17 अगस्त 2026
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सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग: प्रयागराज-अयोध्या में उमड़ा आस्था का सैलाब

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सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग: प्रयागराज-अयोध्या में उमड़ा आस्था का सैलाब

सारांश

सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ मेल इस बार 17 अगस्त को पड़ा — और प्रयागराज से अयोध्या तक आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। नागवासुकी मंदिर में भोर 4.30 बजे से 10,000 से अधिक भक्त, भारी बारिश भी रोक न सकी।

मुख्य बातें

17 अगस्त 2026 को सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग एक साथ पड़ा।
प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर भोर से ही कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
दारागंज स्थित नागवासुकी मंदिर में सुबह 4.30 बजे तक 10,000 से अधिक श्रद्धालु पहुँच चुके थे।
भारी बारिश के बावजूद भक्तों ने नाग देवता को दूध, जल और पुष्प अर्पित किए; कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजन हुआ।
अयोध्या के सिद्ध पीठ नागेश्वरनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया; सिद्धार्थनगर सहित दूरदराज से भक्त पहुँचे।

प्रयागराज और अयोध्या में 17 अगस्त 2026 को सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग एक साथ पड़ने से लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोषों के बीच कांवड़ियों और भक्तों ने गंगाजल भरकर शिवालयों में जलाभिषेक किया तथा नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना की। धार्मिक दृष्टि से यह संयोग अत्यंत दुर्लभ माना जाता है और इसीलिए इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से कहीं अधिक रही।

प्रयागराज में भक्तों का उत्साह

प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर भोर से ही कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होने लगी। गंगाजल भरकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए निकले भक्तों ने घाटों पर की गई प्रशासनिक व्यवस्था की सराहना की। कांवड़ियों ने बताया कि घाटों पर विशेष इंतजाम किए गए थे और सरकार द्वारा की गई व्यवस्था संतोषजनक रही।

नागवासुकी मंदिर में विशेष पूजन

नाग पंचमी के अवसर पर प्रयागराज के दारागंज स्थित प्रसिद्ध नागवासुकी मंदिर में भारी बारिश के बावजूद ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। भक्तों ने नाग देवता को दूध, जल और पुष्प अर्पित किए। कालसर्प दोष व ग्रह बाधाओं से मुक्ति के लिए विशेष पूजा-अर्चना भी की गई। एक श्रद्धालु ने बताया, 'आज नाग पंचमी है। सुबह 4.30 बजे से ही यहां कम से कम 10,000 श्रद्धालु जमा हो चुके हैं। पूरे प्रयागराज में नागवासुकी का सिर्फ एक ही मंदिर है।' एक महिला श्रद्धालु ने कहा, 'सावन का सोमवार है और साथ में आज नाग पंचमी भी है — हम इस प्राचीन मंदिर में दर्शन के लिए आए हैं।'

गंगा तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर नागों के राजा भगवान वासुकी का मुख्य निवास स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग को जो कष्ट हुए, उसके पश्चात उनका स्थान प्रयागराज में स्थापित हुआ। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन यहाँ दर्शन करने से कालसर्प दोष, सर्प दोष और अन्य ग्रह पीड़ाएँ शांत होती हैं।

अयोध्या में नागेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ी भीड़

अयोध्या में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के इस दुर्लभ संयोग पर सिद्ध पीठ नागेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। राम की नगरी भोले के जयकारों से गूंजती रही। सिद्धार्थनगर से आई एक महिला श्रद्धालु ने बताया, 'हम भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए यहाँ आए हैं। सुबह स्नान के बाद जलाभिषेक के लिए लाइन में लगे — भीड़ के बावजूद दर्शन और जलाभिषेक अच्छे से हो पाए।' एक अन्य भक्त ने सभी श्रद्धालुओं से अयोध्या आकर दर्शन करने की अपील की।

आम जनता और प्रशासन पर असर

भारी बारिश के बीच भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। दोनों शहरों में प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की, जिसकी श्रद्धालुओं ने सराहना की। यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह में वैसे भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है, और नाग पंचमी के संयोग ने इसे और अधिक विशेष बना दिया। आगे भी सावन के शेष सोमवारों पर इसी तरह की भीड़ की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और प्रयागराज तथा अयोध्या जैसे तीर्थ स्थलों पर इसका असर सीधे दिखा। गौरतलब है कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा होती है — और इस बार श्रद्धालुओं की प्रशासन के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्साहजनक है। हालाँकि, भारी बारिश के बीच इतनी बड़ी भीड़ के लिए दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचे और आपदा प्रबंधन की तैयारी पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन सोमवार और नाग पंचमी का संयोग इस बार क्यों खास है?
17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़े, जो धार्मिक दृष्टि से दुर्लभ संयोग माना जाता है। इससे दोनों पर्वों का पुण्य एक साथ मिलने की मान्यता के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से कहीं अधिक रही।
प्रयागराज का नागवासुकी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
गंगा तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर नागों के राजा भगवान वासुकी का मुख्य निवास स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी पर यहाँ दर्शन करने से कालसर्प दोष, सर्प दोष और अन्य ग्रह पीड़ाएँ शांत होती हैं।
17 अगस्त को नागवासुकी मंदिर में कितने श्रद्धालु पहुँचे?
एक श्रद्धालु के अनुसार सुबह 4.30 बजे तक ही मंदिर में कम से कम 10,000 श्रद्धालु जमा हो चुके थे। भारी बारिश के बावजूद ब्रह्म मुहूर्त से लंबी कतारें लगी रहीं।
अयोध्या में किस मंदिर में विशेष पूजन हुआ?
अयोध्या के सिद्ध पीठ नागेश्वरनाथ मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी पर श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। सिद्धार्थनगर सहित दूरदराज के क्षेत्रों से भक्त यहाँ पहुँचे।
नाग पंचमी पर कालसर्प दोष के लिए क्या विशेष पूजा होती है?
नाग पंचमी के दिन नागवासुकी जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में नाग देवता को दूध, जल और पुष्प अर्पित किए जाते हैं और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इससे कालसर्प दोष और ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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