दिलीप घोष का बड़ा बयान: घुसपैठ और अवैध कब्जे खत्म होंगे तभी बंगाल में शांति संभव
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने शनिवार, 31 मई 2025 को पश्चिम मेदिनीपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य में घुसपैठ और अवैध कब्जे की समस्या को जड़ से समाप्त किए बिना बंगाल में स्थायी शांति नहीं आ सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा कुछ हजार लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि कहीं बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जरूरत है।
घुसपैठिए और बांग्लादेश वापसी पर बयान
घोष ने कहा, 'अभी घुसपैठिए अपनी मर्जी से खुद ही बांग्लादेश लौट रहे हैं। लेकिन यह सिर्फ 2,000 या 5,000 लोगों को हटाने का मामला नहीं है। हर दिन लाखों लोगों को हटाना पड़ेगा। तभी यहां रहने वाले करोड़ों घुसपैठिए यहां से जाएंगे।' उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं और कानून-व्यवस्था की समस्याओं के लिए भी जिम्मेदार हैं।
अवैध कब्जे पर सख्त रुख
राज्य में बढ़ते अतिक्रमण की घटनाओं पर दिलीप घोष ने कहा कि चाहे निजी जमीन हो या सरकारी, हर जगह अवैध कब्जे के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जो व्यक्ति इसके लिए जिम्मेदार है, उसे अतिक्रमण हटाना चाहिए, उसे तोड़ देना चाहिए और जमीन खाली कर देनी चाहिए। अन्यथा, कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में जमीन अतिक्रमण के मामले राजनीतिक विवाद का केंद्र बने हुए हैं।
चुनाव बाद हिंसा पर प्रतिक्रिया
चुनाव के बाद की हिंसा पर घोष ने कहा कि जो अपराधी और असामाजिक तत्व राजनीति में घुस आए थे, वे कई जगहों पर समस्याएं खड़ी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पुलिस अपना काम कर रही है और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है। पुलिस के साथ उनके जो अवैध संबंध थे, अब उनका खुलासा हो गया है।' घोष ने भरोसा दिलाया कि बंगाल में कोई भी कानून के खिलाफ काम नहीं कर पाएगा।
सुजीत बोस पर ईडी कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई पर घोष ने कहा कि ऐसे कई लोग पहले से ही सलाखों के पीछे हैं और आगे भी जाएंगे। उन्होंने कहा, 'कानूनी कार्यवाही अदालत के हाथों में है। अदालत क्या करेगी, यह फैसला अदालत ही करेगी।' गौरतलब है कि TMC के कई नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की जांच पिछले कुछ वर्षों से जारी है। आने वाले दिनों में इन मामलों में अदालती फैसले राज्य की राजनीति को और प्रभावित कर सकते हैं।