9 अक्टूबर 2026
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भारत-जीसीसी एफटीए वार्ता पर रियाद में अहम बैठक, राजदूत विपुल ने महासचिव अल-बुदैवी से की मुलाकात

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भारत-जीसीसी एफटीए वार्ता पर रियाद में अहम बैठक, राजदूत विपुल ने महासचिव अल-बुदैवी से की मुलाकात

सारांश

सऊदी अरब में भारतीय राजदूत विपुल और जीसीसी महासचिव अल-बुदैवी की रियाद बैठक में एफटीए वार्ता और द्विपक्षीय सहयोग को केंद्र में रखा गया। वित्त वर्ष 2024-25 में $178 अरब के द्विपक्षीय व्यापार की पृष्ठभूमि में यह बैठक भारत-जीसीसी संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

सऊदी अरब में भारत के राजदूत विपुल ने 24 अगस्त 2026 को रियाद में जीसीसी महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी से मुलाकात की।
बैठक में भारत-जीसीसी एफटीए वार्ता, उच्च स्तरीय संपर्क और क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
फरवरी 2026 में दोनों पक्षों ने एफटीए के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर हस्ताक्षर किए थे; मुख्य वार्ताकार अजय भादू और राजा अल मरजूकी थे।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-जीसीसी द्विपक्षीय व्यापार लगभग $178 अरब रहा।
जीसीसी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं।
भारत-जीसीसी संयुक्त कार्य योजना (जेएपी) 2024-2028 के तहत व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति है।

सऊदी अरब में भारत के राजदूत विपुल ने 24 अगस्त 2026 को रियाद में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की चल रही वार्ताओं को गति देने और द्विपक्षीय सहयोग को और मज़बूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

बैठक में क्या हुई चर्चा

सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी। दूतावास के अनुसार, 'राजदूत विपुल ने जीसीसी के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी से मुलाकात की। दोनों ने भारत-जीसीसी सहयोग, एफटीए वार्ता और उच्च स्तरीय संपर्कों को और मज़बूत करने पर चर्चा की। साथ ही, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।' यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और जीसीसी देशों के बीच व्यापारिक एवं कूटनीतिक संबंध नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं।

एफटीए वार्ता की पृष्ठभूमि

इस साल फरवरी 2026 में भारत और जीसीसी ने एफटीए वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए थे। यह दस्तावेज़ बातचीत के दायरे और प्रक्रिया को निर्धारित करता है। नई दिल्ली में वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं मुख्य वार्ताकार अजय भादू और जीसीसी सचिवालय के मुख्य वार्ताकार राजा अल मरजूकी ने इस पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में रियाद में आयोजित दो दिवसीय भारत-जीसीसी राजनीतिक संवाद के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-जीसीसी संयुक्त कार्य योजना (जेएपी) 2024-2028 के तहत सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की थी।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

भारत-जीसीसी संयुक्त कार्य योजना के अंतर्गत राजनीतिक संवाद, सुरक्षा, व्यापार और निवेश, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, संस्कृति और शिक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, भारत और जीसीसी देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

व्यापार और भारतीय प्रवासी समुदाय

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और जीसीसी के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग $178 अरब रहा। जीसीसी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं, जो इस संबंध को केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि मानवीय धरातल पर भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाता है। जीसीसी की स्थापना 1981 में रियाद में हुई थी और इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।

आगे क्या होगा

एफटीए वार्ता की रूपरेखा तय हो जाने के बाद अब दोनों पक्षों के बीच तकनीकी दौर की बातचीत और तेज़ होने की उम्मीद है। यह बैठक इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए के अंतिम रूप लेने से दोनों पक्षों के बीच व्यापार में और तेज़ी आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस रूपरेखा से समझौते की अंतिम समयसीमा कितनी स्पष्ट होती है। $178 अरब का द्विपक्षीय व्यापार पहले से ही प्रभावशाली है, जो दर्शाता है कि दोनों पक्षों के बीच आर्थिक जुड़ाव बिना एफटीए के भी गहरा है। ऐसे में एफटीए की असली उपयोगिता तभी सिद्ध होगी जब यह बाज़ार पहुँच, श्रम अधिकार और ऊर्जा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ठोस प्रावधान सुनिश्चित करे। उच्च स्तरीय बैठकें ज़रूरी हैं, पर वार्ता की गति और पारदर्शिता पर नज़र रखना उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-जीसीसी एफटीए वार्ता की ताज़ा स्थिति क्या है?
फरवरी 2026 में भारत और जीसीसी ने एफटीए वार्ता के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर हस्ताक्षर किए, जो बातचीत का दायरा और प्रक्रिया तय करता है। 24 अगस्त 2026 को रियाद में राजदूत विपुल और जीसीसी महासचिव अल-बुदैवी की बैठक में इस वार्ता को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
जीसीसी क्या है और इसमें कौन-से देश शामिल हैं?
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) की स्थापना 1981 में रियाद में हुई थी। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। इन देशों के बीच भौगोलिक निकटता, साझा राजनीतिक व्यवस्था और समान आर्थिक हित इसकी नींव हैं।
भारत और जीसीसी के बीच व्यापार कितना है?
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और जीसीसी के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग $178 अरब रहा। जीसीसी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो इस संबंध को आर्थिक के साथ-साथ मानवीय धरातल पर भी महत्त्वपूर्ण बनाता है।
भारत-जीसीसी संयुक्त कार्य योजना (जेएपी) 2024-2028 में कौन-से क्षेत्र शामिल हैं?
इस कार्य योजना में राजनीतिक संवाद, सुरक्षा, व्यापार और निवेश, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, संस्कृति और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इस पर सितंबर 2025 में रियाद में हुए दो दिवसीय भारत-जीसीसी राजनीतिक संवाद के दौरान सहमति बनी थी।
एफटीए के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर किसने हस्ताक्षर किए?
वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं मुख्य वार्ताकार अजय भादू और जीसीसी सचिवालय के मुख्य वार्ताकार राजा अल मरजूकी ने फरवरी 2026 में नई दिल्ली में इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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