यूपीसीओएस लॉन्च: CM योगी बोले — 'श्रम का शोषण न हो', 3.5 से 5 लाख आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सितंबर 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) का औपचारिक शुभारंभ किया — एक ऐसी संस्थागत व्यवस्था जो प्रदेश के 3.5 से 5 लाख आउटसोर्स कर्मियों को सम्मानजनक मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी सेवा शर्तें उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार की प्राथमिकता है — 'श्रम का शोषण न हो, अन्याय न हो।'
यूपीसीओएस क्या है और इसमें क्या शामिल है
उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) राज्य सरकार द्वारा स्थापित एक नया निकाय है, जिसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया में मनमानी समाप्त करना और उनकी सेवा व्यवस्था को संस्थागत ढाँचे में लाना है। सरकार ने हर पाँच वर्ष में मानदेय के पुनरीक्षण की व्यवस्था लागू की है, ताकि महंगाई और जीवन-स्तर के अनुरूप कर्मियों का पारिश्रमिक अद्यतन होता रहे।
इसके अतिरिक्त, दुर्घटना की स्थिति में सामाजिक सुरक्षा कवच और कर्मियों के प्रदर्शन का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने की भी व्यवस्था इस निगम के तहत की गई है। सरकार का दावा है कि इससे नियुक्ति और मानदेय से जुड़ी अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
मुख्यमंत्री का संबोधन: विश्वास और गरिमा पर जोर
शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार और कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन का नहीं, बल्कि विश्वास का होता है। उन्होंने कहा, 'कर्मचारी को यह भरोसा होना चाहिए कि वह अकेला नहीं है।' मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि आउटसोर्स कर्मियों को समय पर वेतन मिले और उनकी मेहनत के अनुरूप मानदेय सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव को दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव को भी समाप्त करना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में नगर निकायों के सफाईकर्मियों से लेकर शासन व्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत कर्मचारियों — स्थायी हों या आउटसोर्स — सभी के योगदान को मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया।
आम कर्मियों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मियों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है और उनकी सेवा शर्तों को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ था। 3.5 से 5 लाख कर्मियों को इस निगम के दायरे में लाने से उन्हें संस्थागत शिकायत निवारण तंत्र भी उपलब्ध होगा।
गौरतलब है कि अब तक आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति और मानदेय तय करने में एजेंसियों की मनमानी की शिकायतें आम थीं। यूपीसीओएस के माध्यम से इस प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का दावा किया गया है।
शासन व्यवस्था और जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी का समय केवल कागजी कार्यवाही में नहीं बीतना चाहिए — उसके कार्य का मूल्यांकन व्यवस्थित रूप से होना चाहिए और समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र होना चाहिए। सरकार का कहना है कि यूपीसीओएस से शासन की कार्यक्षमता और जवाबदेही दोनों मज़बूत होंगी।
यह उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स श्रमिकों के लिए पहली बार किसी समर्पित संस्थागत ढाँचे की स्थापना है, जो इसे राज्य के श्रम-प्रशासन इतिहास में एक उल्लेखनीय कदम बनाती है। आने वाले महीनों में इसके क्रियान्वयन की निगरानी यह तय करेगी कि घोषित लक्ष्य ज़मीन पर कितने उतरते हैं।