UP राजस्व परिषद ने लॉन्च किए 3 डिजिटल पोर्टल, राजस्व वादों की ऑनलाइन ट्रैकिंग अब होगी आसान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड ने 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में तीन नए डिजिटल पोर्टल का शुभारंभ किया, जिनका उद्देश्य राज्य के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों का समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करना है। बोर्ड अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने इन पोर्टलों का उद्घाटन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजस्व न्यायालयों में पारदर्शिता और तय समय-सीमा में निस्तारण को लेकर विशेष रूप से गंभीर हैं।
कौन-से तीन पोर्टल लॉन्च हुए
बोर्ड ने तीन अलग-अलग डिजिटल प्रणालियाँ एक साथ शुरू कीं। पहला — ई-फाइलिंग पोर्टल, जिसके ज़रिए नए राजस्व वादों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकेगा। दूसरा — ऑनलाइन ट्रांसमिशन ऑफ लोअर कोर्ट रिकॉर्ड पोर्टल, जो निचली अदालतों के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से भेजने और ट्रैक करने की सुविधा देगा। तीसरा — धारा-34 नामांतरण पोर्टल का बीटा वर्जन, जो संपत्ति नामांतरण के मामलों की ऑनलाइन निगरानी और समयबद्ध निपटारे के लिए तैयार किया गया है।
ये तीनों पोर्टल आरसीसीएमएस (RCCMS) से लिंक किए जाएंगे, जिससे डेटा का एकीकृत प्रबंधन संभव होगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार
बोर्ड अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि ई-फाइलिंग और ऑनलाइन ट्रांसमिशन पोर्टल को शुरुआत में बोर्ड स्तर पर लागू किया जाएगा। इसके बाद इन्हें मंडल स्तर और फिर जिला स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। राजस्व वादों के पंजीकरण के लिए मैनुअल और ऑनलाइन — दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे, ताकि डिजिटल सुविधा से वंचित लोगों को कोई कठिनाई न हो।
धारा-34 पोर्टल: चार जिलों से होगी शुरुआत
बोर्ड की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि बोर्ड में सर्वाधिक मामले धारा-34 के तहत नामांतरण से संबंधित आते हैं। इसी को देखते हुए धारा-34 नामांतरण पोर्टल का बीटा वर्जन पहले चरण में श्रावस्ती, बांदा, बलरामपुर और हरदोई — इन चार जनपदों में संचालित किया जाएगा। सफल परीक्षण के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धारा-34 नामांतरण अधिनियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है — केवल प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है।
आम जनता पर असर
इन पोर्टलों के लागू होने से नागरिकों को राजस्व वादों की स्थिति घर बैठे ऑनलाइन ट्रैक करने की सुविधा मिलेगी। नामांतरण के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं रहेगी। निचली अदालतों से रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से भेजे जाने से फाइलों के गुम होने या देरी की संभावना भी काफी हद तक कम होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या चिंता का विषय रही है। डिजिटल पोर्टलों के माध्यम से अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी, जो पारदर्शिता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार की ई-गवर्नेंस पहलों की श्रृंखला में यह नवीनतम कदम है। आने वाले महीनों में इन पोर्टलों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि डिजिटल क्रांति का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँचता है या नहीं।