पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण 17% से घटाकर 7%, मुस्लिम समुदायों का लाभ तत्काल समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 19 मई 2026 को ओबीसी आरक्षण नीति में आमूल बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर मुस्लिम समुदायों को मिलने वाले ओबीसी लाभ को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय कलकत्ता उच्च न्यायालय की 22 मई 2024 की खंडपीठ के आदेश के अनुपालन में लिया गया है।
नई नीति में क्या बदला
अब तक राज्य में ओबीसी आरक्षण दो श्रेणियों में विभाजित था — ओबीसी कैटेगरी-ए के तहत 10 प्रतिशत और ओबीसी कैटेगरी-बी के तहत 7 प्रतिशत। नई अधिसूचना के तहत दोनों श्रेणियाँ समाप्त कर दी गई हैं और एकीकृत 7 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। यह लाभ अब केवल उन समुदायों को मिलेगा जिन्हें सरकार 'वास्तविक पिछड़े हिंदू समुदाय' के रूप में परिभाषित करती है और जो अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में नहीं आते।
कौन-से समुदाय पात्र होंगे
राज्यपाल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, वर्ष 2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदाय अब सरकारी नौकरियों और सेवाओं में 7 प्रतिशत आरक्षण के पात्र होंगे। इस सूची में कपाली, कुर्मी, नाई (नापित), तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा और देवांग समेत कई पारंपरिक हिंदू समुदाय शामिल हैं।
न्यायालय के आदेश की भूमिका
गौरतलब है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 22 मई 2024 को एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य की तत्कालीन ओबीसी सूची को चुनौती दी थी। राज्य सरकार का दावा है कि नई नीति उसी आदेश के अनुपालन में है और इसे सामाजिक न्याय एवं पारदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार किया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों पर गहरा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव डालेगा।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में आरक्षण नीति लंबे समय से विवाद का विषय रही है। विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसकी आलोचना की है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पक्ष का तर्क है कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करना संवैधानिक दायित्व है।
आगे क्या होगा
नई अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू मानी जा रही है। प्रभावित समुदायों की ओर से न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य के सरकारी भर्ती और सेवाओं में यह बदलाव किस प्रकार क्रियान्वित होगा, इस पर विभागीय दिशानिर्देश आने बाकी हैं।