सावन के दूसरे सोमवार पर दिल्ली-जयपुर के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें
सारांश
मुख्य बातें
सावन के दूसरे सोमवार पर 10 अगस्त को दिल्ली से जयपुर तक शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। तड़के 4 बजे से ही मंदिरों के द्वार पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और हर-हर महादेव तथा बम-बम भोले के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भगवान शिव के प्रति आम जन की गहरी आस्था का यह दृश्य दिनभर बना रहा।
दिल्ली के शिवालयों में भोर से भक्तों का आगमन
तुगलकाबाद गाँव स्थित प्राचीन शिव मंदिर में तड़के करीब 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुँचना शुरू हो गया। बड़ी संख्या में भक्त हाथों में पूजा की थाली और गंगाजल लेकर मंदिर पहुँचे तथा भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। महिलाएँ, पुरुष और बच्चे — सभी वर्गों के श्रद्धालु इस अवसर पर एकत्र हुए।
पांडव-कालीन मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता
मंदिर के पुजारी ने बताया, 'यह पांडव-काल का प्राचीन शिव मंदिर है। इसकी खासियत यह है कि अर्जुन ने यहाँ बैठकर तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शंकर प्रकट हुए और अर्जुन को एक धनुष दिया।' यह ऐतिहासिक आस्था इस मंदिर को विशेष धार्मिक महत्त्व प्रदान करती है और सावन में यहाँ श्रद्धालुओं का विशेष जमावड़ा रहता है।
जयपुर में भी शिवालयों में उत्साह का माहौल
जयपुर में भी सावन के दूसरे सोमवार को शहर के विभिन्न शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर उन्हें बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। कई मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया।
व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए। मंदिरों के बाहर प्रसाद और पूजन सामग्री की दुकानें सजी रहीं। कई भक्तों ने सावन सोमवार का व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
आस्था का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा
गौरतलब है कि सावन माह को भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है और प्रत्येक सोमवार को शिवालयों में इसी प्रकार भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस वर्ष भी सावन के शेष सोमवारों पर दिल्ली और जयपुर के प्रमुख शिव मंदिरों में आस्था का यह उत्साह जारी रहने की उम्मीद है।