क्या म्यांमार से तस्करी किए गए पॉपी सीड्स और सुपारी की 1 करोड़ की खेप बरामद हुई?

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क्या म्यांमार से तस्करी किए गए पॉपी सीड्स और सुपारी की 1 करोड़ की खेप बरामद हुई?

सारांश

मिजोरम में असम राइफल्स ने 1 करोड़ रुपये मूल्य के अफीम के बीज और सुपारी की बड़ी खेप जब्त की है। यह कार्रवाई अवैध व्यापार के खिलाफ उनकी निरंतर लड़ाई का हिस्सा है। जानिए इस तस्करी के पीछे क्या कारण हैं और इसके स्थानीय किसानों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

मुख्य बातें

असम राइफल्स ने 1 करोड़ रुपये मूल्य की सामग्री जब्त की।
तस्करी म्यांमार से हो रही है।
स्थानीय किसानों को नुकसान हो रहा है।
असम राइफल्स की शून्य-सहिष्णुता नीति महत्वपूर्ण है।
यह कार्रवाई क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है।

आइजोल, 20 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। असम राइफल्स ने मिजोरम में 1 करोड़ रुपये मूल्य के 90 बैग अफीम के बीज और 120 बैग सुपारी जब्त की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि विशेष खुफिया सूचना के आधार पर असम राइफल्स ने मिजोरम के सीमावर्ती चम्फाई जिले के रुआंतलांग के फरलुई रोड इलाके में तलाशी अभियान चलाया और प्रतिबंधित सामान बरामद किया।

बयान में कहा गया है कि यह महत्वपूर्ण बरामदगी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के प्रति असम राइफल्स के शून्य-सहिष्णुता दृष्टिकोण और कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए इसकी निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

जब्त माल को संबंधित कानूनों के तहत आगे की जांच और अभियोजन के लिए सीमा शुल्क निवारक बल, चम्फाई को सौंप दिया गया है।

बयान में कहा गया कि यह अभियान पूर्वोत्तर क्षेत्र की सीमाओं की सुरक्षा और क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले अवैध व्यापार को रोकने के लिए असम राइफल्स के निरंतर समर्पण को दर्शाता है।

म्यांमार से अफीम के बीज (पॉपी सीड्स) और सुपारी (अरेका नट्स) की तस्करी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में हो रही है।

मणिपुर और असम में सुरक्षाबल अक्सर अवैध अफीम की खेती को नष्ट करते हैं, जो सरकार की 'ड्रग्स के खिलाफ जंग' का हिस्सा है। एक एकड़ अफीम की खेती से 3-4 किलो अफीम बनती है, जिसकी काला बाजार में कीमत 4-5 लाख रुपये प्रति किलो है।

म्यांमार से सुपारी की तस्करी से असम और त्रिपुरा के स्थानीय किसानों को नुकसान हो रहा है, क्योंकि उन्हें अपनी फसल सस्ते दामों पर बेचनी पड़ती है। इसके खिलाफ किसानों ने हाल ही में प्रदर्शन भी किए हैं।

मणिपुर सरकार का कहना है कि मई 2023 से शुरू हुए जातीय संघर्ष के पीछे म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों का हाथ है, जो वहां बसकर अफीम की अवैध खेती कर रहे हैं।

म्यांमार का 1,643 किमी खुला बॉर्डर अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड और मिजोरम से लगता है। मिजोरम के छह जिले (चम्फाई, सियाहा, लॉन्गतलाई, ह्नाहथियाल, सैतुअल, और सेरछिप) म्यांमार के चिन राज्य से 510 किमी की सीमा साझा करते हैं, जो ड्रग्स (हीरोइन, मेथमफेटामाइन), विदेशी जानवरों और अन्य तस्करी का केंद्र है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित करती है। हमें इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम राइफल्स ने क्यों कार्रवाई की?
असम राइफल्स ने मिजोरम में अवैध तस्करी को रोकने के लिए कार्रवाई की है।
जब्त की गई सामग्री की कीमत कितनी है?
जब्त की गई सामग्री की कीमत 1 करोड़ रुपये है।
यह तस्करी किस क्षेत्र से हो रही है?
यह तस्करी म्यांमार से हो रही है।
स्थानीय किसानों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है?
स्थानीय किसानों को सुपारी की तस्करी के कारण नुकसान हो रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल सस्ते दामों पर बेचना पड़ रहा है।
मणिपुर सरकार का क्या कहना है?
मणिपुर सरकार का कहना है कि म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों का हाथ जातीय संघर्ष के पीछे है।
राष्ट्र प्रेस