2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी आउटसोर्स सेवा निगम लॉन्च: मानदेय, ईपीएफ और शिकायत अब एक ही पोर्टल पर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी आउटसोर्स सेवा निगम लॉन्च: मानदेय, ईपीएफ और शिकायत अब एक ही पोर्टल पर

सारांश

उत्तर प्रदेश में लाखों आउटसोर्स कर्मियों की मानदेय अनियमितता और सामाजिक सुरक्षा की समस्या से निपटने के लिए CM योगी ने यूपी आउटसोर्स सेवा निगम और यूपी कॉस पोर्टल लॉन्च किया — भर्ती से लेकर शिकायत तक सब कुछ अब एक ही डिजिटल मंच पर।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सितंबर 2026 को लोकभवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ किया।
यूपी कॉस पोर्टल पर भर्ती, उपस्थिति, मानदेय, ईपीएफ , ईएसआई , अवकाश और शिकायत — सभी सुविधाएँ एकीकृत होंगी।
मानदेय सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में समय पर भेजा जाएगा; कर्मचारी के अधिकारों की डिजिटल निगरानी होगी।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ एमओयू के तहत दुर्घटना बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित किए जाएँगे।
सचिवालय प्रशासन विभाग और नगर निगम लखनऊ के कई आउटसोर्स कर्मियों को बढ़े हुए पारिश्रमिक के चेक वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सितंबर 2026 को लखनऊ के लोकभवन में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का औपचारिक शुभारंभ किया, जिससे प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती, मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निवारण की समूची प्रक्रिया एक ही डिजिटल मंच पर आ गई है। इस अवसर पर यूपी कॉस पोर्टल और आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया तथा निगम के लोगो का अनावरण भी हुआ।

निगम और पोर्टल की मुख्य विशेषताएँ

नई व्यवस्था के अंतर्गत आउटसोर्स कर्मियों की ऑनलाइन भर्ती और ज्वाइनिंग से लेकर उपस्थिति, मानदेय, ईपीएफ अंशदान, ईएसआई लाभ, अवकाश और शिकायत समाधान तक की समस्त जानकारी यूपी कॉस पोर्टल पर एकीकृत होगी। मानदेय सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में समय पर हस्तांतरित किया जाएगा और कर्मचारी के अधिकारों की डिजिटल निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।

पोर्टल के माध्यम से संबंधित विभाग, आउटसोर्स एजेंसी और कर्मचारी — तीनों एक ही प्रणाली से जुड़ेंगे। कर्मचारी अपनी उपस्थिति, भुगतान, कटौती और सेवा-विवरण स्वयं देख सकेगा। इससे अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी।

भारतीय स्टेट बैंक के साथ एमओयू

कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ हुए एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। इस समझौते के तहत आउटसोर्स कर्मियों को दुर्घटना बीमा सहित विभिन्न वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराए जाएँगे। ईपीएफ अंशदान समय पर जमा कराने और ईएसआईसी के लाभ सुनिश्चित करने की विशेष व्यवस्था की गई है।

बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में आउटसोर्स कर्मियों को बढ़े हुए पारिश्रमिक के चेक वितरित किए। चेक पाने वालों में सचिवालय प्रशासन विभाग के फर्राश रोहित कुमार, रात्रि चौकीदार कसिन खान, सफाई कर्मी सरिता, फर्राश आशु कुमार, वाहन चालक अरविंद कुमार यादव और माली रामकुमार शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त नगर निगम लखनऊ के पंप ऑपरेटर जितेंद्र प्रसाद, राजू कन्नौजिया, हंसराज सिंह, दिलीप कुमार, अंजनी कुमार और नरेंद्र तिवारी को भी चेक वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

आम कर्मियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब आउटसोर्स कर्मियों की मानदेय अनियमितता और सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित रहने की शिकायतें लंबे समय से चर्चा में थीं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों की संख्या लाखों में है और उनकी सेवा-शर्तें अब तक बिखरी हुई एजेंसी-आधारित प्रणाली पर निर्भर थीं।

नई एकीकृत व्यवस्था से इन कर्मियों को पारदर्शी भुगतान, समय पर ईपीएफ जमा और शिकायत निवारण का एकल मंच मिलेगा — जो उनके रोज़मर्रा के कार्यसंबंधी अनुभव को बदल सकता है।

आगे की राह

निगम के गठन और पोर्टल के लॉन्च के बाद अब क्रियान्वयन की गति और एजेंसियों का अनुपालन निर्णायक होगा। यदि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो और मानदेय वितरण में पारदर्शिता बनी रहे, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक संदर्भ बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी पोर्टल की घोषणा नहीं बल्कि उसका ज़मीनी क्रियान्वयन होगी। राज्य में लाखों आउटसोर्स कर्मी वर्षों से एजेंसियों की मनमानी और ईपीएफ-ईएसआई की अनियमितता झेलते रहे हैं — महज डिजिटल एकीकरण इस संरचनागत समस्या का स्वतः समाधान नहीं है। SBI के साथ एमओयू और बीमा लाभ की घोषणाएँ तब तक कागज़ी रहेंगी जब तक एजेंसियों के अनुपालन की स्वतंत्र निगरानी और शिकायत निवारण की समयसीमा सार्वजनिक नहीं होती। यदि पोर्टल पर दर्ज शिकायतें अनसुलझी रहीं, तो यह व्यवस्था भी पुरानी प्रणाली की तरह कर्मियों को निराश कर सकती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक नई संस्था है जो प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती, मानदेय, ईपीएफ, ईएसआई और शिकायत निवारण को एकीकृत डिजिटल मंच — यूपी कॉस पोर्टल — पर लाती है। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सितंबर 2026 को लखनऊ के लोकभवन में किया।
यूपी कॉस पोर्टल पर कर्मचारी क्या-क्या देख सकेंगे?
यूपी कॉस पोर्टल पर कर्मचारी अपनी उपस्थिति, मानदेय भुगतान, कटौती, ईपीएफ अंशदान, ईएसआई लाभ, अवकाश और सेवा-विवरण देख सकेंगे। इसके अलावा शिकायत दर्ज कराने और उसके समाधान की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
आउटसोर्स कर्मियों को SBI एमओयू से क्या फायदा होगा?
भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत आउटसोर्स कर्मियों को दुर्घटना बीमा सहित विभिन्न वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे। यह व्यवस्था कर्मियों को उन लाभों तक पहुँच देगी जो पहले एजेंसी-आधारित प्रणाली में प्रायः अनुपलब्ध रहते थे।
क्या मानदेय अब सीधे बैंक खाते में आएगा?
हाँ, नई व्यवस्था के तहत मानदेय सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में समय पर हस्तांतरित किया जाएगा। कर्मचारी के अधिकारों की डिजिटल निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि भुगतान में देरी या अनियमितता पर नज़र रखी जा सके।
इस निगम से किन कर्मचारियों को फायदा होगा?
उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में कार्यरत लाखों आउटसोर्स कर्मी — जिनमें सफाई कर्मी, वाहन चालक, चौकीदार, पंप ऑपरेटर और अन्य श्रेणियाँ शामिल हैं — इस निगम और पोर्टल के दायरे में आएँगे। ये कर्मचारी अब एजेंसियों पर निर्भर रहने की बजाय सीधे पोर्टल से अपनी सेवा-संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 59 मिनट पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 9 घंटे पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले