पीवी सिंधु ने जापान ओपन सुपर 750 जीता, अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
पीवी सिंधु ने रविवार, 19 जुलाई को टोक्यो मेट्रोपॉलिटन जिम्नेजियम में जापान ओपन सुपर 750 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया — वह यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बन गई हैं। पूर्व विश्व चैंपियन और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता ने फाइनल में जापान की चार बार की चैंपियन अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से परास्त किया।
दो साल बाद बीडब्ल्यूएफ खिताब की वापसी
यह सिंधु का दिसंबर 2024 में सैयद मोदी टूर्नामेंट जीतने के बाद पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब है। इससे भी बड़ी बात यह है कि इस जीत के साथ सिंधु का सुपर 750 या उससे ऊपर का खिताब जीतने का सात साल का इंतजार समाप्त हो गया। गौरतलब है कि सिंधु ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ किस्मत का भी लाभ उठाया — क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में उनकी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी चोट के कारण मैच से हट गईं। हालांकि प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने वर्ल्ड नंबर 5 हान यू को हराकर अपनी क्षमता का प्रमाण दिया।
पहले गेम का रोमांचक घटनाक्रम
सिंधु ने फाइनल की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की — लगातार दो अंक जीते और सफल चैलेंज लेकर 3-0 की बढ़त बनाई। यामागुची ने तेज वापसी करते हुए स्कोर बराबर किया, लेकिन सिंधु ने प्रतिद्वंद्वी की गलतियों का फायदा उठाकर 9-7 की बढ़त हासिल की। मिड-गेम इंटरवल तक यामागुची ने लगातार चार अंक जीतकर पलटवार किया और बढ़त अपने नाम की।
खेल दोबारा शुरू होने पर सिंधु का खेल बदल गया — उन्होंने यामागुची को बैकफुट पर धकेला और बढ़त 16-12 तक पहुँचाई। स्कोर 17-17 पर बराबर होने के बाद सिंधु ने लगातार चार अंक लेकर पहला गेम 21-17 से जीत लिया।
दूसरे गेम में भारतीय शटलर का दबदबा
दूसरे गेम में सिंधु ने 6-3, फिर 8-3 की बढ़त बनाई। यामागुची ने चार लगातार अंक जीतकर दबाव बनाया, लेकिन सिंधु 11-7 की बढ़त के साथ मिड-गेम ब्रेक में पहुँचीं। ब्रेक के बाद सिंधु ने तेज़ खेल का प्रदर्शन जारी रखा और 14-7 की मज़बूत बढ़त बनाई। यामागुची ने पाँच लगातार अंक जीतकर अंतर 18-17 तक घटाया, लेकिन सिंधु ने तीन मैच प्वाइंट के मौके बनाते हुए गेम 21-17 से जीत लिया और खिताब पर कब्ज़ा जमाया।
ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व
यह जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए मील का पत्थर है। सिंधु ने इससे पहले 2019 में बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2016 रियो तथा 2020 टोक्यो ओलंपिक में रजत व कांस्य पदक जीते थे। यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारतीय बैडमिंटन में युवा पीढ़ी तेज़ी से उभर रही है — सिंधु का यह खिताब उनके अनुभव और मानसिक दृढ़ता की पुष्टि करता है। आगे सिंधु का ध्यान बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर के आगामी सुपर 1000 टूर्नामेंटों पर होगा।