13 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

योगी सरकार के राजस्व न्यायालयों में 10 लाख से अधिक वादों का निस्तारण, जनवरी-जुलाई 2026 में रिकॉर्ड गति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
योगी सरकार के राजस्व न्यायालयों में 10 लाख से अधिक वादों का निस्तारण, जनवरी-जुलाई 2026 में रिकॉर्ड गति

सारांश

योगी सरकार ने जनवरी-जुलाई 2026 में राजस्व न्यायालयों में 10 लाख से अधिक वाद निपटाए। धारा-34 के तहत अकेले जून में 2.21 लाख मामले सुलझे, जबकि धारा-80 में 5 साल पुराने लंबित वाद शून्य हो गए — यह संख्या प्रशासनिक इच्छाशक्ति और तकनीकी निगरानी का मिला-जुला असर है।

मुख्य बातें

जनवरी-जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में 10 लाख से अधिक वादों का निस्तारण किया गया।
धारा-34 (नामांतरण/दाखिल-खारिज) में 14,70,133 नए वाद आए और 10,96,814 वादों का निपटारा हुआ।
15 से 25 जून 2026 के विशेष अभियान में अकेले 2,21,667 नामांतरण वाद निपटाए गए।
धारा-80 (भू-उपयोग परिवर्तन) में पाँच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य हो गई।
धारा-24 में 5 वर्ष से अधिक पुराने मामले घटकर केवल 24 रह गए; सर्वाधिक लंबित वाद प्रयागराज और प्रतापगढ़ में हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जनवरी से जुलाई 2026 के बीच राजस्व न्यायालयों में 10 लाख से अधिक लंबित वादों का निस्तारण कर एक उल्लेखनीय प्रशासनिक उपलब्धि दर्ज की है। शासन स्तर पर नियमित निगरानी, विशेष अभियानों और तकनीक-आधारित मॉनिटरिंग के संयुक्त प्रभाव से यह गति संभव हुई है।

धारा-24: सीमांकन एवं पैमाइश के वाद

31 दिसंबर 2025 तक धारा-24 (सीमांकन/पैमाइश) के अंतर्गत 28,556 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच 91,472 नए वाद दर्ज हुए, जिनमें से 39,645 वादों का निस्तारण किया गया। वर्तमान में 80,383 वाद लंबित हैं, जबकि पाँच वर्ष से अधिक पुराने मामलों की संख्या घटकर मात्र 24 रह गई है।

आँकड़ों के अनुसार, इस श्रेणी में सर्वाधिक विचाराधीन वाद प्रयागराज, प्रतापगढ़, लखनऊ, अमेठी और मथुरा जिलों में हैं।

धारा-34: नामांतरण एवं दाखिल-खारिज में बड़ी सफलता

नामांतरण/दाखिल-खारिज से जुड़े धारा-34 के मामलों में सबसे बड़ी उपलब्धि सामने आई है। 31 दिसंबर 2025 तक 48,910 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के दौरान 14,70,133 नए वाद आए, जिनमें से 10,96,814 वादों का निस्तारण किया गया।

गौरतलब है कि 15 से 25 जून 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान में अकेले 2,21,667 वादों का निस्तारण हुआ — यह अभियान विशेष रूप से 45 दिन से अधिक समय से लंबित नामांतरण मामलों के त्वरित समाधान के लिए शुरू किया गया था।

धारा-80: भू-उपयोग परिवर्तन में शून्य पुराने वाद

भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित धारा-80 के अंतर्गत 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक 28,797 नए वाद दर्ज हुए, जबकि 49,855 वादों का निस्तारण किया गया — अर्थात नए वादों से अधिक पुराने मामले निपटाए गए। उल्लेखनीय यह है कि इस श्रेणी में पाँच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य दर्ज की गई है।

सरकार की रणनीति और लक्ष्य

योगी सरकार की इस मुहिम के पीछे तीन प्रमुख स्तंभ हैं — नियमित समीक्षा बैठकें, लक्षित विशेष अभियान और डिजिटल निगरानी तंत्र। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्व संबंधी विवाद ग्रामीण उत्तर प्रदेश में भूमि अधिकारों की सबसे बड़ी अड़चन रहे हैं।

सरकार का घोषित लक्ष्य लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण, आमजन को पारदर्शी न्याय और राजस्व प्रशासन में सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करना है। आगे की राह में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या यह गति नए वादों के निरंतर आगमन के बावजूद बनाए रखी जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें संदर्भ में देखना ज़रूरी है — धारा-34 में जुलाई तक भी 3.73 लाख से अधिक वाद लंबित बचे हैं, जो बताता है कि नए मामलों का प्रवाह निस्तारण की गति से तेज़ है। विशेष अभियान तात्कालिक राहत देते हैं, पर स्थायी समाधान के लिए राजस्व न्यायालयों में पर्याप्त जनशक्ति और डिजिटलीकरण की दीर्घकालिक योजना अनिवार्य है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि प्रयागराज और प्रतापगढ़ जैसे जिले लगातार शीर्ष पर बने हुए हैं — यह संरचनात्मक समस्या की ओर संकेत करता है जिसे केवल अभियानों से नहीं सुलझाया जा सकता।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार ने 2026 में कितने राजस्व वादों का निस्तारण किया?
जनवरी से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में धारा-34 के तहत अकेले 10,96,814 वादों सहित कुल 10 लाख से अधिक वादों का निस्तारण किया गया। इसमें धारा-24 के 39,645 और धारा-80 के 49,855 वाद भी शामिल हैं।
जून 2026 के विशेष अभियान में क्या हुआ?
15 से 25 जून 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान में 45 दिन से अधिक समय से लंबित नामांतरण वादों पर ध्यान केंद्रित किया गया और केवल 10 दिनों में 2,21,667 वादों का निस्तारण किया गया। यह अभियान धारा-34 के बड़े बैकलॉग को कम करने के लिए शुरू किया गया था।
UP में सबसे अधिक राजस्व वाद किन जिलों में लंबित हैं?
धारा-24 (सीमांकन/पैमाइश) के अंतर्गत सर्वाधिक विचाराधीन वाद प्रयागराज, प्रतापगढ़, लखनऊ, अमेठी और मथुरा जिलों में दर्ज हैं। ये जिले लगातार शीर्ष पर बने हुए हैं, जो इन क्षेत्रों में भूमि विवादों की गहरी जड़ों को दर्शाता है।
धारा-80 के तहत भू-उपयोग परिवर्तन मामलों की स्थिति क्या है?
धारा-80 के तहत जनवरी-जुलाई 2026 में 28,797 नए वाद आए, जबकि 49,855 वादों का निस्तारण किया गया — यानी नए मामलों से 21,058 अधिक पुराने मामले निपटाए गए। इस श्रेणी में पाँच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य हो गई है।
राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
राजस्व वादों के शीघ्र निस्तारण से भूमि नामांतरण, सीमांकन और भू-उपयोग परिवर्तन जैसे मामलों में किसानों और भूमि-मालिकों को समयबद्ध न्याय मिलता है। इससे संपत्ति की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण और कृषि संबंधी कार्यों में आने वाली कानूनी अड़चनें कम होती हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले