24 अगस्त 2026
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यूपीआई लेनदेन एक दशक में 13,000 गुना बढ़े, वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा

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यूपीआई लेनदेन एक दशक में 13,000 गुना बढ़े, वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा

सारांश

एक दशक पहले जो प्लेटफॉर्म 1.78 करोड़ सालाना लेनदेन से शुरू हुआ, वह अब 24,162 करोड़ लेनदेन और ₹314 लाख करोड़ की वैल्यू तक पहुँच गया है। IMF की मुहर के साथ यूपीआई अब वैश्विक रियल-टाइम भुगतान का 49% हिस्सा संभालता है — यह भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे की सबसे बड़ी सफलता की कहानी है।

मुख्य बातें

यूपीआई पर वार्षिक लेनदेन वित्त वर्ष 2016-17 के 1.78 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गए — 13,000 गुना वृद्धि।
कुल लेनदेन वैल्यू ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹314 लाख करोड़ — करीब 4,000 गुना की बढ़ोतरी।
IMF ने यूपीआई को लेनदेन मात्रा के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना; 2025 में वैश्विक हिस्सेदारी 49% ।
जुलाई 2026 में रिकॉर्ड 2,366 करोड़ मासिक लेनदेन — यूपीआई के इतिहास का सर्वोच्च आंकड़ा।
यूपीआई से जुड़े लाइव बैंकों की संख्या 44 से बढ़कर 703 हुई; 86% P2M लेनदेन ₹500 से कम के।

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर वार्षिक लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ तक पहुँच गई है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में यह संख्या मात्र 1.78 करोड़ थी। वित्त मंत्रालय ने 24 अगस्त 2026 को यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि यूपीआई आज भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन चुका है।

यूपीआई की दस साल की यात्रा

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने 25 अगस्त 2016 को यूपीआई को औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। उस समय प्लेटफॉर्म पर महज 44 बैंक सक्रिय थे और सालाना लेनदेन की संख्या करोड़ के शुरुआती अंकों में थी। एक दशक बाद, वित्त वर्ष 2025-26 तक यूपीआई से जुड़े लाइव बैंकों की संख्या बढ़कर 703 हो गई है, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और सहकारी बैंक सम्मिलित हैं।

लेनदेन की कुल मूल्य-वृद्धि भी उतनी ही उल्लेखनीय रही है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई लेनदेन की कुल वैल्यू वित्त वर्ष 2016-17 के ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹314 लाख करोड़ हो गई — यानी करीब 4,000 गुना की बढ़ोतरी।

वैश्विक मान्यता और बाज़ार हिस्सेदारी

यूपीआई की वैश्विक पहचान अब आधिकारिक रूप से स्थापित हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने यूपीआई को लेनदेन की मात्रा के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम घोषित किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 2025 तक वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी — यानी दुनिया भर में हर दो रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में से एक भारत के यूपीआई पर होता है।

यह ऐसे समय में आया है जब कई विकसित देश अभी भी अपनी रियल-टाइम पेमेंट अवसंरचना को परिपक्व करने में लगे हैं। गौरतलब है कि यूपीआई की इंटरऑपरेबिलिटी और शून्य-शुल्क मॉडल ने इसे वैश्विक स्तर पर अनुकरणीय बनाया है।

2026 में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि

2026 में यूपीआई की रफ्तार और तेज हो गई है। मई 2026 में पहली बार मासिक लेनदेन की संख्या 2,300 करोड़ का आंकड़ा पार कर 2,320 करोड़ पर पहुँची। इसके बाद जुलाई 2026 में प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए — यह यूपीआई के दस साल के सफर में किसी एक माह में सर्वाधिक लेनदेन का आंकड़ा है।

मर्चेंट और व्यक्तिगत भुगतान का स्वरूप

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों से यूपीआई के उपयोग का स्वरूप भी स्पष्ट होता है। कुल लेनदेन संख्या में पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी दुकानदार को भुगतान का हिस्सा 63 प्रतिशत रहा, जबकि कुल लेनदेन वैल्यू में पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान का योगदान 71 प्रतिशत था।

यह आंकड़े यह भी बताते हैं कि यूपीआई रोजमर्रा के छोटे भुगतान का माध्यम बन चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 86 प्रतिशत P2M लेनदेन ₹500 से कम के थे, और 59 प्रतिशत P2P लेनदेन भी ₹500 से कम के रहे — जो यह दर्शाता है कि किराना, चाय, ऑटो किराया जैसे सूक्ष्म भुगतान में भी डिजिटल लेनदेन सामान्य हो चुका है।

आगे की राह

यूपीआई का विस्तार अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को भी पार कर रहा है। कई देशों के साथ क्रॉस-बॉर्डर यूपीआई भुगतान के समझौते हो चुके हैं। आने वाले वर्षों में क्रेडिट-ऑन-यूपीआई और ऑफलाइन पेमेंट जैसी सुविधाओं के विस्तार से यह प्लेटफॉर्म और अधिक समावेशी बनने की दिशा में अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 49% वैश्विक हिस्सेदारी का आंकड़ा एक सवाल भी उठाता है — क्या यह भारत की वास्तविक डिजिटल परिपक्वता को दर्शाता है या जनसंख्या के पैमाने और मुफ्त लेनदेन मॉडल का स्वाभाविक परिणाम है? 86% P2M लेनदेन ₹500 से कम के होना यह बताता है कि यूपीआई सूक्ष्म अर्थव्यवस्था में गहरी पैठ बना चुका है, जो वित्तीय समावेशन की दृष्टि से सकारात्मक है। हालाँकि, शून्य-MDR नीति की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और साइबर धोखाधड़ी में हो रही वृद्धि — जो यूपीआई की लोकप्रियता के साथ-साथ बढ़ी है — वे पहलू हैं जिन पर इस उत्सव के बीच गंभीर नीतिगत ध्यान देना जरूरी है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई लेनदेन एक दशक में कितना बढ़ा है?
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई पर वार्षिक लेनदेन की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 के 1.78 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई — यानी 13,000 गुना से अधिक की वृद्धि। इसी अवधि में कुल लेनदेन वैल्यू भी ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गई।
IMF ने यूपीआई को लेकर क्या कहा है?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने यूपीआई को लेनदेन की मात्रा के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। 2025 तक वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।
यूपीआई पर अब तक का सबसे बड़ा मासिक लेनदेन रिकॉर्ड कब बना?
जुलाई 2026 में यूपीआई पर रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जो इसके दस साल के इतिहास में किसी एक माह का सर्वोच्च आंकड़ा है। इससे पहले मई 2026 में पहली बार मासिक लेनदेन 2,300 करोड़ का आंकड़ा पार कर 2,320 करोड़ पर पहुँचा था।
यूपीआई का उपयोग किस तरह के भुगतान में सबसे अधिक हो रहा है?
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल लेनदेन संख्या में पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतान का हिस्सा 63 प्रतिशत रहा, जो दर्शाता है कि यूपीआई दुकानों और व्यापारियों को भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। इसके अलावा, 86 प्रतिशत P2M लेनदेन ₹500 से कम के थे, जो रोजमर्रा के सूक्ष्म भुगतान में इसकी गहरी पैठ दर्शाता है।
यूपीआई से कितने बैंक जुड़े हैं और यह पहले कितने थे?
यूपीआई की शुरुआत वित्त वर्ष 2016-17 में 44 लाइव बैंकों के साथ हुई थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़कर 703 हो गए हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं।
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