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ट्विशा शर्मा केस: भोपाल कोर्ट ने सीबीआई को गिरिबाला व समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने की नई अनुमति दी

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ट्विशा शर्मा केस: भोपाल कोर्ट ने सीबीआई को गिरिबाला व समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने की नई अनुमति दी

सारांश

ट्विशा शर्मा मौत मामले में भोपाल कोर्ट ने सीबीआई को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल दोबारा लेने की अनुमति दी — क्योंकि आरोपियों ने जेल में पहले सहयोग से इनकार कर दिया था। सीएफएसएल रिपोर्ट और अहम गवाहों के बयान अभी बाकी हैं।

मुख्य बातें

भोपाल जिला अदालत ने 14 जुलाई को सीबीआई को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल दोबारा लेने की अनुमति दी।
दोनों आरोपियों ने भोपाल सेंट्रल जेल में पहले की प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर सहयोग से इनकार किया था, जबकि कोर्ट में सहमति दे चुके थे।
मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धारा 349 के तहत सीबीआई की अर्जी मंजूर की।
दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ाई गई।
सीएफएसएल की रिपोर्ट और कई अहम गवाहों के बयान अभी लंबित हैं।
एम्स, नई दिल्ली का कोई वकील नोटिस के बावजूद सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ।

भोपाल की जिला अदालत ने मंगलवार, 14 जुलाई को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल दोबारा लेने की अनुमति प्रदान कर दी। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 349 के तहत सीबीआई की अर्जी को स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी।

क्यों लेनी पड़ी नई अनुमति

सीबीआई ने अदालत को बताया कि भोपाल सेंट्रल जेल में पहले हुई प्रक्रिया के दौरान गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने कथित तौर पर सहयोग करने से इनकार कर दिया था — जबकि इससे पहले की सुनवाई में उन्होंने कोर्ट के सामने वॉयस सैंपल देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, जब उसकी टीम नमूने लेने के लिए जेल पहुंची, तो दोनों आरोपियों ने सहयोग से मना कर दिया, जिससे जांच का एक अहम चरण पिछड़ गया।

जांच की मौजूदा स्थिति

सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि जांच अभी अधूरी है। केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की रिपोर्ट का अभी इंतजार है और कई अहम गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। एजेंसी ने ज़ोर देकर कहा कि आवाज के नमूने जांच के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

गिरिबाला सिंह के स्वास्थ्य पर बचाव पक्ष का तर्क

गिरिबाला सिंह की वकील ने कोर्ट को बताया कि उनकी मुवक्किल की तबीयत ठीक नहीं है और वे भोपाल सेंट्रल जेल के अंदर स्थित अस्पताल में उपचाराधीन हैं। हालांकि, सभी दलीलों पर विचार करने के बाद मजिस्ट्रेट ने सीबीआई की अर्जी को मंजूरी देना उचित पाया।

एम्स की अनुपस्थिति दर्ज

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि नोटिस मिलने के बावजूद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली की ओर से कोई वकील सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब मामले में कई संस्थागत पक्षों की भूमिका की जांच जारी है।

आगे क्या होगा

अब सीबीआई को कानूनी रूप से बीएनएसएस की धारा 349 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए दोनों आरोपियों के वॉयस सैंपल लेने का अधिकार प्राप्त हो गया है। दोनों की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी गई है। सीएफएसएल रिपोर्ट और शेष गवाहों के बयान आने के बाद जांच का अगला चरण तय होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सीएफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों की लंबित स्थिति यह दर्शाती है कि जांच अभी लंबे रास्ते पर है। एम्स जैसे संस्थान की नोटिस के बावजूद अनुपस्थिति भी जवाबदेही के सवाल खड़े करती है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा केस में भोपाल कोर्ट ने 14 जुलाई को क्या फैसला सुनाया?
भोपाल जिला अदालत ने 14 जुलाई को सीबीआई को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल दोबारा लेने की अनुमति दी और दोनों की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी। यह अनुमति बीएनएसएस की धारा 349 के तहत दी गई।
आरोपियों ने वॉयस सैंपल देने से पहले क्यों इनकार किया था?
सीबीआई के अनुसार, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने कोर्ट में सहमति देने के बावजूद भोपाल सेंट्रल जेल में जांच टीम के पहुंचने पर कथित तौर पर सहयोग से मना कर दिया। इस इनकार के कारण जांच का एक अहम चरण पिछड़ गया।
ट्विशा शर्मा केस में जांच कहाँ तक पहुंची है?
जांच अभी पूरी नहीं हुई है। सीएफएसएल की फोरेंसिक रिपोर्ट अभी लंबित है और कई अहम गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। वॉयस सैंपल मिलने के बाद जांच आगे बढ़ेगी।
बीएनएसएस की धारा 349 क्या है और इसका इस मामले में क्या महत्व है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 349 जांच एजेंसी को अदालत की अनुमति से आरोपियों के वॉयस सैंपल जैसे नमूने लेने का कानूनी अधिकार देती है। इस धारा के तहत मिली अनुमति से सीबीआई अब आरोपियों के असहयोग के बावजूद कानूनी रूप से नमूने ले सकती है।
एम्स नई दिल्ली का इस मामले में क्या संबंध है?
कोर्ट ने दर्ज किया कि एम्स, नई दिल्ली को नोटिस दिया गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई वकील सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। मामले में एम्स की सटीक भूमिका का विवरण अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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