कनाडा का अमेरिका पर जवाबी टैरिफ का ऐलान आज, ट्रंप की 'फॉल इन लाइन' चेतावनी के बाद तनाव चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को अमेरिका के खिलाफ लक्षित जवाबी टैरिफ की घोषणा करने की तैयारी में है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा को 'फॉल इन लाइन' की सार्वजनिक चेतावनी और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता के विफल होने के बाद उठाया जा रहा है। टोरंटो से मिली रिपोर्टों के अनुसार, यह घोषणा कनाडाई वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन समेत कई वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी।
ट्रंप की चेतावनी और अमेरिकी दबाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडाई नेताओं को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वे अमेरिकी मांगों के अनुरूप नहीं आते, तो उन्हें मौजूदा टैरिफ से भी 'कहीं ज़्यादा गंभीर' परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाली कारों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की धमकी दी है। प्रस्तावित ये नए शुल्क 1 जनवरी अगले वर्ष से लागू किए जाने की बात कही गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते पहले से ही दबाव में हैं और बातचीत के कई दौर बेनतीजा रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका और कनाडा के बीच ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखलाएं इतनी गहराई से जुड़ी हैं कि एक देश में बना कार का पुर्जा सीमा पार कई बार आता-जाता है।
कनाडा की जवाबी रणनीति
प्रधानमंत्री कार्नी ने अमेरिकी रुख को दृढ़ता से खारिज करते हुए कहा कि उनका देश ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा जिसमें कनाडा को अमेरिका की अधीनस्थ इकाई की तरह व्यवहार करना पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रस्ताव कनाडा के ऑटो, स्टील और एल्युमीनियम जैसे प्रमुख उद्योगों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।
कार्नी ने संकेत दिया कि कनाडा अब 'डॉलर-फॉर-डॉलर' जवाब देने के बजाय लक्षित जवाबी शुल्क की रणनीति अपनाएगा, जिससे कनाडाई कारोबार और श्रमिकों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को सीमित किया जा सके। यह रणनीतिक बदलाव यह दर्शाता है कि ओटावा एक लंबी व्यापार जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
ओंटारियो का कड़ा रुख और ऊर्जा का दांव
ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने भी ट्रंप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया कि कनाडा अमेरिका को बिजली और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति जैसे विकल्पों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है। यह कदम व्यापार विवाद को ऊर्जा और संसाधन कूटनीति के दायरे में ले जाने का संकेत है।
श्रमिकों और उद्योगों पर असर
कनाडाई मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, वित्त मंत्री शैंपेन समेत कई मंत्री मंगलवार को टैरिफ-प्रभावित कर्मचारियों के लिए सरकारी सहायता उपायों की भी घोषणा करने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला टैरिफ विवाद दोनों देशों के उद्योगों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं के लिए लागत में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंध इतने तनावपूर्ण हुए हों — ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ विवाद हुआ था, जो अंततः USMCA समझौते से सुलझा था। अब देखना होगा कि क्या दोनों देश एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटते हैं, या टैरिफ की यह जंग और गहरी होती है।