24 अगस्त 2026
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ट्रंप के 50% टैरिफ पर अमेरिकी सांसदों का विरोध, कनाडा वार्ता टूटने से कारोबार पर मंडराया संकट

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ट्रंप के 50% टैरिफ पर अमेरिकी सांसदों का विरोध, कनाडा वार्ता टूटने से कारोबार पर मंडराया संकट

सारांश

कनाडा के साथ व्यापार वार्ता टूटने के बाद ट्रंप के 50% टैरिफ लागू हो गए — अब खुद रिपब्लिकन सांसद भी विरोध में उतरे हैं। कनाडा ने भी जवाबी शुल्क का ऐलान किया है। उत्तरी अमेरिका की आपस में जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाएं और सीमावर्ती राज्यों के किसान-कारोबारी सबसे ज़्यादा दबाव में हैं।

मुख्य बातें

23 अगस्त से कनाडा के उत्पादों पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लागू हुए, वार्ता बिना समझौते के टूटी।
रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने चेताया कि मेन राज्य हर साल कनाडा से 2 अरब डॉलर के उत्पाद आयात करता है, कीमतें बढ़ेंगी।
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा — अमेरिका ने अंतिम समय में नई शर्तें थोपीं, 28 अरब कनाडाई डॉलर के उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाया जाएगा।
डेमोक्रेटिक सीनेटर पीटर वेल्च ने टैरिफ को सीमावर्ती राज्यों के किसानों-व्यवसायों के लिए 'थप्पड़' बताया।
कांग्रेस में मांग उठी कि राष्ट्रपति के टैरिफ फैसलों पर विधायी समीक्षा अनिवार्य की जाए।
विनिर्माण, कृषि, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखलाएं सबसे ज़्यादा प्रभावित होने की आशंका।

अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसके तहत कनाडा के उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किए गए हैं। 23 अगस्त से प्रभावी ये शुल्क उस समय लगाए गए जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता किसी ठोस समझौते के बिना टूट गई। सांसदों का कहना है कि इससे सीमावर्ती राज्यों में कीमतें बढ़ेंगी, आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होंगी और दशकों पुराने आर्थिक संबंध खतरे में पड़ जाएंगे।

वार्ता क्यों टूटी

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि वॉशिंगटन ने वार्ता के अंतिम चरण में नई शर्तें थोपीं, जिन्हें ओटावा ने अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदेह माना। कार्नी के अनुसार, अमेरिका ने 'बहुत ज़्यादा मांग की और बदले में बहुत कम पेशकश की।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा अपनी संप्रभुता, सांस्कृतिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण उद्योगों से कोई समझौता नहीं करेगा।

दूसरी ओर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने इस गतिरोध की ज़िम्मेदारी कनाडा पर डाली। उनका आरोप है कि ओटावा ने पहले सहमत हुई शर्तों को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया और कुछ प्रतिबद्धताओं को वापस ले लिया या उनमें बदलाव कर दिया।

सांसदों की चेतावनी

रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने कहा कि बार-बार शुरू और बंद होने वाली ये वार्ताएं उनके गृह राज्य मेन के कारोबारों के लिए लागत, जोखिम और अनिश्चितता बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा, 'अगर प्रशासन इन टैरिफ को लागू करता है, तो मेन के परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, क्योंकि ज़्यादातर व्यवसायों के पास बढ़ी हुई लागत को अपने ग्राहकों तक ऊंची कीमतों के रूप में पहुंचाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।'

कॉलिन्स ने बताया कि मेन हर साल कनाडा से लगभग 2 अरब डॉलर के गैर-पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है। किसान, लॉब्स्टर मछुआरे और अन्य कारोबारी आपूर्ति श्रृंखला में कमी और कनाडा की जवाबी कार्रवाई को लेकर गहरी चिंता में हैं।

सीनेट वित्त समिति के सदस्य और डेमोक्रेटिक सीनेटर पीटर वेल्च ने इन टैरिफ को वरमोंट और अन्य उत्तरी सीमावर्ती राज्यों के व्यवसायों एवं किसानों के लिए 'एक थप्पड़' की तरह बताया। उन्होंने कहा कि कई दशकों में बने व्यापारिक रिश्ते खतरे में पड़ रहे हैं और राष्ट्रपति ट्रंप से इस टकराव को खत्म करने का रास्ता निकालने की अपील की।

कनाडा का जवाबी रुख

कनाडाई सरकार के अनुसार, अमेरिका लगभग 28 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी में था। इसके जवाब में ओटावा ने भी डॉलर के बदले डॉलर के हिसाब से जवाबी शुल्क लगाने और प्रभावित कर्मचारियों व कंपनियों को अतिरिक्त सहायता देने का वादा किया है।

कांग्रेस की भूमिका पर बहस

हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी में शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य प्रतिनिधि रिचर्ड नील ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि उन्होंने अंतिम समय में मांगें बदल दीं, जिससे अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक कनाडा के साथ चल रही बातचीत बाधित हुई। नील ने चेतावनी दी कि वार्ता टूटने की आर्थिक कीमत अमेरिकी कर्मचारियों, व्यवसायों और उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ेगी।

वेल्च ने रिपब्लिकन सांसदों से आग्रह किया कि वे टैरिफ से जुड़े मामलों में कांग्रेस के संवैधानिक अधिकारों को फिर से मजबूत करें। उनके अनुसार, व्यापार नीति पर कांग्रेस ने कार्यपालिका को ज़रूरत से ज़्यादा अधिकार दे दिए हैं। कॉलिन्स और वेल्च दोनों ऐसे विधायी प्रस्तावों का समर्थन कर चुके हैं जो बड़े टैरिफ फैसलों पर कांग्रेस की समीक्षा को अनिवार्य बनाएंगे।

आम जनता और उद्योगों पर असर

यह टकराव ऐसे समय में आया है जब उत्तरी अमेरिका की आपस में जुड़ी अर्थव्यवस्था पहले से ही वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। विनिर्माण, कृषि, ऊर्जा और परिवहन जैसे क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखलाएं अक्सर अमेरिका-कनाडा सीमा को कई बार पार करती हैं, तब जाकर तैयार उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचते हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन के टैरिफ फैसलों ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को तनाव में डाला हो — आलोचकों का कहना है कि बार-बार की यह अनिश्चितता दीर्घकालिक निवेश निर्णयों को भी प्रभावित कर रही है।

कॉलिन्स और वेल्च दोनों ने वॉशिंगटन और ओटावा से बातचीत की मेज पर लौटने और एक निष्पक्ष समझौते तक पहुंचने की अपील की है। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के व्यापार अधिकारियों की बैठक की संभावना पर नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संकेत है कि घरेलू राजनीतिक आधार भी दरक रहा है। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस वास्तव में टैरिफ अधिकार वापस लेने की इच्छाशक्ति दिखाएगी, या यह विरोध महज़ बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा। उत्तरी अमेरिका की एकीकृत आपूर्ति श्रृंखलाएं दशकों की कूटनीति की देन हैं — इन्हें बार-बार के टैरिफ झटकों से जो नुकसान हो रहा है, वह किसी एक समझौते से आसानी से नहीं भरा जा सकता।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कनाडा पर अमेरिका ने 50% टैरिफ क्यों लगाए?
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता किसी समझौते के बिना टूट गई, जिसके बाद 23 अगस्त से कनाडा के उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गए। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के अनुसार, कनाडा ने पहले सहमत शर्तों को अंतिम रूप देने से इनकार किया।
कनाडा ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में क्या किया?
कनाडाई सरकार ने 28 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों पर डॉलर के बदले डॉलर के हिसाब से जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। साथ ही प्रभावित कर्मचारियों और कंपनियों को अतिरिक्त सहायता देने का वादा भी किया गया है।
अमेरिकी सांसद इन टैरिफ का विरोध क्यों कर रहे हैं?
सांसदों का कहना है कि इन टैरिफ से सीमावर्ती राज्यों — खासकर मेन और वरमोंट — के किसानों, मछुआरों और कारोबारियों पर सीधा बोझ पड़ेगा। रिपब्लिकन सीनेटर कॉलिन्स ने कहा कि व्यवसायों के पास बढ़ी लागत को उपभोक्ताओं पर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
कनाडा-अमेरिका व्यापार विवाद का किन क्षेत्रों पर सबसे ज़्यादा असर होगा?
विनिर्माण, कृषि, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि इनकी आपूर्ति श्रृंखलाएं अमेरिका-कनाडा सीमा को कई बार पार करती हैं। लॉब्स्टर मछुआरे और किसान कनाडा की जवाबी कार्रवाई से आपूर्ति में कमी को लेकर चिंतित हैं।
क्या अमेरिकी कांग्रेस टैरिफ फैसलों पर राष्ट्रपति की शक्ति सीमित कर सकती है?
इस विवाद के बाद कांग्रेस में मांग उठी है कि राष्ट्रपति के टैरिफ फैसलों पर विधायी समीक्षा अनिवार्य की जाए। सीनेटर कॉलिन्स और वेल्च दोनों ऐसे प्रस्तावों का समर्थन कर चुके हैं, हालांकि इन्हें पारित करने के लिए पर्याप्त रिपब्लिकन समर्थन जुटाना अभी बड़ी चुनौती है।
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