पीओजेके में पाकिस्तानी सेना पर बड़ा आरोप: 'हमें हथियार देकर आज आतंकी कह रहे हैं' — 80 हजार की सभा में विद्रोह
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जनआंदोलन के 24वें दिन रावलाकोट के ईदगाह मैदान में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें करीब 80 हजार लोग शामिल हुए। इस सभा में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी सेना पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जिन कश्मीरियों को आज आतंकवादी करार दिया जा रहा है, उन्हें हथियार देने का काम स्वयं पाकिस्तान की सेना ने किया था। यह आंदोलन अब केवल आर्थिक और प्रशासनिक मांगों से आगे बढ़कर राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
2 जुलाई को रावलाकोट के ईदगाह मैदान में हुई इस सभा में अमन खान ने कहा, 'पाकिस्तान सेना ने खुद कश्मीरियों को बंदूकें दी थीं, और आज वही हमें आतंकवादी कह रही है।' उनके इस बयान पर उपस्थित हजारों लोगों ने तालियों और नारों के साथ जोरदार समर्थन जताया। यह पीओजेके में जारी जनआंदोलन का सबसे बड़ा जमावड़ा बताया जा रहा है।
जैश-ए-मोहम्मद पर गंभीर आरोप
अमन खान ने दावा किया कि 5 फरवरी 2025 को रावलाकोट में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रशासन ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को खुली छूट दी थी। उनके अनुसार, प्रशासन ने न केवल कार्यक्रम की अनुमति दी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी मुहैया कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान जैश-ए-मोहम्मद के हथियारबंद लोग एके-47 राइफलों और तलवारों के साथ शहर में खुलेआम मार्च करते रहे। ये आरोप कथित हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पाकिस्तान सरकार को चेतावनी
जेएएसी नेतृत्व ने सभा के अंत में पाकिस्तान सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि आंदोलन की 38 मांगों को बातचीत के जरिए स्वीकार कर लागू किया जाए, अन्यथा हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करेंगे। नेताओं ने कहा कि यदि यह मार्च शुरू हुआ तो आंदोलन का एजेंडा 38 मांगों तक सीमित नहीं रहेगा — तब यह पाकिस्तान से पीओजेके खाली कराने की मांग की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
आंदोलन का बदलता स्वरूप
गौरतलब है कि यह आंदोलन लगातार 24 दिनों से जारी है और शुरुआत में मुख्यतः आर्थिक व प्रशासनिक मुद्दों पर केंद्रित था। रावलाकोट की विशाल सभा ने संकेत दिया है कि जनता का असंतोष अब संरचनागत राजनीतिक सवालों की तरफ मुड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
क्या होगा आगे
आंदोलनकारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि आंदोलन किस दिशा में जाएगा। यदि सरकार 38 मांगें नहीं मानती, तो मुजफ्फराबाद मार्च और उसके बाद पीओजेके की आजादी की मांग को लेकर आंदोलन और उग्र हो सकता है। पीओजेके की राजनीतिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।