सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर शिव मंदिरों में लाखों भक्तों की भीड़
सारांश
मुख्य बातें
17 अगस्त 2026 को सावन माह के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोग ने देशभर के शिव मंदिरों को आस्था के महासागर में बदल दिया। भोर से ही लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए मंदिर परिसरों में उमड़ पड़े। यह संयोग धार्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि सावन सोमवार भगवान शिव को और नाग पंचमी नाग देवता को समर्पित है।
दिल्ली में गौरी शंकर मंदिर पर उमड़ी श्रद्धा
नई दिल्ली के चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक गौरी शंकर मंदिर में सुबह से ही भक्तों की अटूट कतारें देखी गईं। मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गुंजायमान रहा। एक महिला श्रद्धालु ने बताया, 'दर्शन करके मुझे बहुत अच्छा लगा। यह बहुत प्राचीन मंदिर है।' एक अन्य महिला भक्त ने कहा, '30 साल से भोलेनाथ की कृपा है। हम इन्हीं के शरण में हैं। सावन के सोमवार को हम दर्शन करने आते ही हैं। आज नाग पंचमी होने की वजह से इसका विशेष महत्व है।'
उत्तर प्रदेश में दूधेश्वर नाथ मंदिर में विशेष इंतज़ाम
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर नाथ मंदिर में भी भारी संख्या में शिव भक्त पहुँचे। सुबह के पहले पहर से ही श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना में जुट गए। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुगम दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की थी।
महाराष्ट्र के शिवालयों में रात से ही लगी कतारें
महाराष्ट्र के वसई की पहाड़ी पर स्थित तुंगारेश्वर महादेव मंदिर में भक्त रविवार रात से ही पंक्तिबद्ध हो गए थे। सोमवार सुबह कपाट खुलते ही 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के बीच जलाभिषेक का क्रम शुरू हुआ। वहीं, नासिक के प्रतिष्ठित ज्योतिर्लिंग त्र्यंबकेश्वर मंदिर में नाग पंचमी के उपलक्ष्य में रुद्राभिषेक के साथ-साथ नाग देवता की विशेष पूजा भी संपन्न हुई।
धार्मिक महत्व और आम जनता पर असर
गौरतलब है कि सावन माह में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की आराधना का विशेष फल माना जाता है। नाग पंचमी का इसी दिन पड़ना इस पर्व को और अधिक पवित्र बनाता है। इस संयोग के चलते इस वर्ष मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य सोमवार की तुलना में कई गुना अधिक रही। देशभर में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से चाक-चौबंद की गई थी।
आगे क्या
सावन माह का चौथा और अंतिम सोमवार शीघ्र ही आने वाला है, जिसके लिए मंदिर प्रशासन अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। धार्मिक आयोजनों की यह श्रृंखला सावन की समाप्ति तक जारी रहेगी।