सावन 2025 का पहला दिन: अयोध्या के नागेश्वरनाथ और काशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
सारांश
मुख्य बातें
पवित्र सावन माह के प्रथम दिन उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिवालयों में आस्था का अपूर्व दृश्य देखने को मिला। अयोध्या स्थित प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में तड़के भोर से ही देशभर से आए शिवभक्तों की अटूट कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की, जबकि मंदिर परिसरों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
नागेश्वरनाथ मंदिर में भक्तों का उत्साह
अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर में सावन के पहले दिन असाधारण भीड़ उमड़ी। दिल्ली से पहुंचे श्रद्धालु सुनील पांडे ने बताया कि उन्होंने पहले सरयू नदी में स्नान किया और फिर शिवलिंग पर जल अर्पित किया। उन्होंने कहा कि वे अक्सर अयोध्या आते हैं और उनका दृढ़ विश्वास है कि भोलेनाथ सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा का फल अवश्य देते हैं।
एक अन्य श्रद्धालु गणेश गोस्वामी ने कहा कि सावन के पहले दिन बाबा नागेश्वरनाथ के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व है और इस मंदिर की ख्याति देश ही नहीं, विश्वभर में फैली हुई है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में हर दिशा से आए भक्त उत्साह से भरे दिखाई दे रहे थे।
मंदिर पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि सावन के पहले सोमवार के कारण भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक थी। उन्होंने कहा कि नागेश्वरनाथ मंदिर में वैसे भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में दर्शनार्थी आते हैं, लेकिन सावन में यहाँ का उत्साह अलग ही स्तर पर होता है।
काशी विश्वनाथ में देशभर से पहुंचे भक्त
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सावन के पहले दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। पंजाब के अमृतसर से पहली बार काशी पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि उन्हें एक सप्ताह पहले ही बाबा के दर्शन की प्रेरणा हुई और यहाँ आकर उन्हें अत्यंत आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने सभी देशवासियों को सावन माह की शुभकामनाएं दीं।
इसी मंदिर में एक अन्य भक्त ने कहा कि सावन भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना माना जाता है और आज से पूरे माह धार्मिक उत्सव का सिलसिला चलेगा। उन्होंने कहा कि यह तो बस शुरुआत है — आने वाले सोमवारों पर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी।
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा
दोनों मंदिरों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए। अमृतसर से आए श्रद्धालु सहित कई भक्तों ने मंदिर परिसरों में की गई व्यवस्थाओं की सराहना की और कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा का समुचित ध्यान रखा गया है।
सावन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के शिव मंदिरों में कांवड़ यात्रा का उत्साह भी चरम पर है। गौरतलब है कि अयोध्या और काशी — दोनों ही नगर इस वर्ष धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विशेष महत्व रखते हैं। आने वाले सोमवारों पर श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।