पश्चिम बंगाल: ओबीसी सूची में 66 समुदायों को नियमित, सरकारी नौकरियों में मिलेगा 7% आरक्षण
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 19 मई 2026 को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण सूची में वर्ष 2010 से पहले शामिल 66 समुदायों को नियमित कर दिया। यह निर्णय कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 22 मई 2024 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसके तहत राज्य में ओबीसी के लिए कुल आरक्षण घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि ये 66 श्रेणियाँ अब सरकारी सेवाओं और पदों में 7 प्रतिशत आरक्षण की पात्र होंगी। यह फैसला राज्य सरकार द्वारा मौजूदा ओबीसी सूची को रद्द किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है।
गौरतलब है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले ओबीसी श्रेणी के तहत कैटेगरी-ए के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी-बी के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार इस नई अधिसूचना पर पहुँची।
किन समुदायों को मिला स्थान
नियमित की गई सूची में कपाली, कुर्मी, नाई (नापित), तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा, पहाड़िया मुस्लिम, देवांग और हज्जाम (मुस्लिम) समेत कई पारंपरिक और सामाजिक समुदाय शामिल हैं। अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनुसूचित जाति से ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति और उनके वंशजों को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य की आरक्षण नीति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। चूँकि कुल ओबीसी आरक्षण अब 7 प्रतिशत तक सीमित है और इसके दायरे में 66 समुदाय आ गए हैं, इसलिए आलोचकों का कहना है कि ओबीसी वर्गों के भीतर प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में बढ़ सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में आरक्षण नीति पहले से ही न्यायिक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रही है। 2010 से पहले की सूची को आधार बनाने का निर्णय उन समुदायों के लिए राहत लेकर आया है जो पिछले कुछ वर्षों से कानूनी अनिश्चितता में थे।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है और इससे आरक्षण प्रक्रिया में सामाजिक न्याय व पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। राज्यपाल द्वारा जारी आदेश में भी यही स्थिति दोहराई गई है।
क्या होगा आगे
अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार 2010 के बाद जोड़े गए समुदायों के मामले में क्या रुख अपनाती है, जो फिलहाल इस नियमित सूची से बाहर हैं। न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक दबाव के बीच आगामी महीनों में ओबीसी आरक्षण नीति पर और स्पष्टता आने की संभावना है।