14 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल BJP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से OBC आरक्षण याचिका वापस ली, कलकत्ता HC के फैसले को नहीं देगी चुनौती

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पश्चिम बंगाल BJP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से OBC आरक्षण याचिका वापस ली, कलकत्ता HC के फैसले को नहीं देगी चुनौती

सारांश

पश्चिम बंगाल की BJP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वह याचिका वापस ले ली जो TMC सरकार ने कलकत्ता HC के OBC आरक्षण फैसले को चुनौती देने के लिए दायर की थी। 75 मुस्लिम समुदायों सहित 77 जातियों के आरक्षण का भविष्य अब अनिश्चित है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल BJP सरकार ने 14 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय से OBC आरक्षण अपील वापस ली।
यह याचिका पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर की थी।
मई 2024 में कलकत्ता HC ने 2010 के बाद जारी OBC प्रमाणपत्रों और अधिसूचनाओं को रद्द किया था।
मामला 75 मुस्लिम समुदायों सहित 77 जातियों को OBC सूची में शामिल किए जाने से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्य प्रभावित पक्ष HC के फैसले के विरुद्ध अपील कर सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने 14 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में वह अपील वापस ले ली, जो पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के ओबीसी आरक्षण संबंधी ऐतिहासिक फैसले को चुनौती देने के लिए दायर की थी। यह मामला राज्य की ओबीसी सूची में 75 मुस्लिम समुदायों सहित 77 जातियों को शामिल किए जाने से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि राज्य कैबिनेट ने इस अपील को वापस लेने का औपचारिक निर्णय किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार का आग्रह स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी।

हालाँकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अन्य प्रभावित या पीड़ित पक्ष को कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध अपील दायर करने के अधिकार से नहीं रोका जाएगा।

कलकत्ता हाई कोर्ट का मूल फैसला

मई 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए अनेक ओबीसी प्रमाणपत्रों और आरक्षण संबंधी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि जिन समुदायों को ओबीसी श्रेणी में सम्मिलित किया गया, उनमें से कई मामलों में धर्म ही प्रमुख आधार प्रतीत होता है — जो संवैधानिक और वैधानिक मानकों के अनुरूप नहीं है।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि किसी समुदाय को ओबीसी घोषित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया, जिस आधार पर संबंधित आरक्षण को अवैध ठहराया गया।

सत्ता परिवर्तन के बाद नीतिगत बदलाव

कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद BJP सरकार ने उस अपील को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम BJP की उस राजनीतिक स्थिति के अनुरूप है जिसमें पार्टी धर्म-आधारित आरक्षण का विरोध करती रही है।

आम जनता और प्रभावित समुदायों पर असर

याचिका वापस लिए जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कोई कानूनी चुनौती लंबित नहीं रहेगी। इसका सीधा असर उन 77 जातियों पर पड़ेगा जिन्हें 2010 के बाद ओबीसी सूची में जोड़ा गया था और जिनके प्रमाणपत्र उच्च न्यायालय के आदेश से रद्द हो चुके हैं। इन समुदायों को सरकारी सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ अब अनिश्चितकाल के लिए रुक सकता है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय ने अन्य प्रभावित पक्षों के लिए अपील का मार्ग खुला रखा है। ऐसे में संबंधित समुदायों के संगठन या व्यक्तिगत याचिकाकर्ता कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दे सकते हैं। फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय का मई 2024 का आदेश प्रभावी बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

गहरा राजनीतिक संदेश है — पार्टी धर्म-आधारित OBC वर्गीकरण को वैध नहीं मानती और इसे अदालत में बचाने की कोई मंशा नहीं रखती। लेकिन इससे उन लाखों लोगों का भविष्य अधर में लटक गया है जिन्होंने 2010 के बाद OBC प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी या दाखिला लिया। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इन समुदायों के लिए कोई वैकल्पिक संवैधानिक रास्ता निकालेगी, या सत्ता की राजनीति में यह वर्ग केवल मोहरा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से OBC याचिका क्यों वापस ली?
राज्य कैबिनेट ने निर्णय लिया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के OBC आरक्षण फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जाएगी। यह अपील पूर्ववर्ती TMC सरकार ने दायर की थी; सत्ता में आने के बाद BJP सरकार ने उसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने OBC आरक्षण पर क्या फैसला दिया था?
मई 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2010 के बाद जारी अनेक OBC प्रमाणपत्रों और आरक्षण अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा कि कई समुदायों को OBC श्रेणी में शामिल करते समय धर्म को प्रमुख आधार बनाया गया, जो संवैधानिक मानकों के विरुद्ध है।
इस फैसले से कौन-से समुदाय प्रभावित होंगे?
75 मुस्लिम समुदायों सहित 77 जातियाँ इस मामले में प्रभावित हैं, जिन्हें 2010 के बाद पश्चिम बंगाल की OBC सूची में जोड़ा गया था। इनके OBC प्रमाणपत्र उच्च न्यायालय के आदेश से रद्द हो चुके हैं, जिससे सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का लाभ अनिश्चित हो गया है।
क्या अब कोई अन्य पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है?
हाँ। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की याचिका वापसी से किसी अन्य प्रभावित या पीड़ित पक्ष का कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध अपील करने का अधिकार बाधित नहीं होगा।
अभी पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण की कानूनी स्थिति क्या है?
फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय का मई 2024 का वह आदेश प्रभावी है जिसने 2010 के बाद के OBC प्रमाणपत्रों और अधिसूचनाओं को रद्द किया था। राज्य सरकार की ओर से कोई कानूनी चुनौती लंबित नहीं है, हालाँकि अन्य पक्षों के लिए अदालत का दरवाज़ा खुला है।
राष्ट्र प्रेस
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