सावन 2025: 23 साल बाद 17 अगस्त को सोमवती नागपंचमी का महासंयोग, गंगाजल अभिषेक से मिलेगा विशेष पुण्य
सारांश
मुख्य बातें
इस वर्ष सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से आरंभ होकर 28 अगस्त 2025 तक चलेगा। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, और ज्योतिषीय दृष्टि से इनमें से प्रत्येक पर कोई न कोई विशेष योग बन रहा है। सर्वाधिक चर्चा तीसरे सोमवार — 17 अगस्त की है, जब 23 वर्षों के अंतराल के बाद सावन सोमवार और नागपंचमी एक ही तिथि पर आ रहे हैं, जिसे 'सोमवती नागपंचमी' का महासंयोग कहा जा रहा है।
पहला सोमवार — 3 अगस्त: सुकर्मा और सर्वार्थ सिद्धि योग
सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। इस दिन सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। देशभर के शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुँच रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आर्थिक कठिनाइयों, ऋण अथवा धन-संबंधी बाधाओं से मुक्ति के लिए इस दिन शिव का विशेष जलाभिषेक करना लाभकारी माना जाता है।
दूसरा सोमवार — 10 अगस्त: प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग
10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार है। इस दिन सोमवारी व्रत के साथ-साथ त्रयोदशी तिथि और प्रदोष व्रत का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस त्रिसंयोग पर भगवान शिव की आराधना का फल दोगुना होता है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित करने के साथ जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
तीसरा सोमवार — 17 अगस्त: 23 वर्ष बाद सोमवती नागपंचमी का महासंयोग
सावन 2025 का सबसे विशेष दिन 17 अगस्त है। 23 वर्षों के बाद सावन का सोमवार और नागपंचमी एक ही दिन पड़ रहे हैं — इस संयोग को 'सोमवती नागपंचमी' कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास का भी अद्भुत संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार शिवलिंग पर चंदन, बेलपत्र और दूध में गंगाजल मिलाकर अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यह दिन पूरे सावन महीने का सर्वाधिक शुभ माना जा रहा है।
चौथा सोमवार — 24 अगस्त: सर्वार्थ सिद्धि के साथ सावन की विदाई
सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को है। इस दिन भी सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग रहेगा। मान्यता है कि शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करने के पश्चात नारियल, काले तिल, बेलपत्र, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाकर भगवान शिव की आरती करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह सावन 2025 का समापन सोमवार होगा, जो 28 अगस्त को माह की पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्त्व
गौरतलब है कि 'सोमवती नागपंचमी' जैसे दुर्लभ संयोग दशकों में एक बार आते हैं। 17 अगस्त का यह महासंयोग न केवल शिवभक्तों के लिए, बल्कि नागदेवता की उपासना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्त्व रखता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन नाग-पूजन और शिवाभिषेक का एकसाथ संयोग अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।