आंध्र प्रदेश: कृषि अधिकारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुडुमुला हरिकृष्ण ने पत्नी व दो बच्चों समेत ट्रेन के आगे कूदकर जान दी
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में कृषि अधिकारी की हत्या के मुख्य आरोपी कुडुमुला हरिकृष्ण ने मंगलवार, 14 जुलाई को अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ सिंगरायकोंडा रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को पटरी पर चारों के शव मिले, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
हरिकृष्ण की पहचान उनके पास मिले आधार कार्ड के आधार पर हुई। वे श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोर जिले के गुडूर मंडल के थोटापल्ली आरवी कंड्रिका गांव के मूल निवासी थे। पुलिस के अनुसार, जैसे ही जांच का दायरा बढ़ा और उनकी गिरफ्तारी तय लगने लगी, हरिकृष्ण फरार हो गए थे। फरारी के दौरान उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि कुछ लोग जानबूझकर उनके खिलाफ झूठे आरोप फैला रहे हैं।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि
कृषि अधिकारी श्रीहरि की मृत्यु शुरुआत में कार्डियक अरेस्ट से मानी गई थी। परन्तु जब श्रीहरि की पत्नी लावण्या ने 6 जुलाई को पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (PGRS) पर शिकायत दर्ज कराई कि शव पर चोट के निशान हैं, तब मामले ने नया मोड़ लिया। जांच में खुलासा हुआ कि श्रीहरि की हत्या उनके अपने जीजा हरिकृष्ण ने की थी। कथित तौर पर हरिकृष्ण ने कुत्तों को मारने के लिए इस्तेमाल होने वाले घातक इंजेक्शन का प्रयोग कर हत्या को अंजाम दिया था। यह हत्या पारिवारिक संपत्ति विवाद और श्रीहरि द्वारा हरिकृष्ण को दिए गए कर्ज से जुड़ी बताई जा रही है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
बुचिरेड्डीपालेम पुलिस स्टेशन के सर्कल इंस्पेक्टर ने लावण्या की शिकायत के बावजूद न तो प्राथमिकी दर्ज की और न ही संदिग्धों से पूछताछ की। इस कथित लापरवाही के बाद पुलिस अधीक्षक अनीता वेजेंडला ने जांच के आदेश दिए, जिससे हत्या की पुष्टि हुई। नेल्लोर जिले के पुलिस अधीक्षक ने सोमवार को उस थाने में तैनात सभी 23 पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया। सर्कल इंस्पेक्टर मतांगी श्रीनिवास राव को रिजर्व यूनिट में भेज दिया गया है।
गिरफ्तारी और जांच की स्थिति
हत्या में हरिकृष्ण की मदद करने वाले दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब जबकि मुख्य आरोपी की मृत्यु हो गई है, पुलिस इस मामले में शेष पहलुओं की जांच जारी रखेगी। यह घटना आंध्र प्रदेश में पुलिसिया जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।