24 अगस्त 2026
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सावन के अंतिम सोमवार पर शिव मंदिरों में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जलाभिषेक से गूंजे मंदिर

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सावन के अंतिम सोमवार पर शिव मंदिरों में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जलाभिषेक से गूंजे मंदिर

सारांश

सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर 24 अगस्त को दिल्ली के गौरीशंकर मंदिर से लेकर हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव तक — देशभर के शिव मंदिरों में लाखों भक्तों ने जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। आस्था का यह जनसैलाब सावन माह की भव्य विदाई का प्रतीक बना।

मुख्य बातें

24 अगस्त को सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु उमड़े।
दिल्ली के गौरीशंकर मंदिर (चांदनी चौक) और मंगोलपुरी के शिव मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन किए।
अयोध्या में बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर के पास सरयू स्नान के बाद पूजा; शहर को पाँच सुरक्षा जोन में बाँटा गया।
प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में महंत धरानंद महाराज ने बताया कि यह स्थल पुराणों में कामेश्वर पीठ के रूप में उल्लिखित है।
हरिद्वार , जयपुर , अहमदाबाद , मुरादाबाद और प्रतापगढ़ में भी जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अनुसार, जो भक्त पूरे सावन पूजा नहीं कर पाए, वे अंतिम सोमवार को गंगाजल और बेलपत्र से जलाभिषेक कर सकते हैं।

देशभर के शिव मंदिरों में 24 अगस्त को सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। नई दिल्ली से लेकर हरिद्वार, अयोध्या, प्रयागराज, जयपुर और अहमदाबाद तक — लाखों भक्तों ने भगवान भोलेनाथ को गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। सावन का यह अंतिम सोमवार हिंदू परंपरा में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है।

दिल्ली के मंदिरों में आस्था का जनसैलाब

चांदनी चौक स्थित गौरीशंकर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर पहुंची एक महिला भक्त ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं पहली बार गौरी शंकर मंदिर आई हूं — यहां का अनुभव बहुत अच्छा है और मुझे बहुत शांति महसूस हो रही है।' इसके अलावा मंगोलपुरी बी-ब्लॉक मंदिर में भी बड़ी संख्या में भक्तों ने पूजा-अर्चना की।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धा का उत्साह

अयोध्या में शिव भक्तों ने बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर में दर्शन और पूजा से पहले सरयू नदी में पवित्र स्नान किया। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि पूरी अयोध्या को पाँच सुरक्षा जोन में विभाजित किया गया और व्यापक प्रबंध किए गए।

बांदा के बंबेश्वर महादेव मंदिर में महिला और पुरुष दोनों श्रद्धालु बड़ी संख्या में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। मान्यता है कि इस स्थान पर महर्षि बामदेव ने भगवान शंकर की घोर तपस्या की थी। सीतापुर के बाबा श्यामनाथ मंदिर में कांवड़ियों और शिव भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और पीएसी को अलर्ट पर रखा गया।

प्रतापगढ़ के बाबा बेलखरनाथ धाम और ग्रेटर नोएडा के बिसरख स्थित रावण मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मुरादाबाद के प्रसिद्ध 84 घंटा मंदिर में भक्तों ने गंगाजल से जलाभिषेक किया। एक भक्त ने बताया, 'ब्रजघाट से मुरादाबाद तक का पूरा रास्ता कांवड़ियों और भक्तों से भरा हुआ है।'

प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता

प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में हज़ारों भक्तों ने कतार में लगकर भगवान शिव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाया। मंदिर के महंत धरानंद महाराज ने बताया, 'मनकामेश्वर मंदिर एक प्राचीन तीर्थ स्थल है, जिसका उल्लेख पुराणों में कामेश्वर पीठ के रूप में मिलता है। मान्यता है कि जब भगवान राम संगम क्षेत्र में आए थे, तो उन्होंने माता सीता के साथ यहाँ जलाभिषेक किया था और अपनी यात्रा की सफलता के लिए प्रार्थना की थी।'

राजस्थान, गुजरात और उत्तराखंड में भी उत्साह

जयपुर के तड़केश्वर मंदिर सहित अन्य शिव मंदिरों में सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ी और जलाभिषेक का क्रम जारी रहा। अहमदाबाद के सरदारनगर स्थित शिव मंदिर में भक्तों ने रुद्राभिषेक किया। एक भक्त ने बताया, 'मैं पिछले तीन महीनों से यहां आ रहा हूं और लगभग हर सोमवार भस्म आरती में शामिल होता हूं।'

हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगीं। एक भक्त ने कहा, 'आज सावन का आखिरी सोमवार है — माना जाता है कि यह भगवान शिव का ससुराल है।'

धार्मिक महत्व और विशेषज्ञ की राय

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के रवींद्र ने बताया, 'भगवान शिव के लिए सोमवार का दिन बहुत खास माना जाता है क्योंकि 'सोम' का अर्थ चंद्रमा है और माना जाता है कि भगवान शिव ने इसे अपने सिर पर धारण किया है। जो भक्त सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाए, वे आखिरी सोमवार को गंगाजल से जलाभिषेक कर सकते हैं और बेलपत्र चढ़ा सकते हैं।' सावन के समापन के साथ ही देशभर में भाद्रपद माह की तैयारियाँ शुरू हो जाएंगी और गणेश उत्सव की उलटी गिनती आरंभ होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका असर सावन जैसे पर्वों पर भी स्पष्ट दिखता है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम यह भी दर्शाते हैं कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़-प्रबंधन अब एक स्थायी चुनौती बन चुका है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन का आखिरी सोमवार 2025 में कब है?
सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2025 को पड़ा। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की।
सावन के सोमवार को शिव पूजा का क्या महत्व है?
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अनुसार, 'सोम' का अर्थ चंद्रमा है और भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है, इसलिए सोमवार शिव पूजा के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। सावन माह में यह महत्व और भी बढ़ जाता है।
प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
महंत धरानंद महाराज के अनुसार, मनकामेश्वर मंदिर का उल्लेख पुराणों में कामेश्वर पीठ के रूप में मिलता है। मान्यता है कि भगवान राम ने माता सीता के साथ यहाँ जलाभिषेक किया था।
जो लोग पूरे सावन शिव पूजा नहीं कर पाए, वे क्या करें?
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अनुसार, जो भक्त सावन के दौरान नियमित पूजा नहीं कर पाए, वे सावन के अंतिम सोमवार को गंगाजल से जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पण कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
अयोध्या में सावन के अंतिम सोमवार पर क्या सुरक्षा व्यवस्था की गई?
एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी के अनुसार, अयोध्या को पाँच सुरक्षा जोन में विभाजित किया गया और व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए। बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर के पास सरयू नदी में स्नान के बाद दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
राष्ट्र प्रेस
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