यूनिट 731 पर चीन का कड़ा रुख: जापानी दक्षिणपंथी ताकतें ऐतिहासिक सच्चाई छुपा रही हैं
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने 18 जून को एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जापानी दक्षिणपंथी ताकतें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूनिट 731 द्वारा किए गए अमानवीय अपराधों को छुपाने और उन्हें कम आँकने की कोशिश कर रही हैं। यह बयान उस वृत्तचित्र के प्रसारण के बाद आया जिसका शीर्षक था — 'यूनिट 731 का अनावरण: जापान के गुप्त मानव प्रयोग' — जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
यूनिट 731 और उसके अपराध
प्रवक्ता लिन च्येन के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना की यूनिट 731 ने जीवित मनुष्यों पर अमानवीय प्रयोग किए और जीवाणु युद्ध को अंजाम दिया। पीड़ितों में चीनी नागरिक, सोवियत युद्धबंदी, कोरियाई मजदूर तथा बंदी बनाए गए ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिक शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का एक अत्यंत अंधकारमय और क्रूर अध्याय है जो मानवता की अंतरात्मा और नैतिक मूल्यों को सीधी चुनौती देता है।
दक्षिणपंथी ताकतों पर आरोप
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चिंताजनक बात यह है कि अकाट्य साक्ष्यों के बावजूद, जापान की दक्षिणपंथी ताकतें न केवल अपने अपराधों पर पुनर्विचार करने से इनकार कर रही हैं, बल्कि कुख्यात यूनिट 731 को 'स्वास्थ्य अनुसंधान में लगी इकाई' बताकर उसका महिमामंडन करने का प्रयास कर रही हैं। उनके अनुसार, ये ताकतें ऐतिहासिक तथ्यों को व्यापक रूप से तोड़-मरोड़ रही हैं।
क्षेत्रीय शांति पर खतरा
लिन च्येन ने आगे कहा कि इन ताकतों का मूल उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक निष्कर्षों को नकारना और युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देना है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास के प्रति यह रवैया सैन्यवाद के घातक प्रभाव और नए प्रकार के सैन्यवाद की खतरनाक प्रवृत्तियों को उजागर करता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
चीनी विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इस प्रवृत्ति के प्रति अत्यधिक सतर्क रहे और इसका दृढ़तापूर्वक विरोध करे। गौरतलब है कि बीजिंग और टोक्यो के बीच ऐतिहासिक मुद्दों पर तनाव नया नहीं है — यह उन विवादों की लंबी श्रृंखला का हिस्सा है जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करते रहे हैं।