यूनिट 731 के पूर्व चिकित्सक की गवाही: जापानी सेना ने हार से पहले चीन में दफनाए थे जहरीली गैस के बम
सारांश
मुख्य बातें
चीन में जापानी सेना की यूनिट 731 द्वारा किए गए अपराधों के साक्ष्य संग्रहालय ने 12 अगस्त 2026 को नवसंकलित ऐतिहासिक दस्तावेज़ सार्वजनिक किए, जिनमें यूनिट 731 की हैलार टुकड़ी के एक पूर्व जापानी चिकित्सक की 70 मिनट लंबी मौखिक गवाही शामिल है। इस गवाही में स्वीकार किया गया है कि जापानी सेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध में अपनी पराजय से पूर्व चीन की धरती पर बड़ी संख्या में जहरीली गैस के बम गुप्त रूप से दफनाए थे। शोधकर्ताओं के अनुसार यह गवाही जापानी रासायनिक हथियारों के परित्याग के मुद्दे पर नई ऐतिहासिक रोशनी डालती है।
गवाही का स्रोत और संग्रह
यह मौखिक विवरण संग्रहालय की टीम ने 2016 में जापान की एक शोध यात्रा के दौरान दर्ज किया था। साक्षात्कारकर्ता तानिजाकी हितोशी ने वीडियो में बताया कि जब वे जापानी सेना में भर्ती हुए थे, तब उनकी आयु मात्र 21 वर्ष थी। उन्होंने यूनिट 731 में बिताए समय के अनुभव विस्तार से साझा किए। यह गवाही अब तक अप्रकाशित थी और संग्रहालय द्वारा इसे पहली बार औपचारिक रूप से जारी किया गया है।
मुख्य खुलासे: बमों को दफनाने का सच
तानिजाकी हितोशी ने अपनी गवाही में खुलासा किया कि पीछे हटते समय हैलार टुकड़ी ने अपनी समस्त सुविधाओं में आग लगा दी थी, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें। परंतु जापानी जहरीली गैस इकाई ने गुप्त रूप से बड़ी संख्या में रासायनिक बम भूमि में दबा दिए। उन्होंने स्पष्ट किया — 'वह बैक्टीरिया नहीं, जहरीली गैस थी' — और यह भी बताया कि जहरीली गैस इकाई की स्थापना फुलारजी में की गई थी।
शोधकर्ताओं की प्रतिक्रिया
संग्रहालय के शोधकर्ता चिन शिछेंग ने कहा कि यह मौखिक विवरण प्रत्यक्ष रूप से इस बात की पुष्टि करता है कि जापानी सेना ने पराजय के दौरान चीन में रासायनिक हथियार छोड़ दिए थे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह गवाही युद्धोत्तर काल में विषैली गैस से जुड़ी घटनाओं की ऐतिहासिक जड़ों को समझने में व्यावहारिक महत्व रखती है।
ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक प्रभाव
गौरतलब है कि यूनिट 731 द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापानी सेना की वह कुख्यात इकाई थी जिसने चीन में जैविक और रासायनिक हथियारों से संबंधित प्रयोग किए थे। युद्ध समाप्ति के दशकों बाद भी चीन में परित्यक्त जापानी रासायनिक हथियार मिलते रहे हैं, जो आज भी नागरिकों के लिए खतरा बने हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चीन-जापान ऐतिहासिक संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। नई गवाही इस विषय पर अपराधी पक्ष की ओर से प्रत्यक्ष साक्ष्य का दुर्लभ उदाहरण मानी जा रही है।
आगे क्या
संग्रहालय के अनुसार यह दस्तावेज़ जापानी रासायनिक हथियारों के परित्याग के मुद्दे पर आगे के शोध के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। शोधकर्ता इस गवाही का उपयोग अन्य अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ मिलाकर रासायनिक हथियारों की सटीक स्थिति और संख्या का आकलन करने में करेंगे।