कनाडा के इतिहास की सबसे भीषण वाइल्डफायर: PM मार्क कार्नी ने कहा — मिलकर लड़ेंगे
सारांश
मुख्य बातें
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 19 जुलाई को कहा कि देश इस समय अपने इतिहास की सबसे भीषण वाइल्डफायर संकट का सामना कर रहा है और इससे निपटने के लिए 'ऑल हैंड्स ऑन डेक' — यानी सभी की संयुक्त भागीदारी — की रणनीति अपनाई जा रही है। उत्तर-पश्चिमी ओंटारियो में आग की स्थिति को उन्होंने 'बेहद विनाशकारी' बताया, जहाँ 10 से अधिक समुदायों को अपने घर खाली करने पड़े हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कार्नी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया। ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक कनाडा में 3,839 वाइल्डफायर की घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें 29 लाख हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जल चुका है।
शनिवार तक देशभर में 971 सक्रिय वाइल्डफायर दर्ज किए गए, जिनमें से 239 पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हैं। अकेले उत्तरी ओंटारियो में करीब 190 सक्रिय आग विशाल वन क्षेत्रों में फैल रही हैं।
राहत और बचाव अभियान
कार्नी ने बताया कि हालात पर काबू पाने के लिए देशभर में 5,300 से अधिक अग्निशमन कर्मियों को तैनात किया गया है, जबकि लगभग 300 विमान राहत और आग बुझाने के अभियान में जुटे हैं।
उन्होंने कहा कि कनाडा आग का वास्तविक समय में पता लगाने और उसे नियंत्रित करने के लिए डेटा, ड्रोन, नई प्रौद्योगिकियों और उन्नत थर्मल इमेजिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है।
आपदा तैयारी का स्तर बढ़ा
कैनेडियन इंटरएजेंसी फॉरेस्ट फायर सेंटर के अनुसार, कनाडा की राष्ट्रीय आपदा तैयारी का स्तर बढ़ाकर लेवल-4 कर दिया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में साझा संसाधनों की बड़े पैमाने पर तैनाती को दर्शाता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भीषण गर्मी और लंबे सूखे के कारण देश में जंगल की आग का संकट तेज़ी से बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि उत्तरी ओंटारियो में लगी आग के कारण स्वदेशी समुदायों को बड़े पैमाने पर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है — यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानवीय भी है।
ट्रंप की चेतावनी और कनाडा पर दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा सरकार पर जंगलों के प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि कनाडा में लगी आग से उठ रहा प्रदूषित धुआँ अमेरिका तक पहुँच रहा है और इस नुकसान को कनाडा पर लगाए जाने वाले टैरिफ में शामिल किया जा सकता है।
आग से उठ रहा घना धुआँ दक्षिण की ओर बढ़कर अमेरिका के कई प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, जिससे यह संकट अब द्विपक्षीय तनाव का भी विषय बन गया है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री कार्नी की 'ऑल हैंड्स ऑन डेक' अपील यह संकेत देती है कि संघीय और प्रांतीय सरकारें मिलकर इस आपदा से निपटने की कोशिश करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं।