पीओके में रोटी की लड़ाई बनी बगावत: जेएएसी आंदोलन ने पाक सरकार और सेना को किया बेनकाब
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 3 अगस्त 2026 तक जारी भीषण हिंसा और आगजनी ने इस्लामाबाद के दमनकारी रवैये को एक बार फिर उजागर कर दिया है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में स्थानीय नागरिकों की मौत की खबरें सामने आई हैं, और संचार नेटवर्क को बार-बार काटा गया है।
आंदोलन की जड़ें: रोज़मर्रा की शिकायतें
इस विद्रोह का केंद्र जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) है — व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और नागरिक समाज संगठनों का एक व्यापक गठबंधन। इसकी माँगें कश्मीर के भू-राजनीतिक विवाद से नहीं, बल्कि बिजली टैरिफ में बेतहाशा वृद्धि, खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों, सरकारी सुविधाओं की कमी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अभाव से जन्मी हैं। गौरतलब है कि यह आंदोलन मूलतः एक आर्थिक विरोध के रूप में शुरू हुआ था, जो प्रशासनिक दमन के चलते राजनीतिक बगावत में तब्दील हो गया।
मुख्य घटनाक्रम: हफ्तों से जारी टकराव
पीओके में बीते कई हफ्तों से प्रदर्शन, गिरफ्तारियाँ और पाबंदियों का सिलसिला जारी है। पाकिस्तानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी-डंडे बरसाए, बड़े पैमाने पर सैन्य बल का इस्तेमाल किया और बार-बार इंटरनेट व दूरसंचार सेवाएँ बाधित कीं। आलोचकों का कहना है कि इस्लामाबाद का बढ़ता दमनकारी रवैया वैध शिकायतों को 'सुरक्षा समस्या' के रूप में पेश कर राजनीतिक संवाद की हर संभावना को कुचल रहा है।
सीपीईसी और संसाधनों की राजनीति
यह इलाका इस्लामाबाद के ऊर्जा लक्ष्यों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। झेलम नदी के जलस्रोत ने पीओके को पाकिस्तान की बिजली आपूर्ति योजना का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। इसके अलावा, चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत हाइड्रो पावर परियोजनाओं ने इस क्षेत्र को बीजिंग और इस्लामाबाद की साझा इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वाकांक्षाओं से जोड़ दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, यही आर्थिक महत्व स्थानीय जनता की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना इस क्षेत्र के संसाधनों के दोहन को और तेज़ कर रहा है।
पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान लंबे समय से खुद को पीओके के राजनीतिक अधिकारों और आत्मनिर्णय का सबसे बड़ा पैरोकार बताता रहा है। लेकिन मौजूदा हिंसा और दमन ने इस दावे की पोल खोल दी है। यह स्थिति इस्लामाबाद के लिए कूटनीतिक रूप से विशेष रूप से असहज करने वाली है, क्योंकि यह उसी जनता का गुस्सा है जिसके 'हक' की वह दुहाई देता रहा है।
आगे की राह
मौजूदा अशांति एक गहरे विरोधाभास को उजागर करती है: इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश किसी क्षेत्र की आर्थिक और रणनीतिक अहमियत तो बढ़ा सकता है, लेकिन जब तक स्थानीय जनता को उस विकास में वास्तविक भागीदारी नहीं मिलती, तब तक वह असंतोष की आग को और भड़काता है। पीओके में जेएएसी के नेतृत्व में उठी यह आवाज़ संकेत दे रही है कि इस्लामाबाद के लिए केवल बल प्रयोग से इस संकट का हल निकालना संभव नहीं होगा।