पीओके में छात्रों का विद्रोह: रावलाकोट में सफेद झंडे लेकर सड़कों पर उतरे बच्चे, पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के खिलाफ नारे
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 14 जुलाई 2026 को उस समय तनाव और गहरा गया जब रावलाकोट के ईदगाह मैदान में सैकड़ों स्कूली बच्चे अपनी यूनिफॉर्म में, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ जमा हुए और पाकिस्तानी सेना की कथित दमनकारी कार्रवाई के विरोध में सफेद झंडे लहराए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने बैनर थामे जिन पर लिखा था — 'अंतरराष्ट्रीय मीडिया हमें कवरेज दे' — और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के खिलाफ नारे लगाए।
मुख्य घटनाक्रम
यह प्रदर्शन उस पृष्ठभूमि में हुआ जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि हाल ही में प्रतिबंधित की गई जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नियोजित विरोध मार्चों के दौरान छात्रों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस चेतावनी को दरकिनार करते हुए सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई आम नागरिकों की मौत हुई है और अनेक घायल हुए हैं। इलाके में कड़ी पाबंदियाँ, कर्फ्यू और संचार सेवाओं की पूर्ण बंदी की स्थिति कथित तौर पर बनी हुई है।
जेएएसी की माँगें और मुजफ्फराबाद मार्च
पिछले सप्ताह जेएएसी ने 15 जुलाई को पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च निकालने का ऐलान किया था और पूरे इलाके के लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। समूह ने कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की गोलीबारी में कथित तौर पर दो और युवकों की जान गई है, जिससे तनाव और बढ़ गया।
जेएएसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मुजफ्फराबाद विधानसभा में बैठे हर शासक इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं। लोग याद रखेंगे कि हमारे इन युवाओं के हत्यारे पाकिस्तानी सुरक्षाबल और मुजफ्फराबाद के शासक हैं।' समूह ने यह भी कहा कि 5 जून के बाद मारे गए लोगों के शव अभी भी परिवारों को नहीं सौंपे गए हैं।
यूकेपीएनपी सम्मेलन और मानवाधिकार चिंताएँ
इस बीच यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने एक सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें पीओके और विदेशों में रह रहे कश्मीरियों के प्रतिनिधि, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। यूकेपीएनपी के अनुसार, सम्मेलन में इलाके में कथित मानवाधिकार उल्लंघन, जारी घेराबंदी और आम नागरिकों पर हुई कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिभागियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से माँग की कि वे तुरंत बल प्रयोग, मनमाने तरीके से गिरफ्तारियाँ और जबरन गायब किए जाने की घटनाएँ बंद करें। उन्होंने सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा कर अदालतों के सामने पेश करने और 5 जून के बाद मारे गए लोगों के शवों को बिना शर्त परिवारों को सौंपने की माँग की।
प्रमुख माँगें
यूकेपीएनपी और जेएएसी समर्थकों ने माँग की कि जेएएसी पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाए, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बहाल की जाएँ, और इलाके में भोजन व दवाइयों जैसी ज़रूरी आपूर्ति फिर से शुरू की जाए। साथ ही यह भी माँग की गई कि पाकिस्तानी सुरक्षाबलों को अस्पतालों से हटाया जाए ताकि लोगों को सुरक्षित इलाज मिल सके।
आगे क्या होगा
पीओके में चल रहे ये विरोध प्रदर्शन इस्लामाबाद के दशकों पुराने नियंत्रण को सीधी चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं। 15 जुलाई का मुजफ्फराबाद मार्च इस आंदोलन की अगली बड़ी कसौटी होगा — और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़रें भी इस पर टिकी हैं।