श्रावण की पहली सोमवारी: बिहार के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ क्यों बढ़ रही है?

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श्रावण की पहली सोमवारी: बिहार के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ क्यों बढ़ रही है?

सारांश

श्रावण मास की पहली सोमवारी पर बिहार के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भरपूर भीड़ उमड़ पड़ी है। भक्त धूप-दीप और मंत्रों के साथ भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं। आइए जानते हैं इस धार्मिक अवसर पर कैसे भक्तों ने मंदिरों को भर दिया है।

मुख्य बातें

श्रावण मास की पहली सोमवारी पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु गंगा का जल लेकर आते हैं।
शिवालयों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं।
भगवान शिव की पूजा में श्रद्धालुओं का उत्साह अद्वितीय होता है।
धार्मिक परंपराओं का समाज में गहरा प्रभाव है।

पटना, 14 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। श्रावण मास की पहली सोमवारी पर बिहार के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। सभी शिवालयों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। श्रद्धालु धूप-दीप और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान शिव की पूजा में लीन हैं। सुबह से ही मंदिरों में 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' की गूंज भक्तों को ऊर्जा प्रदान कर रही है।

भागलपुर के सुल्तानगंज में अजगैबीनाथ, मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ और सोनपुर के हरिहरनाथ में सुबह से भक्तों की भीड़ देखी गई। अजगैबीनाथ में श्रद्धालुओं ने पहले गंगा स्नान किया और फिर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा के लिए निकल पड़े। यहां पर लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालु उपस्थित हैं।

यहां उल्लेखनीय है कि सुल्तानगंज से कांवड़िए उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाकर झारखंड के देवघर पहुंचते हैं और वहां बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में भी भक्तों की भीड़ बढ़ रही है। सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी है। मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ धाम, जिसे उत्तर बिहार का 'बाबा धाम' कहा जाता है, में प्रशासनिक सुरक्षा के बीच भक्त जलाभिषेक कर रहे हैं।

मंदिर के पुजारी महंत अभिषेक पाठक ने बताया कि पहली सोमवारी पर अब तक लगभग एक लाख श्रद्धालु भगवान गरीबनाथ पर जलाभिषेक कर चुके हैं और लोगों का आना अभी भी जारी है।

गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए शिव भक्त वैशाली के पहलेजा घाट से जल उठाकर लगभग 40 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा गरीबनाथ धाम पहुंचते हैं। प्रशासन ने अधिक भीड़ होने के कारण जलाभिषेक के लिए अरघा के माध्यम से व्यवस्था की है। कांवड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन ने तैयारी की है।

रोहतास के गुप्ता धाम में भी बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं और भगवान भोले की पूजा कर रहे हैं। इधर, पटना के सभी शिवालयों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। श्रावण महीने की वजह से शिवालयों के पास कई अस्थाई दुकानें भी खुल गई हैं। पहली सोमवारी की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात हैं और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। सोमवार को शिवालयों और आसपास के इलाकों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह दर्शाता है कि हमारे समाज में धार्मिक परंपराओं का कितना महत्व है। इस दिन भक्तों की संख्या बढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि लोग अपनी आस्था को व्यक्त करने के लिए कितने उत्सुक हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावण मास की पहली सोमवारी का महत्व क्या है?
श्रावण मास की पहली सोमवारी भगवान शिव की पूजा का विशेष दिन है, जब भक्त शिवालयों में जाकर जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा क्या होती है?
कांवड़ यात्रा में भक्त गंगा से जल लेकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए यात्रा करते हैं।
बाबा गरीबनाथ धाम कहाँ स्थित है?
बाबा गरीबनाथ धाम मुजफ्फरपुर में स्थित है और यह उत्तर बिहार का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
पहली सोमवारी पर कितने श्रद्धालु आते हैं?
पहली सोमवारी पर लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालु शिव मंदिरों में आते हैं।
सुरक्षा के क्या इंतजाम किए जाते हैं?
सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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