बांकरा मस्जिद हटाने के प्रस्ताव पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय का विरोध, बोले — समुदाय की सहमति ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 13 जुलाई 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट के निकट स्थित बांकरा मस्जिद को हटाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़ा निर्णय स्थानीय समुदाय की सहमति के बिना नहीं लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह मुद्दा राजनीतिक दबाव में उठाया जा रहा है।
मस्जिद विवाद: सांसद का पक्ष
सौगत रॉय ने कहा, 'स्थानीय मुस्लिम समुदाय मस्जिद हटाने के पक्ष में नहीं है और लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।' उन्होंने बताया कि बांकरा मस्जिद पिछले कई दशकों से उस स्थान पर मौजूद है और इसे हटाने का विवाद हाल के वर्षों में ही उभरा है। उनका कहना था कि किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय निवासियों की सहमति अनिवार्य है।
अदालत की टिप्पणी और कानूनी लड़ाई
रॉय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अभी कोई अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं आया है। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ कोर्ट की एक टिप्पणी थी। हम इसे नहीं मानते और हमने इसके खिलाफ पहले ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हम ऊपरी अदालत में भी जाएंगे।' उन्होंने संकेत दिया कि TMC इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।
गौरतलब है कि रितब्रत बनर्जी के उस बयान पर भी रॉय ने असहमति जताई, जिसमें बनर्जी ने कहा था कि वे ही असली तृणमूल हैं और अन्य दावेदार गैरकानूनी हैं। रॉय ने इस दावे को खारिज करते हुए न्यायिक प्रक्रिया को ही अंतिम कसौटी बताया।
बारुईपुर में सीपीएम नेता की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया
बारुईपुर में सीपीएम नेता लाहेक अली की गिरफ्तारी पर रॉय ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से मिली और पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा, 'यह सही है या गलत, मुझे नहीं पता — लेकिन यह देखना होगा कि अदालत में यह मामला कितना टिकता है।' उनके अनुसार, इस मामले में मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
एंटी सोशल एक्टिविटीज एक्ट 2026 पर सवाल
प्रस्तावित एंटी सोशल एक्टिविटीज एक्ट, 2026 को लेकर रॉय ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर सख्ती आवश्यक है, परंतु कोई भी कानून संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। उनके अनुसार, संविधान में गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश करने का प्रावधान है, और यह विधेयक उस मौलिक अधिकार को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि अदालत इस कानून को संवैधानिक कसौटी पर स्वीकार करती है या नहीं।
यूसीसी पर भाजपा को घेरा
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मुद्दे पर रॉय ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि BJP इसे लागू करना चाहती है, लेकिन केंद्र में पर्याप्त बहुमत न होने के कारण ऐसा नहीं कर पाई है। उनका मत है कि UCC लागू नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह मुस्लिम समुदाय के हितों को प्रभावित कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब UCC को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।