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पीओजेके में पाकिस्तानी सेना पर बड़ा आरोप: 'हमें हथियार देकर आज आतंकी कह रहे हैं' — 80 हजार की सभा में विद्रोह

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पीओजेके में पाकिस्तानी सेना पर बड़ा आरोप: 'हमें हथियार देकर आज आतंकी कह रहे हैं' — 80 हजार की सभा में विद्रोह

सारांश

पीओजेके में 24 दिनों से जारी जनआंदोलन ने रावलाकोट में 80 हजार की सभा के साथ नई ऊंचाई छुई। जेएएसी नेता का सीधा आरोप — पाकिस्तानी सेना ने ही कश्मीरियों को हथियार दिए थे। अब 38 मांगें न मानी तो पीओजेके को पाकिस्तान से आजाद कराने की मांग तक पहुंच सकता है यह आंदोलन।

मुख्य बातें

पीओजेके में जनआंदोलन के 24वें दिन रावलाकोट के ईदगाह मैदान में करीब 80 हजार लोगों की विशाल सभा हुई।
जेएएसी नेता सरदार अमन खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने खुद कश्मीरियों को हथियार दिए थे, और अब उन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है।
5 फरवरी 2025 को रावलाकोट में प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद को कार्यक्रम की अनुमति देने का कथित आरोप लगाया गया।
जेएएसी ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी — 38 मांगें न मानी तो मुजफ्फराबाद की ओर मार्च होगा।
नेताओं ने कहा कि मार्च शुरू हुआ तो आंदोलन पीओजेके को पाकिस्तान से खाली कराने की मांग तक पहुंच सकता है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जनआंदोलन के 24वें दिन रावलाकोट के ईदगाह मैदान में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें करीब 80 हजार लोग शामिल हुए। इस सभा में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी सेना पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जिन कश्मीरियों को आज आतंकवादी करार दिया जा रहा है, उन्हें हथियार देने का काम स्वयं पाकिस्तान की सेना ने किया था। यह आंदोलन अब केवल आर्थिक और प्रशासनिक मांगों से आगे बढ़कर राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

2 जुलाई को रावलाकोट के ईदगाह मैदान में हुई इस सभा में अमन खान ने कहा, 'पाकिस्तान सेना ने खुद कश्मीरियों को बंदूकें दी थीं, और आज वही हमें आतंकवादी कह रही है।' उनके इस बयान पर उपस्थित हजारों लोगों ने तालियों और नारों के साथ जोरदार समर्थन जताया। यह पीओजेके में जारी जनआंदोलन का सबसे बड़ा जमावड़ा बताया जा रहा है।

जैश-ए-मोहम्मद पर गंभीर आरोप

अमन खान ने दावा किया कि 5 फरवरी 2025 को रावलाकोट में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रशासन ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को खुली छूट दी थी। उनके अनुसार, प्रशासन ने न केवल कार्यक्रम की अनुमति दी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी मुहैया कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान जैश-ए-मोहम्मद के हथियारबंद लोग एके-47 राइफलों और तलवारों के साथ शहर में खुलेआम मार्च करते रहे। ये आरोप कथित हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

पाकिस्तान सरकार को चेतावनी

जेएएसी नेतृत्व ने सभा के अंत में पाकिस्तान सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि आंदोलन की 38 मांगों को बातचीत के जरिए स्वीकार कर लागू किया जाए, अन्यथा हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करेंगे। नेताओं ने कहा कि यदि यह मार्च शुरू हुआ तो आंदोलन का एजेंडा 38 मांगों तक सीमित नहीं रहेगा — तब यह पाकिस्तान से पीओजेके खाली कराने की मांग की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

आंदोलन का बदलता स्वरूप

गौरतलब है कि यह आंदोलन लगातार 24 दिनों से जारी है और शुरुआत में मुख्यतः आर्थिक व प्रशासनिक मुद्दों पर केंद्रित था। रावलाकोट की विशाल सभा ने संकेत दिया है कि जनता का असंतोष अब संरचनागत राजनीतिक सवालों की तरफ मुड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

क्या होगा आगे

आंदोलनकारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि आंदोलन किस दिशा में जाएगा। यदि सरकार 38 मांगें नहीं मानती, तो मुजफ्फराबाद मार्च और उसके बाद पीओजेके की आजादी की मांग को लेकर आंदोलन और उग्र हो सकता है। पीओजेके की राजनीतिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

आर्थिक शोषण और सैन्य नियंत्रण का संचित गुस्सा है जो अब सार्वजनिक मंच पर फूट रहा है। जो बात इस आंदोलन को असाधारण बनाती है, वह है पाकिस्तानी सेना पर सीधे और नाम लेकर लगाए गए आरोप — जो पाकिस्तान के भीतर अभूतपूर्व साहस की मांग करते हैं। मुख्यधारा की मीडिया इस आंदोलन को महज 'आर्थिक विरोध' के रूप में पेश कर रही है, लेकिन 38 मांगों से पीओजेके की संप्रभुता तक की छलांग बताती है कि यह राजनीतिक रूपांतरण की दहलीज़ पर है। इस्लामाबाद के लिए असली खतरा यह है कि यदि वह बातचीत की बजाय दमन का रास्ता चुनता है, तो यह आंदोलन उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक कठघरे में खड़ा कर सकता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओजेके में चल रहा जनआंदोलन क्या है?
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में एक जनआंदोलन चल रहा है, जो 2 जुलाई तक लगातार 24 दिनों से जारी था। यह आंदोलन शुरुआत में आर्थिक और प्रशासनिक मांगों को लेकर था, लेकिन अब राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है।
जेएएसी नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी सेना पर क्या आरोप लगाए?
जेएएसी नेता सरदार अमन खान ने रावलाकोट की सभा में कथित तौर पर आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने खुद कश्मीरियों को हथियार दिए थे, और अब उन्हीं लोगों को आतंकवादी कहा जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान प्रशासन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित संगठनों के बीच कथित संबंधों का भी आरोप लगाया।
जैश-ए-मोहम्मद पर पीओजेके में क्या आरोप लगे हैं?
अमन खान ने दावा किया कि 5 फरवरी 2025 को रावलाकोट में प्रशासन ने प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद को कार्यक्रम की अनुमति दी और सुरक्षा भी मुहैया कराई। उनके अनुसार उस दौरान जैश के हथियारबंद लोग एके-47 और तलवारों के साथ शहर में खुलेआम मार्च कर रहे थे। ये आरोप कथित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जेएएसी की 38 मांगें क्या हैं और आगे क्या होगा?
जेएएसी ने पाकिस्तान सरकार के सामने 38 मांगें रखी हैं, जिनमें आर्थिक, प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे शामिल बताए जाते हैं। यदि सरकार इन्हें नहीं मानती, तो नेताओं ने मुजफ्फराबाद की ओर मार्च की चेतावनी दी है और कहा है कि तब आंदोलन पीओजेके को पाकिस्तान से खाली कराने की मांग तक पहुंच सकता है।
यह आंदोलन भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
पीओजेके पर भारत अपना दावा करता है और इसे पाकिस्तान के अवैध कब्जे में मानता है। पीओजेके के भीतर से पाकिस्तानी सेना के खिलाफ इस तरह के सार्वजनिक और संगठित विरोध ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है। यह आंदोलन पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक स्थिरता और उसके कश्मीर नीति के कथित दोहरे मानदंडों पर सवाल खड़े करता है।
राष्ट्र प्रेस
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