पश्चिम बंगाल विधानसभा में दो ओबीसी आरक्षण विधेयक पारित, टीएमसी-युग की सूची रद्द
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने 29 जून 2026 को ध्वनि मत से दो महत्वपूर्ण ओबीसी आरक्षण विधेयक पारित किए, जिससे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार द्वारा तैयार की गई ओबीसी सूची को रद्द करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। ये विधेयक राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की संरचना को मूलभूत रूप से पुनर्गठित करते हैं।
कौन से विधेयक पारित हुए
विधानसभा में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा मंत्री गौरी शंकर घोष ने दोनों विधेयक प्रस्तुत किए। पहला विधेयक — 'पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति के अलावा) सेवाओं और पदों में रिक्तियों के आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2026' — राज्य सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण के प्रतिशत और वर्गीकरण को नियंत्रित करता है। दूसरा — 'पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक 2026' — पिछड़ा वर्ग आयोग को ओबीसी सूची में किसी भी समुदाय को शामिल करने या बाहर करने पर आपत्ति उठाने का अधिकार देता है।
मुख्य प्रावधान क्या हैं
नए कानून के तहत राज्य सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग के परामर्श से सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित करेगी। हालाँकि, कुल आरक्षण किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक नहीं होगा। सरकार को पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर ओबीसी समुदायों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करने का भी अधिकार होगा।
इन संशोधनों के अंतर्गत वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल की मूल अनुसूची 1 को बहाल किया गया है — जो TMC के कानून में अनुसूची 2 के रूप में थी — जबकि TMC-युग की अनुसूची 1 और अनुसूची 3 को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण 2010 में रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के बाद लागू हुआ था। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार — जिसका नेतृत्व दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य कर रहे थे — ने तत्कालीन पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री योगेश चंद्र बर्मन द्वारा प्रस्तुत विधेयक के ज़रिए इसे लागू किया, जिसमें श्रेणी 'A' के लिए 10 प्रतिशत और श्रेणी 'B' के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।
गौरतलब है कि 2011 में सत्ता में आने के बाद TMC ने 2012 में इस कानून में संशोधन किया, जिसमें श्रेणी A में 65 समुदाय और श्रेणी B में 78 समुदाय शामिल किए गए। अनुसूचित जाति से ईसाई धर्म में परिवर्तित हुए लोगों को भी श्रेणी B में जोड़ा गया था।
BJP का आरोप और राजनीतिक विवाद
सदन में बहस के दौरान BJP विधायकों ने आरोप लगाया कि पूर्व TMC सरकार ने जानबूझकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को बड़ी संख्या में शामिल कर एक पक्षपातपूर्ण ओबीसी सूची तैयार की थी, ताकि अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधा जा सके। BJP का दावा है कि इस संशोधित सूची ने हिंदू पृष्ठभूमि के समुदायों की कीमत पर मुस्लिम समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिए। TMC ने इन आरोपों का खंडन किया है।
आगे क्या होगा
इन विधेयकों के कानून बनने के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग नई ओबीसी सूची की समीक्षा और पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर विवादास्पद रहा है। नई व्यवस्था के तहत समुदायों का पुनर्वर्गीकरण और आरक्षण प्रतिशत का पुनर्निर्धारण राज्य की नौकरशाही और सामाजिक समीकरणों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।