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यूपी में आउटसोर्स कर्मियों को नई सुरक्षा: असीम अरुण ने श्रमिक दिवस पर सुनाई योगी सरकार की उपलब्धियाँ

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यूपी में आउटसोर्स कर्मियों को नई सुरक्षा: असीम अरुण ने श्रमिक दिवस पर सुनाई योगी सरकार की उपलब्धियाँ

सारांश

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर लखनऊ में आयोजित श्रमिक संवाद 2026 में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने यूपी के आउटसोर्स कर्मियों के लिए नई न्यूनतम मज़दूरी, आईडी कार्ड और आउटसोर्स सेवा निगम की घोषणा की। 1 अप्रैल 2026 से लागू इस निगम का लक्ष्य बिचौलियों का शोषण खत्म करना है।

मुख्य बातें

असीम अरुण ने 1 मई 2026 को लखनऊ में श्रमिक संवाद 2026 में यूपी के आउटसोर्स कर्मियों के लिए नई सुरक्षा का ऐलान किया।
आउटसोर्स सेवा निगम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी; बिचौलियों के शोषण को समाप्त करने का लक्ष्य।
अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी ₹11,000 और कुशल श्रमिकों के लिए ₹13,500 प्रतिमाह निर्धारित।
सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर आउटसोर्स कर्मचारियों को आईडी कार्ड जारी करने का निर्देश।
प्रदेश के 18 जिलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित; हज़ारों श्रमिकों के बच्चे लाभान्वित।
कार्यक्रम में चार नए श्रम कानूनों की जानकारी दी गई।

उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने 1 मई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित 'श्रमिक संवाद 2026' में घोषणा की कि यूपी सरकार ने राज्य के लाखों आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मियों के हितों की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नए लेबर कोड्स और 'आउटसोर्स सेवा निगम' के गठन के ज़रिए इन कर्मचारियों के अधिकारों को कानूनी संरक्षण दिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

श्रमिक संवाद 2026 कार्यक्रम में असीम अरुण ने स्पष्ट किया कि अब आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण संभव नहीं होगा। उन्होंने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर आईडी कार्ड जारी किए जाएँ। साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को वार्षिक प्रमाणपत्र और पुरस्कार देने की व्यवस्था करने का भी आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में चार नए श्रम कानूनों की विस्तृत जानकारी भी दी गई। बताया गया कि कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक कल्याण के लिए छुट्टियों के नियमों में व्यापक सुधार किए गए हैं।

आउटसोर्स सेवा निगम और नई मज़दूरी दरें

1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से बिचौलियों द्वारा होने वाले शोषण को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार के नए लेबर कोड्स के अनुरूप उत्तर प्रदेश में वेतन ढाँचे को नए सिरे से तैयार किया गया है। नई न्यूनतम मज़दूरी दरों के अनुसार अकुशल श्रमिकों के लिए ₹11,000 और कुशल श्रमिकों के लिए ₹13,500 प्रतिमाह निर्धारित की गई हैं।

गौरतलब है कि यह निगम छुट्टियों, काम के घंटों और वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनिवार्य बनाता है — जो पहले की व्यवस्था में प्रायः उपेक्षित रहती थी।

अन्य वक्ताओं की प्रतिक्रिया

समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड ने कहा कि देश और प्रदेश को अग्रणी बनाने में श्रमिकों का अहम योगदान है। उन्होंने बताया कि योगी सरकार श्रमिकों को श्रम कार्ड और वेतन वृद्धि जैसी सुविधाएँ समय पर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश के 18 जिलों में अटल आवासीय विद्यालय बन चुके हैं, जिनमें हज़ारों श्रमिकों के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

यूपी सिडको के चेयरमैन वाईपी सिंह ने कहा कि योगी सरकार में श्रमिकों का सम्मान केवल श्रमिक दिवस तक सीमित नहीं, बल्कि यह हर दिन की प्रतिबद्धता है।

आम जनता पर असर

असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य 'अंत्योदय' है और आउटसोर्सिंग कर्मचारी व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देना सरकार की प्राथमिकता है। कार्यक्रम में श्रमिकों और आउटसोर्स कर्मियों ने मंच से अपने अनुभव और विचार भी साझा किए।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में श्रम सुधारों की माँग तेज़ हो रही है। नए निगम और लेबर कोड्स के प्रभावी क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी अब सरकारी विभागों पर है। असीम अरुण ने स्पष्ट किया कि सभी विभागों को श्रम कानून लागू करने का संकल्प लेना होगा और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। उत्तर प्रदेश में पहले भी श्रम सुधारों की घोषणाएँ हुई हैं, परंतु ज़मीनी स्तर पर प्रवर्तन कमज़ोर रहा है। न्यूनतम मज़दूरी की नई दरें निर्धारित करना एक कदम है, लेकिन बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र और शिकायत निवारण प्रणाली के, बिचौलियों का शोषण महज़ नए रूप में जारी रह सकता है। 15 दिनों में आईडी कार्ड का निर्देश सराहनीय है, पर यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सिर्फ कागज़ी औपचारिकता न बने।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आउटसोर्स सेवा निगम क्या है और यह कब से लागू हुआ?
आउटसोर्स सेवा निगम उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक संस्था है जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुई है। इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान, छुट्टियों और काम के घंटों को पारदर्शी बनाना और बिचौलियों के शोषण को समाप्त करना है।
यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों की न्यूनतम मज़दूरी कितनी है?
नई दरों के अनुसार अकुशल श्रमिकों के लिए ₹11,000 और कुशल श्रमिकों के लिए ₹13,500 प्रतिमाह न्यूनतम मज़दूरी निर्धारित की गई है। ये दरें भारत सरकार के नए लेबर कोड्स के अनुरूप तैयार की गई हैं।
श्रमिक संवाद 2026 में क्या घोषणाएँ हुईं?
1 मई 2026 को लखनऊ में आयोजित श्रमिक संवाद 2026 में आउटसोर्स कर्मचारियों को 15 दिनों में आईडी कार्ड, वार्षिक पुरस्कार, नई न्यूनतम मज़दूरी और चार नए श्रम कानूनों की जानकारी दी गई। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने श्रम कानून लागू करने का संकल्प दोहराया।
अटल आवासीय विद्यालय किन जिलों में हैं और किसे लाभ मिलता है?
उत्तर प्रदेश के 18 जिलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित हो चुके हैं। इन विद्यालयों में हज़ारों श्रमिकों के बच्चे निःशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
आउटसोर्स कर्मचारियों को आईडी कार्ड कब तक मिलेगा?
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर आईडी कार्ड जारी किए जाएँ। यह पहचान पत्र उनके कानूनी अधिकारों की पुष्टि का आधार बनेगा।
राष्ट्र प्रेस
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