जिद के बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है — इसे जबरदस्ती नहीं किया जाना चाहिए। यह मुद्दा भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही उठा है।'

CPI(M) नेता हन्नान मोल्लाह ने भी ऐसी ही राय व्यक्त करते हुए कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान धार्मिक स्थलों तक लोगों की पहुँच बाधित किए बिना किया जाना चाहिए।

आम जनता और समुदाय पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अल्पसंख्यक समुदायों में नीतिगत बदलावों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ी है। मस्जिद की 136 वर्ष की ऐतिहासिक उपस्थिति इस मामले को केवल सुरक्षा के दायरे से बाहर निकालकर सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के सवाल से जोड़ती है। स्थानीय मुस्लिम समुदाय के नुमाइंदों ने कथित तौर पर मस्जिद को जबरन हटाए जाने का विरोध किया है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की बात कही है, हालाँकि स्थानांतरण की समयसीमा और वैकल्पिक स्थल अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। यह मामला न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठता है कि दशकों से लंबित यह मामला ठीक अभी क्यों तेज हुआ। समुदाय की सहमति के बिना स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना संवैधानिक अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि AAI के पास रनवे विस्तार की वास्तविक तकनीकी बाधा का कोई सार्वजनिक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है — जिसके बिना 'सुरक्षा बनाम धर्म' की यह बहस एकतरफा ही रहेगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता एयरपोर्ट बांकरा मस्जिद विवाद क्या है?
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित 136 वर्ष पुरानी बांकरा मस्जिद में सामूहिक नमाज के लिए एंट्री पास बंद कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने सुरक्षा और रनवे विस्तार को कारण बताया है, जिससे भाजपा और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
मस्जिद में नमाज पर रोक क्यों लगाई गई?
अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद मुख्य रनवे से केवल 165 मीटर की दूरी पर है, जिससे रनवे विस्तार और आपातकालीन परिचालन में बाधा आती है। भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि यह एयरपोर्ट बांग्लादेश और चीन सीमाओं के निकट होने से रणनीतिक रूप से संवेदनशील है।
TMC और CPM ने इस फैसले पर क्या कहा?
TMC सांसद सौगत रॉय ने इसे भाजपा का राजनीतिक एजेंडा बताया और कहा कि पाँच दशकों तक कोई समस्या नहीं थी। CPI(M) नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि सुरक्षा चिंताओं का समाधान धार्मिक पहुँच बाधित किए बिना होना चाहिए।
क्या मस्जिद को हटाया जाएगा और कब तक?
केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का फैसला किया है। हालाँकि, स्थानांतरण की समयसीमा और वैकल्पिक स्थल अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
स्थानीय मुस्लिम समुदाय का इस पर क्या रुख है?
TMC सांसद सौगत रॉय के अनुसार, स्थानीय लोग नहीं चाहते कि मस्जिद को हटाया जाए। उन्होंने कहा कि समुदाय की सहमति के बिना कोई भी फैसला जबरदस्ती होगा और यही कारण है कि पिछले 50 वर्षों में मस्जिद को नहीं हटाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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