पीवी सिंधु ने जापान ओपन जीता, एशियन गेम्स 2026 के लिए जताया जोश
सारांश
मुख्य बातें
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने 2 सितंबर को चेन्नई में कहा कि जापान ओपन खिताब जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बनने की उन्हें अत्यंत प्रसन्नता है और वह आगामी एशियन गेम्स 2026 के लिए पूरी तरह तैयार और उत्साहित हैं। सिंधु ने यह बात एशियन टेनिस बॉल क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कही।
लॉन्च कार्यक्रम में क्या बोलीं सिंधु
पीवी सिंधु एशियन टेनिस बॉल क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 के उद्घाटन समारोह में विशेष अतिथि के रूप में पहुंची थीं। यह टूर्नामेंट 26 से 29 अक्टूबर के बीच तमिलनाडु में आयोजित होगा, जिसमें 13 देशों के खिलाड़ी भाग लेंगे। कार्यक्रम में सिंधु ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है कि मैंने जापान ओपन का खिताब जीता और जाहिर है कि मुझे इस बात की भी खुशी है कि सब कुछ अच्छा चल रहा है। हम जल्द ही एशियन गेम्स के लिए रवाना हो रहे हैं और मैं इसके लिए बहुत उत्साहित हूं।'
उन्होंने टेनिस बॉल क्रिकेट एसोसिएशन की पहल की सराहना करते हुए कहा, 'मुझे खुशी है कि इस तरह की लीग का आयोजन हो रहा है, जिसमें एथलीट बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। इस लीग से एथलीट्स को अपनी काबिलियत दिखाने का भी मौका मिलेगा।' सिंधु ने यह भी उम्मीद जताई कि इस लीग को सरकार का भरपूर सहयोग मिलेगा।
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में निराशा के बाद नई उड़ान
गौरतलब है कि BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में सिंधु का प्रदर्शन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा था। वह राउंड ऑफ 16 में चीनी शटलर वांग झी यी से 21-11, 15-21 और 21-17 के स्कोर से हार गई थीं। भारत उस टूर्नामेंट में केवल एक ब्रॉन्ज मेडल ही जीत सका था। ऐसे में जापान ओपन की जीत सिंधु के लिए आत्मविश्वास को पुनः स्थापित करने वाली साबित हुई है।
एशियन गेम्स में सिंधु का रिकॉर्ड
पीवी सिंधु एशियन गेम्स में पहले भी पदक जीत चुकी हैं। 2014 के एशियन गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था, जबकि 2018 के एशियन गेम्स में वह सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैडमिंटन का स्तर अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार ऊँचा हो रहा है और सिंधु एक बार फिर शीर्ष प्रदर्शन की दिशा में अग्रसर दिख रही हैं।
आगे क्या
एशियन गेम्स 2026 में सिंधु से स्वर्ण पदक की उम्मीद लगाए बैठे भारतीय प्रशंसकों के लिए जापान ओपन की जीत एक सकारात्मक संकेत है। टूर्नामेंट से पहले उनका यह आत्मविश्वास और ऊर्जा भारतीय बैडमिंटन के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।