कोलकाता एयरपोर्ट के पास 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद स्थानांतरण विवाद, जमीयत उलेमा अध्यक्ष बोले- बातचीत से निकलेगा हल
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के सेकेंडरी रनवे से मात्र 165 मीटर की दूरी पर स्थित 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद (गौरीपुर जामे मस्जिद) को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और राज्य जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई भी निर्णय मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
मस्जिद और एयरपोर्ट विवाद की पृष्ठभूमि
यह मस्जिद अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के उन नियमों के दायरे में आती है, जिनके अनुसार किसी सक्रिय रनवे के 240 मीटर के भीतर कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए। मस्जिद की उपस्थिति के कारण रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे खिसकाना पड़ा है, जिससे बड़े विमानों के परिचालन और आधुनिक लैंडिंग प्रणाली स्थापित करने में बाधा आ रही है। गौरतलब है कि 1962 में एयरपोर्ट विस्तार के दौरान बांकड़ा गाँव के निवासियों को विस्थापित किया गया था, परंतु तत्कालीन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मस्जिद को उसी स्थान पर रहने दिया और नमाज़ की अनुमति भी प्रदान की थी।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी का पक्ष
सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, "यह 136 साल पुरानी मस्जिद है। 1962 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बांकड़ा गाँव के लोगों से कहा था कि वे दूसरे स्थान पर चले जाएँ, लेकिन मस्जिद वहीं रहेगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई थी और तब से वहाँ नमाज़ पढ़ी जा रही है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, "मुसलमान अपने हाथों से मस्जिद न तो तोड़ेंगे और न ही उसे किसी को सौंपेंगे। समाधान के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और दारूल उलूम देवबंद जैसे मान्यता प्राप्त संगठन इस पर राय दें — यदि कोई समाधान निकलेगा तो उन्हीं के माध्यम से निकलेगा।"
बैठकों का दौर और प्रशासनिक स्थिति
चौधरी के अनुसार अब तक एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ तीन-चार बैठकें हो चुकी हैं। बीते बुधवार को जिलाधिकारी (DM), अपर जिलाधिकारी (ADM), एयरपोर्ट अथॉरिटी, CISF, सिक्योरिटी डायरेक्टर और पुलिस आयुक्त (CP) के साथ एक संयुक्त बैठक भी आयोजित की गई। उन्होंने कहा, "1962 से अब तक 63 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस मुद्दे पर कभी सही तरीके से बातचीत नहीं हुई। 10 साल पहले भी एयरपोर्ट अथॉरिटी से बातचीत हुई थी और अब फिर बैठकें हो रही हैं।"
विमानन सुरक्षा की चिंता
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, ICAO के मानकों का पालन न होने से न केवल यात्री सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि हवाई अड्डे की परिचालन क्षमता भी सीमित रहती है। कोलकाता एयरपोर्ट पर बड़े विमानों और अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की स्थापना में यह मस्जिद एक तकनीकी बाधा बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया जा रहा है।
आगे की राह
प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बातचीत जारी है। सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने संकेत दिया है कि यदि मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों की सहमति से कोई वैकल्पिक समाधान निकलता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। यह मामला धार्मिक विरासत, अल्पसंख्यक अधिकार और राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के बीच नाज़ुक संतुलन की परीक्षा बन गया है।