11 जुलाई 2026
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कोलकाता एयरपोर्ट के पास 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद स्थानांतरण विवाद, जमीयत उलेमा अध्यक्ष बोले- बातचीत से निकलेगा हल

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कोलकाता एयरपोर्ट के पास 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद स्थानांतरण विवाद, जमीयत उलेमा अध्यक्ष बोले- बातचीत से निकलेगा हल

सारांश

कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे से महज 165 मीटर दूर खड़ी 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद अब विमानन सुरक्षा और धार्मिक विरासत के टकराव का केंद्र बन गई है। जमीयत उलेमा अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी का कहना है कि समाधान केवल मान्यता प्राप्त संगठनों की सहमति से निकलेगा — प्रशासन के साथ बैठकें जारी हैं।

मुख्य बातें

कोलकाता एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे से 165 मीटर की दूरी पर स्थित 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद (गौरीपुर जामे मस्जिद) को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है।
ICAO के नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए; मस्जिद के कारण टचडाउन पॉइंट 88 मीटर पीछे खिसकाना पड़ा है।
राज्य जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने स्पष्ट किया कि मुसलमान स्वयं मस्जिद नहीं तोड़ेंगे; समाधान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड , जमीयत और दारूल उलूम देवबंद की सहमति से निकलेगा।
1962 में एयरपोर्ट विस्तार के समय बांकड़ा गाँव के निवासियों को विस्थापित किया गया था, लेकिन मस्जिद को उसी स्थान पर रहने दिया गया था।
बीते बुधवार को DM, ADM, एयरपोर्ट अथॉरिटी, CISF और CP की संयुक्त बैठक हुई; अब तक तीन-चार बैठकें हो चुकी हैं।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के सेकेंडरी रनवे से मात्र 165 मीटर की दूरी पर स्थित 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद (गौरीपुर जामे मस्जिद) को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और राज्य जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई भी निर्णय मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

मस्जिद और एयरपोर्ट विवाद की पृष्ठभूमि

यह मस्जिद अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के उन नियमों के दायरे में आती है, जिनके अनुसार किसी सक्रिय रनवे के 240 मीटर के भीतर कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए। मस्जिद की उपस्थिति के कारण रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे खिसकाना पड़ा है, जिससे बड़े विमानों के परिचालन और आधुनिक लैंडिंग प्रणाली स्थापित करने में बाधा आ रही है। गौरतलब है कि 1962 में एयरपोर्ट विस्तार के दौरान बांकड़ा गाँव के निवासियों को विस्थापित किया गया था, परंतु तत्कालीन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मस्जिद को उसी स्थान पर रहने दिया और नमाज़ की अनुमति भी प्रदान की थी।

सिद्दीकुल्लाह चौधरी का पक्ष

सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, "यह 136 साल पुरानी मस्जिद है। 1962 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बांकड़ा गाँव के लोगों से कहा था कि वे दूसरे स्थान पर चले जाएँ, लेकिन मस्जिद वहीं रहेगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई थी और तब से वहाँ नमाज़ पढ़ी जा रही है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, "मुसलमान अपने हाथों से मस्जिद न तो तोड़ेंगे और न ही उसे किसी को सौंपेंगे। समाधान के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और दारूल उलूम देवबंद जैसे मान्यता प्राप्त संगठन इस पर राय दें — यदि कोई समाधान निकलेगा तो उन्हीं के माध्यम से निकलेगा।"

बैठकों का दौर और प्रशासनिक स्थिति

चौधरी के अनुसार अब तक एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ तीन-चार बैठकें हो चुकी हैं। बीते बुधवार को जिलाधिकारी (DM), अपर जिलाधिकारी (ADM), एयरपोर्ट अथॉरिटी, CISF, सिक्योरिटी डायरेक्टर और पुलिस आयुक्त (CP) के साथ एक संयुक्त बैठक भी आयोजित की गई। उन्होंने कहा, "1962 से अब तक 63 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस मुद्दे पर कभी सही तरीके से बातचीत नहीं हुई। 10 साल पहले भी एयरपोर्ट अथॉरिटी से बातचीत हुई थी और अब फिर बैठकें हो रही हैं।"

विमानन सुरक्षा की चिंता

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, ICAO के मानकों का पालन न होने से न केवल यात्री सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि हवाई अड्डे की परिचालन क्षमता भी सीमित रहती है। कोलकाता एयरपोर्ट पर बड़े विमानों और अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की स्थापना में यह मस्जिद एक तकनीकी बाधा बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया जा रहा है।

आगे की राह

प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बातचीत जारी है। सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने संकेत दिया है कि यदि मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों की सहमति से कोई वैकल्पिक समाधान निकलता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। यह मामला धार्मिक विरासत, अल्पसंख्यक अधिकार और राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के बीच नाज़ुक संतुलन की परीक्षा बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो समुदाय का प्रतिरोध स्वाभाविक है — क्योंकि दशकों तक दी गई आधिकारिक अनुमति ने एक अपेक्षा बनाई। असली सवाल यह है कि क्या प्रशासन एक ऐसा पुनर्वास पैकेज और वैकल्पिक स्थान प्रस्तावित कर सकता है जो धार्मिक गरिमा के साथ विमानन सुरक्षा को संतुलित करे — वरना यह गतिरोध अदालत की राह पकड़ेगा और एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण में और देरी होगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता एयरपोर्ट के पास कौन सी मस्जिद है और विवाद क्यों है?
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के सेकेंडरी रनवे से 165 मीटर की दूरी पर 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद (गौरीपुर जामे मस्जिद) स्थित है। ICAO के नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए, इसलिए इसे स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी कौन हैं और उनका क्या कहना है?
सिद्दीकुल्लाह चौधरी पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और राज्य जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि मुसलमान स्वयं मस्जिद नहीं तोड़ेंगे और कोई भी निर्णय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और दारूल उलूम देवबंद जैसे मान्यता प्राप्त संगठनों की सहमति से ही लिया जाएगा।
मस्जिद से एयरपोर्ट संचालन में क्या समस्या आती है?
मस्जिद की उपस्थिति के कारण रनवे का टचडाउन पॉइंट 88 मीटर पीछे खिसकाना पड़ा है, जिससे बड़े विमानों के परिचालन और आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की स्थापना में बाधा आती है। यह अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन भी है।
1962 में क्या हुआ था और अब स्थिति क्यों बदली?
1962 में एयरपोर्ट विस्तार के दौरान बांकड़ा गाँव के निवासियों को विस्थापित किया गया था, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मस्जिद को वहीं रहने दिया और नमाज़ की अनुमति दी। अब एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और ICAO मानकों के सख्त अनुपालन की जरूरत के कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया तेज हुई है।
इस मामले में अब तक क्या बैठकें हुई हैं और आगे क्या होगा?
एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ अब तक तीन-चार बैठकें हो चुकी हैं। बीते बुधवार को DM, ADM, एयरपोर्ट अथॉरिटी, CISF, सिक्योरिटी डायरेक्टर और पुलिस आयुक्त के साथ संयुक्त बैठक हुई। आगे का समाधान मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों की सहमति पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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