कोलकाता एयरपोर्ट रनवे विस्तार में मस्जिद बाधा: भाजपा विधायक सौरव सिकदर बोले — हटाना अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के सेकेंडरी रनवे के निकट स्थित एक मस्जिद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सौरव सिकदर ने 29 मई 2026 को स्पष्ट रुख अपनाया — रनवे विस्तार और हवाई अड्डे के समग्र विकास के लिए इस धार्मिक स्थल को स्थानांतरित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर मस्जिद बनी है, वह भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की संपत्ति है और इस मुद्दे पर बातचीत जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक सिकदर ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय में एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। उनसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया गया है कि वे स्थानांतरण पर सहमति दें। सिकदर के अनुसार, मस्जिद की मौजूदगी न केवल रनवे के विस्तार में बाधा है, बल्कि विमान परिचालन की दृष्टि से सुरक्षा जोखिम भी उत्पन्न करती है।
उन्होंने कहा, 'इस मस्जिद की वजह से विस्तार रुका हुआ है। उड़ानों की संख्या भी नहीं बढ़ पा रही है। मैंने सभी मुस्लिम धर्मगुरुओं से विनती की है — विकास के रास्ते में धर्म कभी बाधा नहीं हो सकता।'
नेतृत्व की प्राथमिकता
सिकदर ने यह भी उल्लेख किया कि विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की प्राथमिकता है कि इस हवाई अड्डे का विकास हो, क्योंकि यह पूर्वी भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है। उनके अनुसार, हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास दोनों के लिए आवश्यक है।
दिलीप घोष का बयान
BJP के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने इस विवाद पर अलग कोण से टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बंगाल में कई स्थानों पर धर्मस्थल — मंदिर और मस्जिद दोनों — बनाए गए हैं, और भगवान को सम्मान के साथ रखना चाहिए, न कि जमीन कब्जाने के लिए। घोष ने सवाल उठाया: 'यदि यह मस्जिद गैरकानूनी है, तो किन लोगों ने इसे बनने दिया?' उन्होंने कहा कि जिन्होंने भी अवैध रूप से निर्माण किया है, उन्हें उसे हटा लेना चाहिए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कोलकाता हवाई अड्डे पर यात्री संख्या और उड़ानों की माँग लगातार बढ़ रही है, और AAI रनवे क्षमता विस्तार की योजनाओं पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि AAI की भूमि पर अनधिकृत निर्माण का मुद्दा देशभर के कई हवाई अड्डों पर समय-समय पर उठता रहा है। इस मामले में मस्जिद कमेटी का आधिकारिक पक्ष अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
आगे क्या
बातचीत का दौर जारी है और DM कार्यालय स्तर पर संवाद की प्रक्रिया चल रही है। यदि सहमति नहीं बनती, तो मामला कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया की ओर जा सकता है। AAI की भूमि स्वामित्व का दावा इस पूरे विवाद का केंद्रीय बिंदु है, जिस पर अंतिम निर्णय संभवतः न्यायिक या प्रशासनिक मंच पर होगा।