पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण 17% से घटाकर 7%, मुस्लिम समुदायों का लाभ तत्काल समाप्त

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पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण 17% से घटाकर 7%, मुस्लिम समुदायों का लाभ तत्काल समाप्त

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार ने ओबीसी आरक्षण 17% से घटाकर 7% करते हुए मुस्लिम समुदायों का लाभ तत्काल समाप्त कर दिया। कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2024 के आदेश का हवाला देकर लागू यह नीति 2010 से पहले सूचीबद्ध 66 हिंदू समुदायों को ही पात्र मानती है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 19 मई 2026 को ओबीसी आरक्षण 17% से घटाकर 7% करने की अधिसूचना जारी की।
मुस्लिम समुदायों को मिलने वाला ओबीसी लाभ तत्काल प्रभाव से समाप्त किया गया।
2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदाय अब 7% आरक्षण के पात्र होंगे।
पहले की ओबीसी कैटेगरी-ए (10%) और ओबीसी कैटेगरी-बी (7%) दोनों श्रेणियाँ समाप्त।
सरकार ने यह निर्णय कलकत्ता उच्च न्यायालय की 22 मई 2024 की खंडपीठ के आदेश के अनुपालन में बताया।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 19 मई 2026 को ओबीसी आरक्षण नीति में आमूल बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर मुस्लिम समुदायों को मिलने वाले ओबीसी लाभ को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय कलकत्ता उच्च न्यायालय की 22 मई 2024 की खंडपीठ के आदेश के अनुपालन में लिया गया है।

नई नीति में क्या बदला

अब तक राज्य में ओबीसी आरक्षण दो श्रेणियों में विभाजित था — ओबीसी कैटेगरी-ए के तहत 10 प्रतिशत और ओबीसी कैटेगरी-बी के तहत 7 प्रतिशत। नई अधिसूचना के तहत दोनों श्रेणियाँ समाप्त कर दी गई हैं और एकीकृत 7 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। यह लाभ अब केवल उन समुदायों को मिलेगा जिन्हें सरकार 'वास्तविक पिछड़े हिंदू समुदाय' के रूप में परिभाषित करती है और जो अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में नहीं आते।

कौन-से समुदाय पात्र होंगे

राज्यपाल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, वर्ष 2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदाय अब सरकारी नौकरियों और सेवाओं में 7 प्रतिशत आरक्षण के पात्र होंगे। इस सूची में कपाली, कुर्मी, नाई (नापित), तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा और देवांग समेत कई पारंपरिक हिंदू समुदाय शामिल हैं।

न्यायालय के आदेश की भूमिका

गौरतलब है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 22 मई 2024 को एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य की तत्कालीन ओबीसी सूची को चुनौती दी थी। राज्य सरकार का दावा है कि नई नीति उसी आदेश के अनुपालन में है और इसे सामाजिक न्याय एवं पारदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार किया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों पर गहरा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव डालेगा।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में आरक्षण नीति लंबे समय से विवाद का विषय रही है। विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसकी आलोचना की है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पक्ष का तर्क है कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करना संवैधानिक दायित्व है।

आगे क्या होगा

नई अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू मानी जा रही है। प्रभावित समुदायों की ओर से न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य के सरकारी भर्ती और सेवाओं में यह बदलाव किस प्रकार क्रियान्वित होगा, इस पर विभागीय दिशानिर्देश आने बाकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें ज़मीनी स्तर पर लाभ मिलता है या यह बदलाव सिर्फ एक समुदाय को बाहर करने तक सीमित रह जाता है। प्रभावित वर्गों की ओर से न्यायालय में नई चुनौती लगभग तय है, जो इस नीति की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण में क्या बदलाव हुआ है?
राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है और मुस्लिम समुदायों को मिलने वाला लाभ तत्काल प्रभाव से समाप्त किया है। अब केवल 2010 से पहले सूचीबद्ध 66 पारंपरिक हिंदू समुदाय इस आरक्षण के पात्र होंगे।
यह फैसला किस न्यायालय के आदेश पर आधारित है?
राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 22 मई 2024 के आदेश का हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि नई नीति उसी आदेश के अनुपालन में लागू की गई है।
नई ओबीसी सूची में कौन-से समुदाय शामिल हैं?
2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदाय पात्र होंगे, जिनमें कपाली, कुर्मी, नाई (नापित), तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा और देवांग प्रमुख हैं। ये सभी पारंपरिक हिंदू समुदाय हैं जो SC और ST श्रेणी में नहीं आते।
पहले ओबीसी आरक्षण कैसे विभाजित था?
पहले ओबीसी कैटेगरी-ए के तहत 10 प्रतिशत और ओबीसी कैटेगरी-बी के तहत 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता था, कुल मिलाकर 17 प्रतिशत। नई नीति में दोनों श्रेणियाँ समाप्त कर एकीकृत 7 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है।
इस फैसले का प्रभावित समुदायों पर क्या असर होगा?
मुस्लिम समुदायों को सरकारी नौकरियों और सेवाओं में मिलने वाला ओबीसी आरक्षण का लाभ तत्काल समाप्त हो जाएगा। आलोचकों का कहना है कि इससे इन समुदायों पर गहरा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ेगा, और प्रभावित वर्गों की ओर से न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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