10 अगस्त 2026
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सावन सोमवार पर काशी-अयोध्या-प्रयागराज में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवालय गूंजे 'हर हर महादेव' से

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सावन सोमवार पर काशी-अयोध्या-प्रयागराज में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवालय गूंजे 'हर हर महादेव' से

सारांश

सावन के सोमवार पर काशी, प्रयागराज और अयोध्या में भक्तों का महासैलाब उमड़ा। विश्वनाथ धाम में रात से ही कतारें लगीं, संगम तट पर स्नान के बाद जलाभिषेक हुआ और कांवड़ियों की टोलियाँ 'बोल बम' के उद्घोष के साथ गंतव्य की ओर बढ़ती रहीं।

मुख्य बातें

10 अगस्त को सावन के पावन सोमवार पर काशी, प्रयागराज और अयोध्या में लाखों श्रद्धालुओं ने शिव मंदिरों में जलाभिषेक किया।
बाबा विश्वनाथ धाम में रविवार रात से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था; शाम को गंगा आरती के समय घाट दीपों से जगमगाया।
प्रयागराज में संगम तट पर स्नान के बाद भक्तों ने मनकामेश्वर समेत प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक किया।
अयोध्या में सरयू स्नान के बाद नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक; राम भक्ति और शिव भक्ति का अनूठा संगम देखा गया।
प्रदेशभर में कांवड़ियों के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं ने विश्राम शिविर, जलपान और चिकित्सा शिविर लगाए।

सावन के पावन सोमवार पर 10 अगस्त को उत्तर प्रदेश के धर्मनगरी काशी, तीर्थराज प्रयागराज और पुण्यनगरी अयोध्या सहित समूचे प्रदेश में भोलेनाथ की भक्ति का महासैलाब उमड़ पड़ा। काशी विश्वनाथ धाम से लेकर गली-मोहल्लों के छोटे-बड़े शिवालयों तक 'हर हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से वातावरण शिवमय हो उठा। मंदिरों के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की अटूट कतारें लग गईं, जो देर शाम आरती तक अनवरत बनी रहीं।

काशी में भोर से उमड़ी भक्तों की भीड़

बाबा विश्वनाथ धाम के दर्शन के लिए रविवार रात से ही श्रद्धालु काशी पहुँचने लगे थे। सड़क से लेकर मंदिर परिसर तक हर कोई जलाभिषेक की धुन में मगन दिखा। कांवड़ियों ने गंगा में डुबकी लगाकर पवित्र जल भरा और कतारबद्ध होकर विश्वनाथ मंदिर की ओर प्रस्थान किया। मंदिर परिसर घंटे-घड़ियाल और डमरू की ध्वनि से गूँजता रहा।

सुरक्षा के व्यापक इंतजामों के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा को दूध, दही, शहद, बेलपत्र और भांग-धतूरे से जलाभिषेक किया। शाम को गंगा आरती के समय पूरा घाट क्षेत्र दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। स्थानीय व्यापारियों ने श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह प्याऊ और भंडारे की व्यवस्था कर सेवाभाव का परिचय दिया।

प्रयागराज में संगम तट से शिवालयों तक आस्था का प्रवाह

तीर्थराज प्रयागराज में मनकामेश्वर मंदिर समेत प्रमुख शिवालयों में भोर से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। संगम तट पर स्नान कर श्रद्धालुओं ने पवित्र जल कलशों में भरा और फिर आसपास के शिव मंदिरों की ओर रुख किया। गलियों में कांवड़ियों की टोलियाँ भगवा वस्त्र पहने, कंधे पर बाँस की कांवड़ लिए 'जय भोलेनाथ' के नारे लगाती नजर आईं।

मंदिरों के बाहर फूल-माला और बेलपत्र की दुकानों पर भी खासी रौनक रही। शाम ढलते ही मंदिरों में विशेष शृंगार और रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ। त्रेतायुगीन नागेश्वरनाथ मंदिर, क्षीरेश्वरनाथ, पंचमुखी महादेव और झारखंडेश्वरनाथ समेत शहर के प्रमुख शिवालयों में देर शाम तक 'हर हर महादेव' के जयकारे गूँजते रहे।

अयोध्या में राम भक्ति और शिव भक्ति का अनूठा संगम

पुण्यनगरी अयोध्या में रामलला के दरबार से हनुमानगढ़ी तक दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जुटी रही। 'जय श्रीराम' और 'बम-बम भोले' के उद्घोष से पूरा अवध क्षेत्र गूँज उठा। सरयू तट पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र जल लेकर नागेश्वरनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

मंदिरों में रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पण और भजन-कीर्तन का सिलसिला दिनभर चलता रहा। राम की पैड़ी क्षेत्र में भी भक्तों की चहल-पहल देखने लायक थी, जहाँ आस्था और श्रद्धा का संगम राम भक्ति और शिव भक्ति के रूप में एक साथ नजर आया।

कांवड़ यात्रा का उत्साह चरम पर

सावन के इस सोमवार पर प्रदेशभर के मार्गों पर कांवड़ यात्रा का उत्साह अपने चरम पर रहा। भगवा वस्त्र धारण किए कांवड़िए कंधों पर सजी-धजी कांवड़ लेकर पैदल, साइकिल और वाहनों से अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखे। रास्ते में जगह-जगह स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों के लिए विश्राम शिविर, जलपान और चिकित्सा शिविर लगाए।

डीजे की भक्ति धुनों पर झूमते कांवड़िए और 'बोल बम, बोल बम' के उद्घोष ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। कई स्थानों पर कांवड़ियों का पुष्प वर्षा से स्वागत भी किया गया। सावन के शेष सोमवारों पर भी इसी स्तर की भक्ति और श्रद्धा की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश में तीर्थ-पर्यटन की बढ़ती आर्थिक धुरी का भी प्रमाण है। विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और राम मंदिर के बाद इन तीनों शहरों में बुनियादी ढाँचे के विस्तार ने श्रद्धालुओं की संख्या को नए स्तर पर पहुँचाया है। हालाँकि, भारी भीड़ के बीच सुरक्षा और भगदड़ की रोकथाम के इंतजाम कितने पर्याप्त हैं, यह सवाल हर बड़े धार्मिक आयोजन पर उठता रहा है और इस बार भी प्रशासन की तैयारी की असली परीक्षा यही थी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन सोमवार पर काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन कब से शुरू हुए?
रविवार रात से ही श्रद्धालु काशी पहुँचने लगे थे और सोमवार भोर में मंदिर के कपाट खुलते ही दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग गईं, जो देर शाम गंगा आरती तक अनवरत बनी रहीं।
प्रयागराज में सावन सोमवार पर कौन-से प्रमुख मंदिरों में भीड़ उमड़ी?
प्रयागराज में मनकामेश्वर मंदिर समेत अन्य प्रमुख शिवालयों में भोर से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। संगम तट पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरकर आसपास के शिव मंदिरों में जलाभिषेक किया।
अयोध्या में सावन सोमवार पर किस मंदिर में जलाभिषेक हुआ?
अयोध्या में सरयू तट पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने त्रेतायुगीन नागेश्वरनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके अलावा रामलला दरबार और हनुमानगढ़ी में भी दर्शनार्थियों की भारी भीड़ रही।
कांवड़ियों के लिए रास्ते में क्या व्यवस्थाएँ की गई थीं?
स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने प्रदेशभर में कांवड़ियों के लिए विश्राम शिविर, जलपान और चिकित्सा शिविर लगाए। कई स्थानों पर कांवड़ियों का पुष्प वर्षा से स्वागत भी किया गया।
सावन में जलाभिषेक में क्या-क्या अर्पित किया जाता है?
सावन सोमवार पर श्रद्धालु भगवान शिव को दूध, दही, शहद, बेलपत्र और भांग-धतूरे से जलाभिषेक करते हैं। इसके साथ रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पण और भजन-कीर्तन का आयोजन भी होता है।
राष्ट्र प्रेस
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